शोभना शर्मा। राजस्थान के डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के बेटे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें जयपुर की सड़कों पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और पुलिस एस्कॉर्ट का दुरुपयोग देखा जा सकता है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर नाराजगी व्यक्त की जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर नेताओं के बच्चों को इस तरह की विशेष सुविधाएं क्यों दी जा रही हैं।
वायरल वीडियो में चार युवक एक खुली जीप में घूमते नजर आ रहे हैं, जिनमें से एक को डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा का बेटा बताया जा रहा है। जीप के पीछे पुलिस की एक गाड़ी एस्कॉर्ट करती हुई दिखाई दे रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए हैं और इस घटना की कड़ी निंदा की है।
ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन और पुलिस एस्कॉर्ट का दुरुपयोग
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जीप में बैठे युवक न सिर्फ ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि पुलिस एस्कॉर्ट का भी गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। घटना के बाद लोगों ने डिप्टी सीएम के बेटे के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वायरल वीडियो में एक अन्य युवक भी दिखाई दे रहा है, जिसे कांग्रेस नेता पुष्पेंद्र भारद्वाज का बेटा बताया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर नाराजगी और प्रशासन पर सवाल
यह वीडियो सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर लोग इस घटना पर जमकर गुस्सा निकाल रहे हैं। कई यूजर्स ने सवाल किया है कि पुलिस एस्कॉर्ट जैसी सुविधाओं का इस तरह दुरुपयोग क्यों हो रहा है और आम नागरिकों के लिए जो नियम लागू होते हैं, वही नियम नेताओं और उनके परिवारों पर क्यों नहीं लागू होते।
लोगों का कहना है कि यह घटना राजस्थान में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है। जब एक वरिष्ठ राजनेता के बेटे और उनके दोस्तों को इस तरह की छूट दी जा रही है, तो आम नागरिकों के लिए कानून का पालन कैसे सुनिश्चित किया जाएगा?
प्रदेश में सियासत गर्म
इस वीडियो के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल मच गई है। विपक्षी पार्टियों ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार और पुलिस प्रशासन की आलोचना की है। यह घटना राज्य सरकार के कामकाज और पुलिस की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े करती है।
हालांकि, वीडियो की सत्यता को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। नवभारत टाइम्स डिजिटल भी इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला अब प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
परिवहन विभाग की गाड़ी से एस्कॉर्ट
मिली जानकारी के अनुसार, जो पुलिस की गाड़ी इस घटना में एस्कॉर्ट कर रही थी, वह परिवहन विभाग के नाम से रजिस्टर्ड है। यह विभाग डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के अधीन आता है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है। लोगों की ओर से इस मामले की जांच की मांग की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इस तरह की सुविधाओं का दुरुपयोग कैसे किया जा रहा है।


