शोभना शर्मा। राजस्थान का प्रमुख जलस्रोत बीसलपुर बांध एक बार फिर अपने उच्चतम जलस्तर की ओर बढ़ रहा है। बांध क्षेत्र में पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश के चलते पानी की आवक में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसी के चलते मंगलवार को बांध के दो गेट खोलकर पानी निकासी की मात्रा बढ़ाई गई। बांध के गेट नंबर 10 को एक मीटर और गेट नंबर 11 को दो मीटर तक खोला गया है। इन गेटों से बनास नदी में प्रति सेकंड 18,030 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बीसलपुर परियोजना के कंट्रोल रूम से प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते 24 घंटे में बांध क्षेत्र में 69 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। यह बारिश बांध के जलस्तर को तेजी से बढ़ाने में सहायक रही।
लगातार बारिश से बांध में बढ़ा जलस्तर
बांध क्षेत्र में जारी वर्षा के कारण बीसलपुर में पानी का स्तर पिछले कई दिनों की तुलना में अधिक बढ़ा है। बनास नदी और उसकी सहायक नदियों से लगातार पानी की आवक हो रही है। इस जलप्रवाह ने न केवल बांध के स्तर को बढ़ाया है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में नमी और हरियाली भी बढ़ा दी है। बांध परियोजना के इंजीनियरों के अनुसार, वर्तमान जलस्तर को सुरक्षित रखने और संरचना पर अतिरिक्त दबाव से बचाने के लिए समय-समय पर गेट खोलकर नियंत्रित निकासी की जा रही है।
31 साल बाद टूटा बारिश का रिकॉर्ड
इस वर्ष मानसून की शुरुआत से अब तक बीसलपुर क्षेत्र में कुल 1424 मिलीमीटर बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह आंकड़ा पिछले तीन दशकों का रिकॉर्ड तोड़ चुका है। उल्लेखनीय है कि 1994 में 1435 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी, जब बीसलपुर बांध का निर्माण कार्य अंतिम चरण में था। उस समय बांध पूरी तरह से तैयार नहीं हुआ था और उसका निर्माण कार्य 1996 में पूरा हुआ। 31 वर्षों के बाद इस स्तर की वर्षा दर्ज होना न केवल क्षेत्र के लिए उल्लेखनीय है, बल्कि यह राज्य के जलसंसाधनों के लिए भी एक शुभ संकेत माना जा रहा है। इससे टोंक, अजमेर, जयपुर और नागौर जैसे जिलों में पेयजल आपूर्ति को लेकर राहत की उम्मीद बनी है।
बनास नदी में अब तक 135.971 टीएमसी पानी छोड़ा गया
बांध प्रशासन के अनुसार, इस मानसून सत्र में अब तक 135.971 टीएमसी (थाउज़ंड मिलियन क्यूबिक फीट) पानी बनास नदी में छोड़ा जा चुका है। यह पिछले वर्षों की तुलना में अधिक मात्रा है। पानी की इस लगातार निकासी से बनास नदी के तटवर्ती गांवों में हल्की चिंता भी देखी जा रही है। ग्रामीणों ने बताया कि अब तक अक्टूबर के बाद बनास नदी में जलस्तर घटने लगता था, लेकिन इस बार नवंबर में भी नदी में नाव चलती नजर आ रही है। कई स्थानों पर ग्रामीण नावों के सहारे नदी पार कर रहे हैं, जो इस वर्ष की भारी बारिश का सीधा परिणाम है।
त्रिवेणी नदी में भी बढ़ा जलस्तर
बांध के जलभराव में सहायक त्रिवेणी नदी का गेज मंगलवार को 2.90 मीटर दर्ज किया गया। इससे संकेत मिलता है कि ऊपरी इलाकों से भी लगातार पानी की आवक जारी है। यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रह सकती है यदि बारिश का दौर जारी रहता है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। गेट खोलने और बंद करने का निर्णय पूरी तरह से जलस्तर, वर्षा की तीव्रता और नीचे के क्षेत्रों में पानी के प्रवाह पर निर्भर करता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में चिंता और राहत दोनों
बनास नदी से सटे गांवों के लोगों में मिश्रित भावनाएं देखी जा रही हैं। एक ओर वे जलसमृद्धि से खुश हैं, क्योंकि इससे भूजल स्तर बढ़ेगा और फसलों को सिंचाई में राहत मिलेगी। वहीं दूसरी ओर अधिक जल प्रवाह के कारण खेतों और आवासीय क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति को लेकर कुछ चिंताएं भी बनी हुई हैं। कई ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहली बार नवंबर में इस तरह नदी में नावों को चलते देखा है। आमतौर पर यह दृश्य जुलाई-अगस्त में देखने को मिलता है, लेकिन इस वर्ष बारिश के असामान्य पैटर्न ने परिदृश्य को बदल दिया है।
बीसलपुर बांध का महत्व
बीसलपुर बांध राजस्थान के प्रमुख जलाशयों में से एक है। यह बनास नदी पर टोंक जिले के निकट स्थित है और राज्य की पेयजल आपूर्ति में इसका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। जयपुर, अजमेर, टोंक और नागौर जैसे प्रमुख शहरों की जलापूर्ति इसी बांध से की जाती है। बांध की कुल जल भरण क्षमता लगभग 309 टीएमसी फीट है। बीसलपुर न केवल पेयजल का प्रमुख स्रोत है बल्कि यह सिंचाई, मत्स्य पालन और स्थानीय पर्यटन के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है।


