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बाड़मेर जिला कांग्रेस में दो धड़ों की जंग, जिलाध्यक्ष पद की रेस से बढ़ी राजनीतिक हलचल

बाड़मेर जिला कांग्रेस में दो धड़ों की जंग, जिलाध्यक्ष पद की रेस से बढ़ी राजनीतिक हलचल

शोभना शर्मा।  कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के तहत उत्तर प्रदेश कांग्रेस के सह प्रभारी राजेश तिवारी शनिवार को बाड़मेर और बालोतरा के दौरे पर रहे। तिवारी ने यहां बाड़मेर जिला कांग्रेस कमेटी और ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर नए जिलाध्यक्ष पद के लिए रायशुमारी की।हालांकि, इस दौरान स्थानीय कांग्रेस के भीतर गहरा ध्रुवीकरण और गुटबाजी देखने को मिली। पार्टी दो स्पष्ट धड़ों में बंटी नजर आई। एक गुट ने वीरेंद्र धाम में पर्यवेक्षक तिवारी से मुलाकात की, जबकि दूसरा गुट पूर्व विधायक मेवाराम जैन के आवास पर जुटा और बाद में सर्किट हाउस पहुंचकर तिवारी से मुलाकात की। दोनों ही पक्षों ने अपने-अपने समर्थक उम्मीदवारों के नाम आगे बढ़ाने की कोशिश की।

राजेश तिवारी ने की वन-टू-वन बातचीत, बोले— कार्यकर्ताओं की राय को मिलेगी प्राथमिकता

राजेश तिवारी ने जिलेभर से आए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ व्यक्तिगत बातचीत कर संगठन की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व चाहता है कि कार्यकर्ताओं की रायशुमारी के आधार पर ही पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाए। उन्होंने कहा कि “संगठन सृजन अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पार्टी में हर कार्यकर्ता की आवाज सुनी जाए और निर्णय पारदर्शी तरीके से हों।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बाड़मेर में कुछ नेताओं के बीच आपसी मतभेद हैं, जिनकी विस्तृत रिपोर्ट दिल्ली भेजी जाएगी, ताकि शीर्ष नेतृत्व स्थिति का सही मूल्यांकन कर सके।

लगातार नौ दिन से सक्रिय हैं राजेश तिवारी

सूत्रों के अनुसार, राजेश तिवारी पिछले नौ दिनों से बाड़मेर और बालोतरा में हैं। इस अवधि में वे अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जाकर कांग्रेस के नए जिला अध्यक्ष के चयन हेतु रायशुमारी कर रहे हैं। रविवार को बाड़मेर जिला मुख्यालय पर जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण और शहर इकाई की संयुक्त बैठक भी आयोजित की गई थी, जिसमें कांग्रेस की आंतरिक खींचतान खुलकर सामने आई।

चौधरी गुट और मेवाराम जैन गुट आमने-सामने

पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी और हरीश चौधरी के समर्थक कार्यकर्ताओं ने वीरेंद्र धाम में बड़ी बैठक की। बैठक में ब्लॉक अध्यक्षों, पदाधिकारियों और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की भारी उपस्थिति रही। इस गुट ने संगठन में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने और जिलाध्यक्ष पद पर अपने पसंदीदा नामों की अनुशंसा करने की रणनीति अपनाई। दूसरी ओर, हाल ही में पार्टी में वापसी करने वाले पूर्व विधायक मेवाराम जैन का गुट भी सक्रिय रहा। मेवाराम जैन के आवास पर आयोजित बैठक में कई विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ता शामिल हुए। इसके बाद जैन अपने समर्थकों के साथ सर्किट हाउस पहुंचे और राजेश तिवारी से मुलाकात की। जैन गुट ने तिवारी से कहा कि संगठन में युवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और नए नेतृत्व को अवसर मिलना चाहिए।

दिल्ली जाएगी रिपोर्ट, उसी पर निर्भर होगा नया जिलाध्यक्ष

कांग्रेस के पर्यवेक्षक राजेश तिवारी अब जिलेभर की बैठकों और मुलाकातों के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली भेजेंगे। यह रिपोर्ट प्रदेश और केंद्रीय नेतृत्व को सौंपी जाएगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बाड़मेर जिला कांग्रेस का नया जिलाध्यक्ष तय किया जाएगा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक और पारदर्शी है। हर कार्यकर्ता को अपनी राय रखने की आज़ादी दी जा रही है।

संगठन सृजन अभियान का उद्देश्य

कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान आंतरिक संरचना को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पार्टी का मकसद है कि जमीनी स्तर पर संगठन को सशक्त बनाया जाए ताकि आम जनता के बीच कांग्रेस की पकड़ दोबारा मजबूत हो सके। राजेश तिवारी ने बैठक के दौरान कहा— “कांग्रेस सिर्फ चुनावी पार्टी नहीं, बल्कि विचारधारा का प्रतीक है। हमारा लक्ष्य है कि हर बूथ, हर गांव में संगठन सक्रिय रहे और जनता की समस्याओं के समाधान में अग्रणी भूमिका निभाए।”

जिलाध्यक्ष पद की रेस बनी राजनीतिक चर्चा का केंद्र

बाड़मेर जिला कांग्रेस में जिलाध्यक्ष पद की रेस अब जिले की राजनीति का सबसे बड़ा विषय बन चुकी है। एक ओर हेमाराम और हरीश चौधरी गुट संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी ओर मेवाराम जैन की सक्रियता ने समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर नया जिलाध्यक्ष चयन संतुलित ढंग से नहीं किया गया, तो यह गुटबाजी आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।

बाड़मेर जिला कांग्रेस में इन दिनों माहौल बेहद गतिशील और प्रतिस्पर्धी है। संगठन सृजन अभियान ने पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया है, लेकिन साथ ही गुटबाजी भी सतह पर आ गई है। राजेश तिवारी की रिपोर्ट अब यह तय करेगी कि बाड़मेर कांग्रेस को नया दिशा देने वाला जिलाध्यक्ष कौन होगा —
पुराने नेताओं में से कोई अनुभवी चेहरा या कोई युवा चेहरा जो संगठन को नई ऊर्जा दे सके। कुल मिलाकर, बाड़मेर की कांग्रेस इस वक्त संगठनात्मक पुनर्गठन और नेतृत्व परिवर्तन के निर्णायक मोड़ पर खड़ी है, जिसके असर आने वाले चुनावों तक दिख सकते हैं।

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