मनीषा शर्मा। राजस्थान में पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। लाखों एकड़ में खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। इसी मुद्दे पर बुधवार को राजस्थान विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों ने सरकार को घेरते हुए मुआवजा दिलाने की मांग उठाई।
आपदा राहत मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने स्थगन प्रस्तावों का जवाब देते हुए कहा कि प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। लेकिन उनके जवाब के दौरान ही कांग्रेस विधायकों ने सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
स्पीकर से उलझे कांग्रेस विधायक
हंगामे के बीच कांग्रेस विधायक अशोक चांदना बिना अनुमति के बोलने लगे। जब स्पीकर ने उन्हें टोक दिया तो वे सीधे स्पीकर से बहस करने लगे। इससे सदन का माहौल और गरमा गया।
सत्तापक्ष के विधायकों ने चांदना की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और सदन में शोरगुल बढ़ता चला गया।
स्थिति बेकाबू होती देख स्पीकर ने दोपहर 12 बजकर 34 मिनट पर विधानसभा की कार्यवाही को 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
कांग्रेस विधायकों का आरोप – सरकार ने किसानों को भुला दिया
कांग्रेस विधायक अमित चाचाण और नरेंद्र बुडानिया ने शून्यकाल के दौरान सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि भारी बारिश से किसानों की खड़ी और पकी फसलें पूरी तरह चौपट हो गई हैं। लाखों एकड़ जमीन पर नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
बुडानिया ने कहा, “सरकार हेलिकॉप्टर में घूम रही है, लेकिन किसानों की सुध लेने का समय नहीं है। सरकार को तत्काल किसानों को मुआवजा देना चाहिए।”
विधानसभा परिसर में कांग्रेस का प्रदर्शन
सदन के अंदर ही नहीं, बल्कि बाहर भी कांग्रेस विधायकों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ट्रैक्टर चलाकर विधानसभा के वेस्टर्न गेट तक पहुंचे। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने ट्रैक्टर को अंदर नहीं जाने दिया।
थोड़ी नोकझोंक के बाद कांग्रेस विधायक पैदल मार्च करते हुए विधानसभा के मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंचे। वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ नारे लगाए। कई विधायक हाथों में बैनर लेकर आए थे, जिन पर किसानों की मांगें लिखी थीं। कुछ विधायकों ने खराब हुई फसलें अपने साथ लेकर प्रदर्शन किया ताकि सरकार को किसानों की वास्तविक स्थिति दिखाई जा सके।
नेता प्रतिपक्ष जूली के आरोप
कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा और बाहर दोनों जगह सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “प्रदेश में भारी बारिश से किसानों की फसलें पूरी तरह नष्ट हो गई हैं। हजारों परिवार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लोगों को जान-माल का भारी नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार ने कोई राहत नहीं पहुंचाई।”
जूली का कहना था कि सरकार किसानों की सुध लेने के बजाय राजनीतिक कार्यक्रमों और हवाई दौरों में व्यस्त है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसानों को जल्द राहत नहीं दी गई तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी।
विधानसभा में अन्य मुद्दे भी रहे चर्चा में
बारिश और फसलों के मुद्दे पर हंगामे के अलावा विधानसभा में कुछ और मामले भी उठे। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरिस्का टाइगर रिजर्व में खनन और क्षेत्र विस्तार से जुड़े सवाल को लेकर चर्चा करनी चाही। लेकिन स्पीकर ने यह कहते हुए सवाल स्थगित कर दिया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इस पर भी विपक्ष ने असंतोष जताया।
किसानों के लिए संवेदनशील मुद्दा
राजस्थान में खेती किसानी अब भी बड़ी आबादी की आजीविका का मुख्य साधन है। ऐसे में जब भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदा से फसलें बर्बाद होती हैं तो किसान आर्थिक संकट में घिर जाते हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को तत्काल राहत पैकेज घोषित करना चाहिए, ताकि किसानों को नुकसान से उबरने में मदद मिल सके।
सत्ता पक्ष का दावा है कि प्रशासनिक स्तर पर नुकसान का आकलन किया जा रहा है और सभी प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। हालांकि, विपक्ष इसे सिर्फ आश्वासन मानते हुए सरकार को आड़े हाथों ले रहा है।


