शोभना शर्मा, अजमेर । राजस्थान में डेयरी और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े हजारों किसान और दुग्ध उत्पादक अब सरकार की उदासीनता के विरुद्ध खुलकर सामने आने को तैयार हैं। राज्य सरकार द्वारा लंबे समय से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादन संबल योजना, मिड डे मील योजना की राशि और सहकारिता क्षेत्र की मांगों को नजरअंदाज करने के चलते अब किसान, पशुपालक और दुग्ध उत्पादक 24 अगस्त को अजमेर में एकजुट होकर श्वेत क्रांति सहकार महाकुंभ के आयोजन के माध्यम से सरकार को जगाने की कोशिश करेंगे।
यह आयोजन अजमेर के तबीजी स्थित पशु आहार केंद्र के पास कच्छावा गार्डन में दोपहर 12:15 बजे से आयोजित किया जाएगा। आयोजन की अगुवाई अजमेर सरस डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी करेंगे, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 25 हजार किसान, दुग्ध उत्पादक, डेयरी कर्मचारी और सहकारिता क्षेत्र के प्रतिनिधि भाग लेंगे।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
सरकार की उदासीनता से नाराज़ किसानों और पशुपालकों का कहना है कि राज्य सरकार ने सात माह से मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादन संबल योजना के तहत बकाया ₹320 करोड़ तथा मिड डे मील योजना की ₹320 करोड़ की राशि अब तक जारी नहीं की है। इससे डेयरी व्यवसाय से जुड़े हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में भारी वर्षा के कारण किसानों को जहां खेतों में नुकसान उठाना पड़ा है, वहीं पशुपालकों को चारा और आहार की आपूर्ति में भी कठिनाई हो रही है। ऐसे में सरकार द्वारा अनुदान और बीमा राहत जारी नहीं करने से यह संकट और गंभीर हो गया है।
दुग्ध उत्पादन में गिरावट
प्रदेश, जो 2022-23 में देश में दुग्ध उत्पादन में पहले स्थान पर था, अब दूसरे पायदान पर खिसक गया है। यदि यही स्थिति रही और सरकार द्वारा राहत नहीं दी गई तो राजस्थान तीसरे स्थान पर चला जाएगा, जो राज्य की डेयरी छवि के लिए एक गंभीर आघात होगा। अजमेर सरस डेयरी में दूध की आवक में प्रतिदिन लगभग 1 लाख लीटर की कमी दर्ज की जा रही है। यही स्थिति प्रदेश के अन्य जिला दूध संघों की है, जहां दुग्ध आपूर्ति में लगातार गिरावट देखी जा रही है। इसका कारण किसानों को समय पर भुगतान न मिलना, चारा संकट और सरकार की निष्क्रियता है।
प्रमुख नेताओं की मौजूदगी
श्वेत क्रांति महाकुंभ में कांग्रेस के कई बड़े नेता भाग लेंगे, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस प्रभारी सुखविंदर सिंह रंधावा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लाम्बा और प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष सारिका सिंह प्रमुख हैं। इनके अलावा राज्य भर के जिला दूध संघों के अध्यक्ष, सचिव, महिला पशुपालक, युवा किसान और डेयरी संघों के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहेंगे।
लंबित मांगें और भर्ती प्रक्रिया
डेयरी क्षेत्र में लगभग ढाई हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। डेयरी संघों द्वारा बार-बार आग्रह के बावजूद सरकार इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पाई है। यह भर्तियाँ जिला संघों के आर्थिक सहयोग से पूरी की जानी हैं, लेकिन फिर भी प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया गया। इसके अलावा इंडियन डेयरी सर्विस कैडर की स्थापना की मांग भी लंबे समय से की जा रही है, जिससे डेयरी क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित युवाओं को उचित अवसर मिल सके। सरकार इस मांग को भी नजरअंदाज करती रही है।
डेयरी को कृषि क्षेत्र में शामिल करने की मांग
अजमेर संसदीय क्षेत्र से सांसद और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी के समक्ष कई बार डेयरी को कृषि क्षेत्र में शामिल करने की मांग रखी गई है। महाराष्ट्र सरकार ने यह पहल पहले ही कर दी है। बावजूद इसके, राजस्थान में अब तक इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। किसानों और डेयरी विशेषज्ञों का मानना है कि डेयरी व्यवसाय को कृषि का हिस्सा बनाने से यह क्षेत्र नई गति पकड़ेगा और इसमें लगे युवाओं को भी सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलेगा।
सांडों की समस्या और नस्ल सुधार
चौधरी ने बताया कि प्रदेश में लावारिस सांडों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे एक ओर अनुपयोगी नस्लें पैदा हो रही हैं और दूसरी ओर दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। इसके समाधान के लिए सरकार को सेक्स सॉर्टेड सीमेन की मुफ्त आपूर्ति और बंध्याकरण अभियान चलाने की आवश्यकता है। इससे न केवल उपयोगी नस्ल का विकास होगा, बल्कि दूध उत्पादन भी बढ़ेगा।
अमित शाह के कार्यक्रम पर निराशा
17 जुलाई 2025 को जयपुर में आयोजित “सहकार एवं रोजगार उत्सव” में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति से किसानों को कई उम्मीदें थीं। लेकिन कार्यक्रम में दुग्ध उत्पादकों, पशुपालकों या सहकारिता से जुड़े किसी भी वर्ग के लिए कोई घोषणा नहीं की गई, जिससे किसानों में भारी निराशा है।