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MDSU अजमेर में MSc गणित परिणामों पर बवाल: 400 छात्रों ने कॉपी जांच में लापरवाही का लगाया आरोप

MDSU अजमेर में MSc गणित परिणामों पर बवाल: 400 छात्रों ने कॉपी जांच में लापरवाही का लगाया आरोप

शोभना शर्मा, अजमेर।  राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) एक बड़े विवाद में घिर गया है। एमएससी मैथेमेटिक्स (MSc Mathematics) प्रथम सेमेस्टर के परिणाम घोषित होने के बाद करीब 400 छात्रों ने कॉपियों की जांच में भारी लापरवाही का आरोप लगाया है। छात्रों का कहना है कि गलत मूल्यांकन के कारण कई मेधावी विद्यार्थी फेल घोषित कर दिए गए, जिससे उनके भविष्य पर संकट मंडरा गया है।

छात्रों का आरोप — कॉपियां जांची ही नहीं गईं

एमएससी मैथेमेटिक्स प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा वर्ष 2025 की शुरुआत में आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम 14 सितंबर 2025 को घोषित किया गया। परिणाम आते ही छात्रों में आक्रोश फैल गया। अधिकांश छात्रों को उन विषयों में जीरो या एक अंक दिए गए जिनमें उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

छात्रों ने बताया कि अमूर्त बीजगणित (Abstract Algebra), समिश्र विश्लेषण (Complex Analysis), टेंसर (Tensor), मेट्रिक स्पेस (Metric Space) और विशिष्ट फलन (Special Functions) जैसे विषयों में बड़ी संख्या में छात्रों को असामान्य रूप से कम अंक दिए गए।

रिचेकिंग के लिए छात्रों ने प्रति विषय 300 रुपये शुल्क जमा कर कॉपियां दोबारा जांच के लिए दीं। जब कॉपियां वापस मिलीं तो मामला और गंभीर हो गया। 90 प्रतिशत कॉपियों पर लाल पेन का निशान तक नहीं था, यानी यह स्पष्ट था कि कॉपियां जांची ही नहीं गई थीं। रिचेकिंग के बाद कई छात्रों के अंक 0 से बढ़कर 35 से 50 तक पहुंच गए।

रिचेकिंग में बड़ा बदलाव, खुली विश्वविद्यालय की पोल

अजमेर की छात्रा निकिता चौधरी ने बताया कि उन्हें चार विषयों में फेल घोषित किया गया था, जबकि रिचेकिंग के बाद एक विषय में 24 की जगह 56 अंक और दूसरे में 20 की जगह 54 अंक मिले। इसी तरह निशा रावत ने कहा कि जिस विषय में 70 से अधिक अंक की उम्मीद थी, वहां उन्हें सिर्फ 22 अंक मिले और रिचेकिंग में “नो चेंज” लिखा गया।

छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय नियमों के अनुसार सिर्फ दो विषयों की रिचेकिंग की अनुमति देता है, जबकि गड़बड़ी सभी विषयों में हुई है। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि परिणाम घोषित करने में भी देरी की गई। परीक्षा दिसंबर 2024 में प्रस्तावित थी, लेकिन इसे फरवरी 2025 में आयोजित किया गया और परिणाम छह महीने बाद जारी किए गए।

छात्रसंघ ने कुलपति पर लगाए गंभीर आरोप

MDSU छात्रसंघ अध्यक्ष महिपाल गोदारा ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि कुलपति, परीक्षा नियंत्रक और विभागीय कोऑर्डिनेटर ने कॉपियों की जांच में लापरवाही बरती है। गोदारा ने बताया कि वह कुछ छात्रों के साथ कुलपति से मिलने विश्वविद्यालय पहुंचे, लेकिन गेट पर ही सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया और बाद में गेट पर ताला लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। गोदारा ने राज्यपाल से इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

भविष्य पर संकट और आंदोलन की चेतावनी

छात्रों का कहना है कि MDSU प्रशासन की इस लापरवाही से उनका भविष्य खतरे में है। कई छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं और आगे के कोर्स के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि वे फेल घोषित कर दिए गए हैं। छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी शिकायतों का निवारण नहीं किया गया तो वे सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं बल्कि पूरे मूल्यांकन तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल है। छात्रों ने यह भी मांग की है कि विश्वविद्यालय सभी एमएससी मैथेमेटिक्स कॉपियों की थर्ड पार्टी जांच कराए ताकि सही और निष्पक्ष परिणाम सामने आ सकें।

विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई

हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। सूत्रों के अनुसार, परीक्षा नियंत्रक कार्यालय ने सभी आरोपों को निराधार बताया है, लेकिन छात्रों का कहना है कि वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक न्याय नहीं मिलता।

इस विवाद के चलते MDSU अजमेर एक बार फिर परीक्षा परिणामों की पारदर्शिता पर सवालों के घेरे में आ गया है। छात्रों का कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द समाधान नहीं किया तो वे विश्वविद्यालय परिसर में धरना देने के लिए मजबूर होंगे।

MDSU अजमेर में एमएससी मैथेमेटिक्स प्रथम सेमेस्टर परिणाम विवाद ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि कॉपी जांच में भारी लापरवाही और रिचेकिंग में नंबरों में भारी अंतर इस बात का प्रमाण है कि मूल्यांकन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही। अब देखना यह होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाता है या यह विवाद आंदोलन का रूप ले लेता है।

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