ऑटोमोबाइल

युद्ध चार दिन चले या चार साल, भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा: जनरल उपेंद्र द्विवेदी

युद्ध चार दिन चले या चार साल, भारत को आत्मनिर्भर बनना होगा: जनरल उपेंद्र द्विवेदी

चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने देश की सुरक्षा और भविष्य की जंग को लेकर बड़ा और दूरगामी बयान दिया है। उन्होंने कहा कि कोई भी यह तय नहीं कर सकता कि युद्ध चार दिन चलेगा या चार साल। ऐसे में भारत को लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना होगा। जयपुर में 78वीं आर्मी डे परेड के समापन के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सेना के हथियार, उपकरण और उनकी मरम्मत की क्षमता देश के भीतर नहीं होगी, तब तक किसी भी दीर्घकालिक युद्ध में मजबूती से मुकाबला करना संभव नहीं है। जनरल द्विवेदी ने कहा कि युद्ध की वास्तविक अवधि का अंदाजा सिर्फ युद्ध क्षेत्र में ही लगता है, इसलिए तैयारियां हमेशा सबसे खराब स्थिति को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए।

देश में बने हथियार और यहीं हो उनकी मरम्मत

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि सेना का साजो-सामान, हथियार और अन्य इक्विपमेंट देश में ही बनने चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ हथियार बनाना नहीं है, बल्कि उनकी रिपेयरिंग, मेंटेनेंस और अपग्रेड की क्षमता भी भारत के पास होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अगर किसी युद्ध के दौरान किसी उपकरण की सप्लाई बाधित हो जाती है और उसकी मरम्मत विदेश पर निर्भर है, तो यह सेना की क्षमता को कमजोर कर सकता है। इसलिए भारत को ऐसी स्थिति से बचने के लिए सभी जरूरी क्षमताएं अपने देश में विकसित करनी होंगी।

इक्विपमेंट की कमी के लिए कई विकल्प जरूरी

जनरल द्विवेदी ने कहा कि अगर किसी समय किसी खास इक्विपमेंट की कमी होती है, तो उसे पूरा करने के लिए कई विकल्प होने चाहिए। इनमें विदेश से खरीद, विदेशी टेक्नोलॉजी को भारत लाकर यहां उत्पादन करना और विदेशी कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग के लिए आमंत्रित करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन अलग-अलग चैनलों के जरिए भारत अपनी आत्मनिर्भरता को मजबूत कर सकता है और किसी एक स्रोत पर निर्भरता को कम कर सकता है।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी कड़ी

जनरल द्विवेदी ने आत्मनिर्भरता की सबसे बड़ी कड़ी रिसर्च एंड डेवलपमेंट को बताया। उन्होंने कहा कि जब तक भारत अनुसंधान पर गंभीरता से काम नहीं करेगा और केवल बाहर से टेक्नोलॉजी लाकर उसका निर्माण करता रहेगा, तब तक पूरी आत्मनिर्भरता संभव नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबी लड़ाई लड़ने की क्षमता तभी विकसित होगी, जब देश खुद नई तकनीकों को विकसित करने में सक्षम होगा। इसी सोच के तहत भारतीय सेना डीआरडीओ, शैक्षणिक संस्थानों, इंडस्ट्री और पॉलिसी मेकर्स के साथ मिलकर काम कर रही है।

iDEX और ‘अदिति’ स्कीम से मिल रहा R&D को बढ़ावा

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि आईडीईएक्स यानी iDEX और ‘अदिति’ स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए रिसर्च एंड डेवलपमेंट को प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब कोई नया इक्विपमेंट सेना की जरूरतों पर खरा उतरता है, तो उसके ऑर्डर चार से छह गुना तक बढ़ाए जा सकते हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि नई डिफेंस प्रोक्योरमेंट प्रोसीजर में इस संख्या को और बढ़ाने की तैयारी है, जिससे स्वदेशी इनोवेशन को मजबूत समर्थन मिल सके।

जयपुर में 78वीं आर्मी डे परेड, नागरिकों से जुड़ाव का संदेश

जयपुर में 78वीं आर्मी डे परेड के आयोजन को लेकर जनरल द्विवेदी ने कहा कि ऐतिहासिक और सुंदर शहर जयपुर में सेना दिवस मनाना गर्व की बात है। उन्होंने जयपुर के नागरिकों, राजस्थान सरकार, सैनिकों, सिविलियन कर्मचारियों, वेटरन्स, वीर नारियों और उनके परिवारों को आर्मी डे की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि सेना और आम जनता के बीच गहरा संबंध है। ‘नो योर आर्मी’ एग्जिबिशन जैसे कार्यक्रमों ने इस जुड़ाव को और मजबूत किया है।

भैरव बटालियन से बढ़ेगी सेना की लड़ाकू क्षमता

जनरल द्विवेदी ने भैरव बटालियन जैसी नई यूनिट्स को भविष्य की लड़ाइयों के लिए बेहद अहम बताया। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी सैनिक की जगह नहीं लेती, बल्कि उसकी क्षमता और एफिशिएंसी को बढ़ाती है। उन्होंने बताया कि आज की जंग में छोटी और ज्यादा फुर्तीली टुकड़ियां बड़ी यूनिट्स से ज्यादा प्रभावी साबित हो रही हैं। भैरव बटालियन को इसी सोच के तहत तैयार किया गया है, जो सामान्य इन्फेंट्री और स्पेशल फोर्स के बीच के अंतर को भरती है।

नई जंग के लिए नई रणनीति जरूरी

जनरल द्विवेदी ने कहा कि आधुनिक ड्रोन 400 मीटर से लेकर 800 किलोमीटर तक ऑपरेट करने की क्षमता रखते हैं और पूरे युद्ध क्षेत्र में सूचना, निगरानी और स्ट्राइक का काम कर सकते हैं। इसके लिए सेना को नए ऑर्गेनाइजेशन, सुपर स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग और अत्याधुनिक सिस्टम की जरूरत है। उन्होंने बताया कि बदलाव केवल इन्फेंट्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आर्म्ड, मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री और सिग्नल्स जैसी यूनिट्स में भी बदलाव किए जाएंगे।

भविष्य की जंग के लिए बदली सेना की सोच

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना अब सिर्फ मौजूदा चुनौतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की जंग के लिए खुद को तैयार कर रही है। भैरव बटालियन, अग्नि प्लाटून्स, शक्ति बाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी नई इकाइयां इसी बदली हुई सोच का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना एक फ्यूचर रेडी फोर्स के रूप में आगे बढ़ रही है, जहां टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल सैनिक को हटाने के लिए नहीं, बल्कि उसे और सक्षम बनाने के लिए किया जा रहा है।

ऑपरेशन सिंदूर पर पाकिस्तान के प्रोपगेंडा का जवाब

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान के दुष्प्रचार पर जवाब देते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि भारतीय सेना सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ पर काम करती है। एडीजी प्लेटफॉर्म से जारी की गई जानकारी तथ्यात्मक और विश्वसनीय होती है। उन्होंने कहा कि आज के इन्फॉर्मेशन वॉर में सादगी और विश्वसनीयता सबसे बड़ी ताकत है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading