शोभना शर्मा। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के डूंगरपुर प्रवास ने राज्य की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं को हवा दे दी है। राजे शनिवार को बांसवाड़ा के गढ़ी में शोक संतप्त परिवार से मिलने जा रही थीं, लेकिन बीच रास्ते डूंगरपुर सर्किट हाउस में उनका ठहरना और भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में हुई चर्चा कई महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत छोड़ गई। हालांकि कार्यक्रम आधिकारिक रूप से शोक संवेदना का था, लेकिन डूंगरपुर में उनका रुकना और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संवाद मौजूदा राजनीतिक समीकरणों और भाजपा के अंदरूनी माहौल को समझने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
बंद कमरे में भाजपा कार्यकर्ताओं की खुली नाराजगी
डूंगरपुर पहुंचते ही भाजपा कार्यकर्ताओं ने वसुंधरा राजे का ज़ोरदार स्वागत किया। स्वागत के बाद सर्किट हाउस में बंद कमरे की बैठक शुरू हुई, जिसमें मीडिया को प्रवेश नहीं मिला। बैठक में शामिल पार्टी कार्यकर्ताओं व नेताओं ने प्रशासन के रवैये और जनता की समस्याओं के प्रति उदासीनता को लेकर गंभीर शिकायतें दर्ज कीं।
जैसे ही बातचीत की शुरुआत हुई, वसुंधरा राजे ने सहज अंदाज़ में प्रश्न किया — “बताओ, आजकल क्या चल रहा है?” इस सवाल पर पूर्व जिलाध्यक्ष और पूर्व सभापति गुरुप्रसाद पटेल ने सीधे शब्दों में असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी न तो जनता की बात सुन रहे हैं और न ही पार्टी कार्यकर्ताओं को महत्व दे रहे हैं। उनके अनुसार, स्थानीय स्तर पर शिकायतों, विकास कार्यों और जनसुनवाई को अमूमन अनदेखा किया जा रहा है। यह खुलकर सामने आया कि कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है और वे महसूस कर रहे हैं कि प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार और कार्रवाई में पार्टी संगठन की भूमिका प्रभावी तरीके से नहीं दिखती।
स्वच्छता और बजट पर भी उठा महत्वपूर्ण सवाल
बैठक के दौरान नगर परिषद सभापति अमृत कलासुआ ने डूंगरपुर नगर परिषद से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। उन्होंने बताया कि शहर हर साल स्वच्छता पुरस्कार जीत रहा है, लेकिन इसके बावजूद नगर परिषद को पर्याप्त बजट या इनाम राशि नहीं मिलती। सभापति का कहना था कि अगर बजट मिले तो शहर में सफाई व्यवस्था और आधुनिक उपकरण खरीदे जा सकते हैं, जिससे स्वच्छता और बेहतर हो सकती है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से इशारा किया कि प्रशासन और शासन स्तर पर नगर परिषद की उपलब्धियों के बावजूद उसे उचित समर्थन नहीं मिल रहा।
राजनीतिक कार्यक्रम से इंकार, पर संकेत स्पष्ट
बैठक के बाद जब मीडिया ने वसुंधरा राजे से राज्य सरकार के दो साल के कार्यकाल को लेकर प्रतिक्रिया चाही, तो उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। उन्होंने कहा — “मैं बांसवाड़ा के लिए जा रही हूं, यह मेरा कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है।” इसके बाद वह निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार विधायक कैलाश मीणा के पुत्र के निधन पर उनके शोक संतप्त परिवार से मिलने गढ़ी के लिए रवाना हो गईं। हालांकि राजे ने इसे राजनीतिक कार्यक्रम मानने से इनकार किया, लेकिन बंद कमरे में पार्टी नेताओं के साथ चर्चा, कार्यकर्ताओं की नाराजगी और प्रशासन पर उठे सवाल यह संकेत देते हैं कि भाजपा के भीतर संगठनात्मक सक्रियता के साथ राजनीतिक समीकरण भी नया आकार ले रहे हैं।
राजनीति में “वसुंधरा फैक्टर” फिर चर्चा में
राजे के इस अनौपचारिक पर असरदार संवाद ने राजस्थान की राजनीति में फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है— क्या वसुंधरा राजे आने वाले समय में सक्रिय भूमिका निभाने जा रही हैं? चूंकि राज्य की राजनीति में उनका जनाधार, दक्षिणी राजस्थान में पकड़ और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच प्रभाव हमेशा से मजबूत रहा है, ऐसे में डूंगरपुर का यह दौरा केवल औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।


