शोभना शर्मा। देश की राजधानी दिल्ली में जल संचयन को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा दिए गए राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार अब विवादों के घेरे में आ गए हैं। यह विवाद इसलिए भी ज्यादा सुर्खियों में है क्योंकि इससे राजस्थान की चर्चित आईएएस बहनें टीना डाबी और रिया डाबी जुड़ गई हैं। जल संरक्षण और जन भागीदारी के लिए दिए गए इन पुरस्कारों को लेकर बाड़मेर और उदयपुर जिलों पर गलत आंकड़े और फोटो अपलोड कर पुरस्कार हासिल करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
इस पूरे विवाद की शुरुआत बाड़मेर जिले को मिले पहले पुरस्कार से हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जल संचयन अभियान में उत्कृष्ट कार्य के लिए बाड़मेर जिले को प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया था। इस पुरस्कार के तहत जिले को दो करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी गई। उस समय बाड़मेर की कलेक्टर आईएएस टीना डाबी थीं और उन्होंने राष्ट्रपति से यह सम्मान प्राप्त किया। लेकिन पुरस्कार मिलने के कुछ ही दिनों बाद इस पर सवाल उठने लगे।
आरोप लगाए गए कि जल संचयन के आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और पोर्टल पर डुप्लीकेट या पुराने फोटो अपलोड कर जिले की उपलब्धियों को ज्यादा दिखाया गया। सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल समेत कई जनप्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाया और कहा कि गलत आंकड़ों के आधार पर बाड़मेर को यह पुरस्कार दिलाया गया है। मामला तूल पकड़ने पर खुद कलेक्टर टीना डाबी को सामने आकर अपनी सफाई देनी पड़ी।
टीना डाबी ने स्पष्ट शब्दों में आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें बेवजह टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल संचयन अभियान के तहत जो भी फोटो और आंकड़े पोर्टल पर अपलोड किए गए, वे ब्लॉक और जिला स्तर पर सत्यापित प्रक्रिया के बाद ही डाले गए थे। टीना डाबी के अनुसार, हर स्तर पर अधिकारियों की जांच और सत्यापन के बाद ही डेटा आगे भेजा गया, ऐसे में गलत आंकड़ों का आरोप निराधार है।
इसी बीच अब विवाद की आंच टीना डाबी की छोटी बहन आईएएस रिया डाबी तक भी पहुंच गई है। रिया डाबी वर्तमान में उदयपुर जिले में मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उदयपुर जिले को जल संचयन के लिए दूसरा पुरस्कार मिला था, जिसके तहत एक करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि दी गई। लेकिन इस पुरस्कार को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
उदयपुर से जुड़े मामले में आरोप है कि जल संचयन अभियान के पोर्टल पर पुरस्कार की प्रक्रिया के दौरान एक शादी का कार्ड अपलोड कर दिया गया। यह मामला सामने आते ही प्रशासन में हलचल मच गई और सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। आरोपों के बाद उदयपुर कलेक्टर को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी।
उदयपुर कलेक्टर ने कहा कि पोर्टल पर शादी का कार्ड गलती से अपलोड हो गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्राम पंचायत स्तर पर कार्यरत एक कनिष्ठ अभियंता द्वारा यह मानवीय त्रुटि हुई, जिसका जल संचयन अभियान या जन भागीदारी से जुड़े पुरस्कार से कोई संबंध नहीं है। कलेक्टर ने यह भी कहा कि जैसे ही गलती सामने आई, संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई और उसे निलंबित कर दिया गया है।
कलेक्टर ने यह भी दोहराया कि उदयपुर को मिला पुरस्कार वास्तविक कार्यों और उपलब्धियों के आधार पर है, न कि किसी गलत फोटो या दस्तावेज के कारण। प्रशासन का दावा है कि जल संचयन के तहत किए गए कार्यों का भौतिक सत्यापन हुआ है और उसी आधार पर जिले को यह सम्मान मिला।
गौरतलब है कि हाल ही में राष्ट्रपति द्वारा दिए गए जल संचयन पुरस्कारों में राजस्थान के दो जिलों को शीर्ष स्थान मिला था। बाड़मेर को पहला और उदयपुर को दूसरा पुरस्कार मिला, जिससे राज्य सरकार और प्रशासन ने इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया था। लेकिन अब इन दोनों पुरस्कारों पर उठ रहे सवालों ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।


