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उपराष्ट्रपति धनखड़ ने धार्मिक रूपांतरण पर जताई चिंता

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने धार्मिक रूपांतरण पर जताई चिंता

शोभना शर्मा। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक कार्यक्रम में हिंदू धर्म को समावेशी बताते हुए इसकी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म न केवल मानवता बल्कि पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों और प्रकृति का संरक्षण करने की बात करता है। उपराष्ट्रपति ने कहा, “भारतीय सभ्यता का आधार न केवल मानव कल्याण है, बल्कि संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए है।”

धनखड़ ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना को सनातन धर्म के सार के रूप में बताया। उनके अनुसार, संविधान में जो मूल्य हैं, वे सनातन धर्म से उत्पन्न हुए हैं, और हमारी प्रस्तावना उन मूल्यों को प्रतिबिंबित करती है। उपराष्ट्रपति ने कहा, “हमारे संविधान के मूल्य सनातन धर्म के मूल्यों का विस्तार हैं, जो मानवता के प्रगति पथ को प्रशस्त करते हैं।”

सेवा की भावना को भारतीय संस्कृति का मूलमंत्र बताते हुए उपराष्ट्रपति ने COVID-19 महामारी के दौरान भारतीय समाज द्वारा प्रदर्शित सेवा भावना की प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “जब देश ने COVID का सामना किया, तब हमने देखा कि सेवा की भावना कितनी ऊंचाइयों तक उठकर आई।”

धार्मिक रूपांतरण पर चिंता

उपराष्ट्रपति ने धार्मिक रूपांतरण की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह एक “नीति के रूप में संरचित और सुनियोजित” रूप में हो रहा है, जो हमारे संवैधानिक मूल्यों और सिद्धांतों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों को निशाना बनाया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। धनखड़ ने इसे षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि इसे नाकाम करने के लिए तेज गति से काम करने की आवश्यकता है।

उपराष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि हमें इन “खतरनाक ताकतों” के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जलवायु परिवर्तन पर भारतीय दृष्टिकोण

धनखड़ ने जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों पर भी ध्यान आकर्षित किया और कहा कि भारतीय दर्शन में इसका समाधान पहले से ही मौजूद है। उन्होंने कहा, “हमारी संस्कृति में जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए गहराई से निहित मूल्य हैं। अगर दुनिया ने हमारे इन मूल्यों को अपनाया होता, तो आज यह संकट पैदा ही नहीं होता।”

उपराष्ट्रपति ने भारतीय सभ्यता और संविधान के महत्व को रेखांकित किया, जो सनातन धर्म के मूल्यों से प्रेरित है। उन्होंने सेवा भावना, धार्मिक रूपांतरण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए समाज को सतर्क और जागरूक होने का आह्वान किया।

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