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राम कथा में वसुंधरा राजे का ‘वनवास’ वाला सियासी संदेश

राम कथा में वसुंधरा राजे का ‘वनवास’ वाला सियासी संदेश

शोभना शर्मा।  राजस्थान की राजनीति में हमेशा से अपनी खास पहचान बनाए रखने वाली पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। गुरुवार शाम को वे धौलपुर (Dholpur) पहुंचीं, जहां परशुराम धर्मशाला में चल रही कथावाचक मुरलीधर महाराज की राम कथा का श्रवण किया। करीब दो घंटे तक कथा सुनने के बाद जब उन्होंने अपना संबोधन शुरू किया तो उसमें ऐसे संदेश छिपे थे, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।

राम कथा में सुनाई ‘वनवास’ की गूंज

अपने संबोधन में वसुंधरा राजे ने ‘वनवास’ और ‘धैर्य’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे सीधे-सीधे उनके राजनीतिक जीवन से जोड़कर देखा जाने लगा। राजे ने कहा,
“आजकल की दुनिया बड़ी अजीब है। जिसे अपना समझा, वो भी पराया हो जाता है। लेकिन अपने परिवार के लिए हर किसी की ड्यूटी होती है। ऐसे वक्त में परिवार की बहू, मां और बेटी को अपना-अपना काम करना पड़ता है।”

राजे का यह बयान महज एक साधारण वक्तव्य नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे उनके राजनीतिक परिवार यानी बीजेपी से जोड़कर देखा जा रहा है। राजस्थान में 2023 में सरकार बनने के बाद से ही वसुंधरा राजे को उस स्तर की जिम्मेदारी नहीं मिली है, जिसकी उनके समर्थक लंबे समय से उम्मीद कर रहे थे।

“वनवास सबके जीवन में आता है”

पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा,
“वनवास सिर्फ भगवान श्रीराम की जिंदगी का हिस्सा नहीं था। हर इंसान के जीवन में कहीं न कहीं वो वनवास आता है। पर आता है तो जाता भी है। रामजी ने हमें यह बताया है कि जीवन में धैर्य क्या चीज है। हमें धैर्य को समझना होगा। दुनिया में कोई भी चीज स्थायी नहीं है। अगर वो आई है तो जाएगी भी।”

राजे का यह कथन सीधे-सीधे उनके मौजूदा राजनीतिक हालात का इशारा माना जा रहा है। वे अपने समर्थकों को यह संदेश देती नजर आईं कि राजनीतिक संघर्ष में धैर्य रखना ही सफलता की कुंजी है। साथ ही यह भी जताया कि उनका ‘वनवास’ भी जल्द खत्म होगा।

राजनीतिक संकेत और विश्लेषण

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वसुंधरा राजे अपने इस संबोधन के जरिए न केवल अपने कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ा रही हैं, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी यह संदेश दे रही हैं कि वे अभी भी मैदान में सक्रिय हैं और उन्हें नजरअंदाज करना आसान नहीं है।

भाजपा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहने वाली राजे का यह बयान पार्टी के भीतर उनकी स्थिति पर भी रोशनी डालता है। उनके समर्थक मानते हैं कि राजस्थान की राजनीति में राजे की भूमिका और योगदान को अनदेखा नहीं किया जा सकता।

धौलपुर यात्रा का खास महत्व

सूत्रों का कहना है कि वसुंधरा राजे का धौलपुर का यह दौरा एक निजी यात्रा के तौर पर घोषित किया गया था। लेकिन राम कथा में उनका अचानक पहुंचना और कार्यकर्ताओं से मिलना यह संकेत देता है कि यह यात्रा केवल निजी कारणों से नहीं थी। इसे उनकी राजनीतिक सक्रियता का हिस्सा भी माना जा रहा है।

धौलपुर राजे का गढ़ माना जाता है और यहां से उन्होंने हमेशा अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया है। इस बार भी उनके इस कदम को अपनी मौजूदगी को फिर से मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

कार्यकर्ताओं में उम्मीदें जगीं

वसुंधरा राजे के इस बयान के बाद उनके समर्थकों और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा देखी जा रही है। वे मानते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री का यह संदेश इस बात की पुष्टि करता है कि वह अभी भी सक्रिय राजनीति में लौटने का मन बना चुकी हैं।

राजे की लोकप्रियता और संगठन पर पकड़ किसी से छिपी नहीं है। यही कारण है कि उनकी हर छोटी-बड़ी गतिविधि राजस्थान की राजनीति में चर्चा का विषय बन जाती है।

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