NSUI के नवनियुक्त राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ के पदभार ग्रहण समारोह को राष्ट्रव्यापी संविधान संकल्प सभा के रूप में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर से आए विद्यार्थियों, छात्र प्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं ने भाग लेकर संविधान की रक्षा तथा विद्यार्थियों के अधिकारों की सुरक्षा का संकल्प लिया। समारोह को छात्र राजनीति और संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रव्यापी स्वरूप में आयोजित हुआ समारोह
पदभार ग्रहण समारोह को केवल औपचारिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न राज्यों से आए छात्रों ने भागीदारी की और शिक्षा, रोजगार तथा छात्र अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर एकजुटता दिखाई। इस अवसर पर कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और छात्र संगठन के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इनमें सचिन पायलट, दीपेंद्र सिंह हुड्डा, देवेन्द्र यादव, जीतू पटवारी, भगत चरण दास, कुमारी शैलजा, कन्हैया कुमार, संजना जाटव, उमेदराम बेनीवाल और नीरज डांगी सहित अन्य प्रमुख चेहरे शामिल रहे। नेताओं ने अपने संबोधन में युवाओं की भूमिका को लोकतंत्र की मजबूती का आधार बताया।
कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार
सभा को संबोधित करते हुए विनोद जाखड़ ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से राहुल गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि एक साधारण और संघर्षशील परिवार से आने वाले कार्यकर्ता पर विश्वास जताया जाना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि उन सभी युवाओं और परिवारों का सम्मान है जो सीमित संसाधनों के बावजूद संघर्ष कर आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति का उद्देश्य केवल संगठन विस्तार नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना है। संविधान की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना एनएसयूआई की प्राथमिकता रहेगी।
विद्यार्थियों के अधिकारों पर जोर
विनोद जाखड़ ने अपने संबोधन में बेरोजगारी, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, शिक्षा के निजीकरण और छात्रसंघ चुनावों की बहाली जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि इन विषयों पर राष्ट्रव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उनके अनुसार, युवा पीढ़ी आज जिन चुनौतियों का सामना कर रही है, उनमें रोजगार की कमी और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता का अभाव प्रमुख हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को विचारधारात्मक थोपने का स्थान नहीं बनाया जाना चाहिए। छात्रों को स्वतंत्र विचार और संवाद का वातावरण मिलना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थी संविधान के साथ दृढ़ता से खड़े हैं और किसी भी विभाजनकारी या अलोकतांत्रिक मानसिकता का सशक्त विरोध किया जाएगा।
नेताओं का समर्थन और नया अध्याय
कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं ने इसे छात्र आंदोलन के एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उनका कहना था कि देश का युवा संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और समान अवसर के लिए एकजुट है। नेताओं ने कहा कि शिक्षा संस्थानों में लोकतांत्रिक परंपराओं को सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। सभा में यह संदेश दिया गया कि छात्र राजनीति केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों और राष्ट्रीय मुद्दों से भी जुड़ी है। युवाओं की भागीदारी लोकतंत्र को जीवंत बनाती है और उनके सवालों का समाधान नीतिगत स्तर पर किया जाना चाहिए।
संविधान की रक्षा का संकल्प
विनोद जाखड़ ने कहा कि संविधान की रक्षा परिसर दर परिसर और राज्य दर राज्य की जाएगी। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह संघर्ष विद्यार्थियों के अधिकारों तथा देश के लोकतांत्रिक भविष्य के लिए जारी रहेगा। एनएसयूआई संगठनात्मक रूप से मजबूत होकर हर राज्य में छात्र हितों की आवाज बुलंद करेगा। उन्होंने कहा कि छात्र संगठनों की जिम्मेदारी केवल विरोध तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सकारात्मक सुझाव और रचनात्मक पहल भी आवश्यक हैं। शिक्षा में समान अवसर, पारदर्शिता और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करना संगठन का दीर्घकालिक लक्ष्य रहेगा।
छात्र राजनीति की दिशा
यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब देश में शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। छात्र संगठनों की सक्रियता और उनके नेतृत्व की भूमिका पर भी नजर रखी जा रही है। विनोद जाखड़ के नेतृत्व में एनएसयूआई किस प्रकार अपने एजेंडे को आगे बढ़ाती है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।


