मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप योजना को विदेश में पढ़ाई के इच्छुक छात्रों के लिए एक वरदान के रूप में देखा गया था। लेकिन, हाल के दिनों में यह योजना छात्रों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। योजना के तहत विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की फंडिंग में देरी हो रही है, जिसके चलते उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, 2024-25 सत्र के लिए चयन सूची जारी न होने के कारण नए आवेदकों का भविष्य अधर में लटक गया है।
फंडिंग रोकने से छात्रों को झेलनी पड़ रही मुश्किलें
इस योजना के तहत चुने गए छात्रों की फीस और रहने का खर्चा सरकार द्वारा वहन किया जाता है। लेकिन, पिछले कुछ महीनों से विदेश में पढ़ रहे कई छात्रों को उनके लिविंग एक्सपेंस (रहने का खर्च) नहीं मिल रहे हैं। अमेरिका में पढ़ाई कर रही स्मृति (बदला हुआ नाम) ने बताया कि मार्च 2024 के बाद से उन्हें कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। छात्रों का कहना है कि सरकार द्वारा ऐसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिन्हें जुटाना बेहद मुश्किल है।
विदेश में पढ़ाई कर रहे कई छात्रों को लोन लेकर अपना खर्च चलाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि डॉक्युमेंट्स तैयार करने और उन्हें समय पर उपलब्ध कराने में काफी परेशानी होती है। छात्रों को यह समझ नहीं आ रहा है कि वे पढ़ाई पर ध्यान दें या इन कागजी कार्यवाहियों में अपना समय और ऊर्जा लगाएं।
चयन सूची में देरी और छात्रों का भविष्य
इस योजना में 2024-25 सत्र के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को अब तक चयन सूची का इंतजार है। कई छात्रों ने जुलाई 2024 में आवेदन किया था, लेकिन अब तक सूची जारी न होने से उनका एक साल खराब हो चुका है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से देरी के चलते छात्रों के विदेशी विश्वविद्यालयों के ऑफर लेटर एक्सपायर हो रहे हैं, जिससे उनकी उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।
कनिका (बदला हुआ नाम), जिन्होंने पिछले साल इस योजना के तहत आवेदन किया था, ने बताया कि उनकी पढ़ाई इस देरी के कारण शुरू नहीं हो पाई। वीजा और अन्य कागजात पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद वे अपनी पढ़ाई को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रही हैं।
तकनीकी खामियों से बढ़ी परेशानी
छात्रों ने यह भी शिकायत की है कि योजना के पोर्टल में तकनीकी समस्याएं हैं, जिससे आवेदन की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है। कुछ छात्रों ने कहा कि पोर्टल पर बार-बार नए दस्तावेज मांगे जाते हैं। कई बार छात्रों को ऐसे दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं, जिनका जिक्र आवेदन के दौरान नहीं किया गया था।
कोमल (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उनसे आईटीआर और आय प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जमा करवाए गए, जिनका आवेदन प्रक्रिया में उल्लेख नहीं था। इसके अलावा, छात्रों से उनकी पढ़ाई का आकलन (असेसमेंट) भी मांगा जा रहा है, जिससे उनकी कठिनाइयां और बढ़ गई हैं।
राजनीतिक बदलाव और योजना का संशोधन
राजस्थान में यह योजना कांग्रेस सरकार द्वारा राजीव गांधी स्कॉलरशिप के नाम से शुरू की गई थी। उस समय 500 छात्रों को दुनिया के बेहतरीन विश्वविद्यालयों में पढ़ाई का मौका देने की घोषणा की गई थी। लेकिन बीजेपी सरकार के आने के बाद इसका नाम बदलकर स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप कर दिया गया और छात्रों की संख्या भी घटाकर 300 कर दी गई।
योजना में इन बदलावों के बाद नियमों को और कड़ा कर दिया गया है, जिससे छात्रों और उनके अभिभावकों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का आश्वासन और समाधान की उम्मीद
उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार इस योजना में आने वाली सभी समस्याओं को जल्द से जल्द सुलझाएगी। उन्होंने बताया कि 169 छात्रों का चयन किया जा चुका है और बाकी चयन सूची जल्द जारी की जाएगी।
हालांकि, छात्रों और उनके अभिभावकों का कहना है कि अगर सरकार ने समय पर यह सूची जारी की होती तो उनका साल खराब नहीं होता।
छात्रों का भविष्य दांव पर
विवेकानंद स्कॉलरशिप योजना में देरी के कारण छात्रों का भविष्य अधर में है। कई छात्रों को डर है कि अगर यह समस्या जल्द हल नहीं हुई, तो उनका एक और साल बर्बाद हो जाएगा। योजना के तहत छात्रों को दिए जाने वाले लिविंग एक्सपेंस की कमी से वे आर्थिक संकट में हैं और अपनी पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया है।


