मनीषा शर्मा। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर शुक्रवार को जोधपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत में अपने एक वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों और आयोग की भविष्य की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पिछले एक वर्ष में आयोग ने महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम किया है और सम्मान, सुरक्षा तथा सशक्तिकरण—इन तीन मूल स्तंभों पर केंद्रित रहते हुए कई ठोस कदम उठाए हैं। रहाटकर ने स्पष्ट किया कि महिलाओं की समस्याओं को जड़ से समझते हुए उनके समाधान के लिए आयोग लगातार सक्रिय है और कई महत्वपूर्ण मामलों में सकारात्मक परिणाम भी प्राप्त हुए हैं।
लाखों शिकायतों में से कई मामलों का त्वरित निपटारा
अपने बयान में विजया रहाटकर ने बताया कि राष्ट्रीय महिला आयोग को प्रतिवर्ष देशभर से लाखों शिकायतें प्राप्त होती हैं। घरेलू हिंसा, दहेज उत्पीड़न, कार्यस्थल पर शोषण, सोशल मीडिया ट्रोलिंग, मानव तस्करी, यौन उत्पीड़न सहित विभिन्न प्रकार के मामलों में महिलाएं आयोग से न्याय की उम्मीद रखती हैं। उन्होंने कहा कि कई महिलाएं परिस्थितियों के कारण दिल्ली स्थित आयोग कार्यालय तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में आयोग ने उनकी समस्याओं को उनके ही प्रदेश में जाकर सुनने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
“राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार” अभियान ने बदली तस्वीर
रहाटकर के अनुसार, महिलाओं तक सीधे पहुंचने और उनकी परेशानियों को मौके पर सुनने के लिए “राष्ट्रीय महिला आयोग आपके द्वार” नामक विशेष अभियान शुरू किया गया है। इस अभियान को बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। केवल छह महीनों में ही इस कार्यक्रम के तहत देशभर में 75 से अधिक सुनवाइयां आयोजित की गईं। इन सुनवाइयों में आयोग की टीम ने सीधे पीड़ित महिलाओं से बातचीत की, उनके बयान सुने और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय कर त्वरित राहत दिलाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि आयोग की यह पहल ग्रामीण और दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाली उन महिलाओं के लिए बड़ी राहत है, जो पहले अपनी शिकायत दर्ज कराने से भी घबराती थीं।
पश्चिम बंगाल में महिलाओं पर अत्याचार को लेकर चिंता
पश्चिम बंगाल में लगातार सामने आ रहे महिला उत्पीड़न के मामलों पर विजया रहाटकर ने गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वहां महिलाओं के साथ हिंसा और अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है। रहाटकर ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग पश्चिम बंगाल की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और वहां प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा भी कर रहा है। आयोग द्वारा कई मामलों में स्थानीय प्रशासन को निर्देश जारी किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर मौके पर सुनवाई भी की जाएगी।
राजस्थान की महिलाओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण टिप्पणी
जब मीडिया ने सवाल किया कि क्या राजस्थान की महिलाएं अपनी समस्याओं को खुलकर नहीं रख पातीं, तो रहाटकर ने स्वीकार किया कि यह स्थिति काफी हद तक सही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की कई महिलाएं सामाजिक बंधनों, पारिवारिक दबाव और बदनामी के भय के कारण शिकायत दर्ज कराने से हिचकिचाती हैं। उन्होंने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि महिलाओं को अब अपनी आवाज दबाने की जरूरत नहीं है। राष्ट्रीय महिला आयोग उनके अधिकारों की रक्षा के लिए है। रहाटकर ने कहा— “मैं राजस्थान की सभी महिलाओं से कहना चाहती हूं कि डरें नहीं। राष्ट्रीय महिला आयोग आपके लिए बना है। हमारी टोल-फ्री हेल्पलाइन पर बेझिझक शिकायत दर्ज कराएं। हम हर संभव सहायता करेंगे।” उन्होंने यह भी बताया कि आयोग की हेल्पलाइन 24 घंटे सक्रिय है, और शिकायत दर्ज होते ही उसे प्राथमिकता के आधार पर संबंधित राज्य को भेज दिया जाता है ताकि शीघ्र कार्रवाई हो सके।
महिलाओं के लिए सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता
रहाटकर ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग का मुख्य उद्देश्य है—
महिलाओं के सम्मान की रक्षा
उनके अधिकारों की सुरक्षा
हर परिस्थिति में उन्हें न्याय दिलाना
और सामाजिक तथा कानूनी रूप से उन्हें सशक्त करना
उन्होंने यह भी कहा कि आयोग भविष्य में भी अभियान, जागरूकता कार्यक्रम और सुनवाइयों को और व्यापक स्तर पर आयोजित करेगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इससे लाभ प्राप्त कर सकें।


