देशब्लॉग्सराजस्थान

Personal Loan लेते समय सिर्फ ब्याज दर न देखें, इन 7 बातों पर जरूर दें ध्यान

Personal Loan लेते समय सिर्फ ब्याज दर न देखें, इन 7 बातों पर जरूर दें ध्यान

मनीषा शर्मा। Personal Loan आज की तेज़ रफ़्तार जिंदगी में पैसों की जरूरत पूरी करने का सबसे आसान विकल्प बन चुका है। मेडिकल इमरजेंसी हो, शादी-ब्याह का खर्च हो, बिजनेस स्टार्ट करना हो या कोई अन्य ज़रूरत, लोग तुरंत ऑनलाइन आवेदन करके पैसा ले लेते हैं। लेकिन इस आसान प्रक्रिया के पीछे एक ऐसी वित्तीय गलती छुपी होती है, जो कई बार लोगों को वर्षों तक आर्थिक बोझ तले दबा देती है। यह गलती है—पर्सनल लोन लेते समय सिर्फ ब्याज दर को देखना, बाकी लागत को नजरअंदाज कर देना।

अक्सर देखा गया है कि लोग EMI कम देखकर खुश हो जाते हैं, लेकिन EMI के पीछे छुपी होती है असली लागत यानी Cost of Borrowing। यदि इस पूरे कॉस्ट को ठीक तरह से नहीं समझा जाए, तो मामूली ब्याज अंतर भी हजारों रुपये का नुकसान करवा सकता है। पर्सनल लोन एक अनसिक्योर्ड लोन होता है, यानी इसमें बैंक को कोई सिक्योरिटी नहीं दी जाती। इसी वजह से बैंक और NBFCs इस पर अन्य लोन की तुलना में ज्यादा ब्याज दरें वसूलते हैं। लोन पर ब्याज दर एक बार फिक्स होने के बाद पूरी अवधि में वही रहती है। ऐसे में 1 या 2 प्रतिशत का फर्क भी कुल लोन लागत में बड़ा बदलाव ला सकता है।

ब्याज दर के छोटे अंतर का बड़ा असर

उदाहरण के तौर पर यदि आप 5 लाख रुपये का पर्सनल लोन तीन साल के लिए लेते हैं, तो ब्याज दर में छोटा सा फर्क कुल भुगतान को काफी बदल देता है। नीचे दिए गए आंकड़ों में साफ दिखाई देता है कि ब्याज दर 11 प्रतिशत से 13 प्रतिशत होने पर भारी अंतर आ जाता है।

  • 11% ब्याज पर कुल ब्याज: 89,296 रुपये

  • 13% ब्याज पर कुल ब्याज: 1,06,491 रुपये

सिर्फ 2 प्रतिशत के अंतर से आपकी जेब लगभग 17,195 रुपये ज्यादा खाली हो जाते हैं। यह अंतर लोन राशि बढ़ने पर और भी ज्यादा हो सकता है। यदि लोन 10 लाख या 15 लाख का हो, तो नुकसान दोगुना या तिगुना हो सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले ब्याज दर के हर छोटे अंतर को बारीकी से समझना जरूरी है।

सिर्फ ब्याज नहीं, प्रोसेसिंग फीस भी बड़ा जाल

कई लेंडर कम ब्याज दर दिखाकर ग्राहकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन बाद में प्रोसेसिंग फीस के नाम पर बड़ी रकम वसूल करते हैं। कई बैंक और NBFCs 2 से 4 प्रतिशत तक प्रोसेसिंग फीस चार्ज कर लेते हैं, जिससे कम ब्याज दर का पूरा फायदा खत्म हो सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि आपने 5 लाख का लोन लिया और प्रोसेसिंग फीस 3 प्रतिशत है, तो 15,000 रुपये शुरुआत में ही काट लिए जाएंगे। यह पूरी लोन लागत को बढ़ा देता है।

हिडन चार्जेस से बड़ा खतरा

लोन लेते समय कई लोग सिर्फ ऑफर रेट देखकर साइन कर देते हैं, जबकि हकीकत यह होती है कि लोन एग्रीमेंट में कई ऐसे चार्जेस शामिल होते हैं जो बाद में पता चलते हैं। इनमें शामिल हैं—

  • डाक्युमेंटेशन फीस

  • प्री पेमेंट पेनाल्टी

  • लेट पेमेंट चार्ज

  • स्टेटमेंट फीस

  • लोन री-शेड्यूलिंग चार्ज

ये सभी चार्ज मिलकर आपका लोन काफी महंगा बना देते हैं। इसलिए किसी भी लोन पर साइन करने से पहले इन सभी फीस और चार्जेस को ध्यान से पढ़ना जरूरी है।

लेंडर की रेपुटेशन और कस्टमर सर्विस भी बेहद जरूरी

कम ब्याज दर दिखाकर कई लेंडर ग्राहकों को आकर्षित करते हैं, लेकिन उनकी कस्टमर सर्विस बहुत खराब होती है। कई बार EMI अपडेट, खाता स्टेटमेंट, प्री-क्लोजर, KYC अपडेट या किसी शिकायत को सुलझाने में काफी समय लगता है। इससे पूरा लोन अनुभव खराब हो जाता है। इसलिए हमेशा ऐसे बैंक या NBFC को चुनें जिसका रिकॉर्ड साफ हो और जिसकी ग्राहक सेवा मजबूत हो।

EMI कैलकुलेशन कैसे समझें?

बहुत से लोग EMI कम देखकर लोन ले लेते हैं, जबकि EMI कम दिखाना बैंक का आम तरीका होता है। कम EMI का मतलब ज्यादा अवधि, और ज्यादा अवधि का मतलब ज्यादा ब्याज। इसलिए EMI के साथ-साथ कुल ब्याज और लोन अवधि, दोनों को देखना बेहद जरूरी है। EMI कैलकुलेटर से यह जानना आसान है कि कुल ब्याज कितना बन रहा है और कौन सा लोन आपके लिए बेहतर रहेगा।

Loan लेते समय इन 7 बातों पर जरूर ध्यान दें

  1. ब्याज दर

  2. प्रोसेसिंग फीस

  3. हिडन चार्जेस

  4. लेंडर की रेपुटेशन

  5. कस्टमर सपोर्ट

  6. प्री-पेमेंट रूल्स

  7. EMI कैसे तय होगी

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading