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ग्रामीणों ने डेयरी के दूध टैंकरों की आवाजाही रोकी: 7 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा

ग्रामीणों ने डेयरी के दूध टैंकरों की आवाजाही रोकी: 7 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा

मनीषा शर्मा। अजमेर जिले के दौराई गाँव में ग्रामीणों ने खराब सड़क और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए सरस डेयरी के दूध टैंकरों की आवाजाही रोक दी है। ग्रामीणों का कहना है कि सरस डेयरी के भारी वाहनों के कारण गाँव की मुख्य सड़क पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं की जा रही है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान, ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष 7 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा और 5 अक्टूबर तक समाधान की मांग की। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तो उन्होंने डेयरी के दूध टैंकरों को गाँव से न निकलने देने का अल्टीमेटम दिया है।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

ग्रामीणों ने बताया कि साल 2020 में अजमेर सरस डेयरी के भारी वाहन गाँव के मुख्य सड़क मार्ग से निकलने लगे थे, जिसके कारण सड़क और पुलिया बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। उस समय डेयरी प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि वे इस सड़क की मरम्मत करवाएंगे या फिर मरम्मत की राशि ग्राम पंचायत में जमा करवा देंगे। परंतु डेयरी प्रशासन ने न तो सड़क की मरम्मत की और न ही कोई क्षतिपूर्ति राशि ग्राम पंचायत को दी। इसके बजाय डेयरी ने अपने वाहनों के लिए रास्ता बदलकर खानपुरा तालाब के पीछे वाले मार्ग से गुजरना शुरू कर दिया।

कुछ दिन पहले खानपुरा में चल रहे अंडरब्रिज और ओवरब्रिज के निर्माण कार्य के चलते जब उस रास्ते से वाहनों की आवाजाही बंद हो गई, तो सरस डेयरी के वाहन फिर से दौराई गाँव के क्षतिग्रस्त मार्ग से गुजरने लगे। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने एकजुट होकर सरस डेयरी के दूध टैंकरों की आवाजाही रोक दी। इसके साथ ही उन्होंने गाँव में धरना-प्रदर्शन भी शुरू कर दिया।

7 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा

विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रशासनिक अधिकारियों से मिला और अपनी 7 सूत्रीय मांगें उनके सामने रखीं। इन मांगों में मुख्य रूप से सड़क और पुलिया की मरम्मत करवाने की माँग की गई है। साथ ही, ग्रामीणों ने डेयरी प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि वे अपने भारी वाहनों के लिए किसी वैकल्पिक मार्ग का स्थायी समाधान निकालें ताकि गाँव की सड़कों पर भार कम हो सके।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

विवाद बढ़ने के बाद मंगलवार को जिला प्रशासन के अधिकारियों ने ग्रामीणों से वार्ता की। इस बैठक की अध्यक्षता एडीएम सिटी गजेंद्र सिंह राठौड़ ने की। उनके साथ एसडीएम पदमा चौधरी, रामगंज थाना के सीआई रविंद्र सिंह खींचीं, अजमेर सरस डेयरी के एमडी मीणा, डेयरी के वॉइस चैयरमैन लादूराम चौधरी, ग्राम पंचायत दौराई से सरपंच प्रतिनिधि हंसराज चौधरी, रामलाल सोलकी, पूर्व सीआर गोपाल गैना, भाजपा सराधना मंडल के महामंत्री चेतन चौहान और अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा और 7 सूत्रीय मांग-पत्र सौंपा। डेयरी प्रशासन ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने के बाद 5 अक्टूबर तक का समय मांगा है ताकि इन मुद्दों का उचित समाधान निकाला जा सके।

ग्रामीणों की मुख्य मांगें

ग्रामीणों की 7 सूत्रीय मांगें इस प्रकार हैं:

  1. सड़क और पुलिया की मरम्मत: डेयरी के भारी वाहनों के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़क और पुलिया की जल्द से जल्द मरम्मत की जाए।
  2. वैकल्पिक मार्ग: डेयरी के वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए ताकि गाँव की सड़कों पर अतिरिक्त भार न पड़े।
  3. क्षतिपूर्ति राशि: यदि डेयरी सड़क की मरम्मत नहीं करवा सकती है, तो क्षतिपूर्ति राशि ग्राम पंचायत में जमा की जाए।
  4. स्थानीय रोजगार: डेयरी में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं।
  5. पेयजल सुविधा: गाँव में पेयजल की समस्या को दूर करने के लिए उचित व्यवस्था की जाए।
  6. स्वास्थ्य सेवाएं: गाँव में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाए, खासकर डेयरी के कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए।
  7. शैक्षिक सुविधाएं: गाँव में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए नई स्कूलों और शिक्षकों की नियुक्ति की जाए।

डेयरी प्रशासन की प्रतिक्रिया

अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी ने इस मामले पर बयान देते हुए कहा कि अजमेर डेयरी की सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। हाइवे से सीधे पाइपलाइन के जरिए मोटर लगाकर टैंकरों से दूध निकाला जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सड़क और अन्य मांगों को लेकर सिर्फ गाँव के सरपंच और कुछ स्थानीय लोग ही विरोध कर रहे हैं, जबकि अधिकांश ग्रामीण उनके साथ नहीं हैं। चौधरी ने यह आश्वासन भी दिया कि प्रशासन इस मामले का हल निकालेगा और जल्द ही किसी निष्कर्ष पर पहुँचेगा।

आगे की स्थिति

प्रशासन ने ग्रामीणों को 5 अक्टूबर तक का समय दिया है, जिसके बाद समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। यदि 5 अक्टूबर तक ग्रामीणों की मांगें पूरी नहीं की जातीं, तो उन्होंने दूध टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह से रोक देने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी मांगों को पूरा करने के लिए और भी कड़े कदम उठाने के लिए तैयार हैं।

इस विरोध प्रदर्शन ने सड़क मरम्मत और ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण समस्याओं को उजागर किया है। ग्रामीणों की उम्मीदें अब प्रशासन और डेयरी प्रबंधन पर टिकी हैं कि वे समय रहते इन मुद्दों का समाधान करेंगे।

इस बीच, प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर ध्यान दिया जाएगा और उचित कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याएँ फिर से उत्पन्न न हों।

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