मनीषा शर्मा। राजस्थान की राजनीति इन दिनों बाड़मेर और बालोतरा जिलों की नई सीमा निर्धारण को लेकर गर्माई हुई है। भजनलाल सरकार द्वारा दोनों जिलों की सीमाओं में बड़े बदलाव का फैसला किए जाने के बाद राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। जहां कांग्रेस इसे राजनीतिक द्वेष और जातीय समीकरणों पर आधारित निर्णय बता रही है, वहीं भाजपा इसे प्रशासनिक सुविधा और आमजनहित में उठाया गया कदम बता रही है।
धरने पर बैठे हेमाराम चौधरी, छलके आंसू
पश्चिमी राजस्थान के वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी ने इस फैसले का विरोध करते हुए धोरीमन्ना उपखंड मुख्यालय पर स्थानीय लोगों के साथ धरना शुरू कर दिया। धरने के दौरान मीडिया से बातचीत में वे भावुक हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने कहा कि यह फैसला स्थानीय जनता की भावनाओं के खिलाफ है और इसे वापस लेने तक वे पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना था कि यह केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असर डालने वाला निर्णय है।
“आखिरी सांस तक संघर्ष” का ऐलान
हेमाराम चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे इस निर्णय के खिलाफ आखिरी सांस तक संघर्ष करते रहेंगे। उनके अनुसार क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकता को अनदेखा कर जल्दबाजी में फैसला लिया गया है। धरने में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी जुड़े, जिन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
नया जिलाबंदी फैसले का पूरा घटनाक्रम
कांग्रेस सरकार के समय बालोतरा को बाड़मेर से अलग करके नया जिला बनाया गया था। तब बायतू तहसील को बालोतरा जिले में शामिल किया गया, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना बाड़मेर में ही रहे। भजनलाल सरकार ने 31 दिसंबर 2025 को निर्णय लेते हुए 2 जनवरी 2026 को आदेश जारी कर बड़ा प्रशासनिक फेरबदल कर दिया। इसके तहत बायतू को वापस बाड़मेर में शामिल कर दिया गया, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को बालोतरा जिले में स्थानांतरित कर दिया गया। इसी बदलाव से असंतोष फैल गया है।
गहलोत बोले — तुगलकी फरमान
फैसले के बाद कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे तुगलकी फरमान बताते हुए कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से लिया गया कदम है। उनके अनुसार इस तरह के फैसले विकास कार्यों को बाधित करेंगे और लोगों के सामने अनावश्यक प्रशासनिक संकट खड़ा करेंगे।
जातीय समीकरण पर चोट का आरोप
मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और बायतू विधायक हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि एक विशेष जाति को निशाना बनाकर बायतू को तोड़ने की कोशिश की गई है। उनका कहना है कि जिले की सीमाओं में बदलाव सामाजिक संतुलन को प्रभावित करने वाला है और इसे जनता के हित के नाम पर जायज नहीं ठहराया जा सकता।
भाजपा ने कहा — जनता को होगा फायदा
दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। भाजपा नेता स्वरूप सिंह खारा के अनुसार यह निर्णय प्रशासनिक ढांचे, सांस्कृतिक जुड़ाव और भौगोलिक सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। उनका कहना है कि बायतू का ऐतिहासिक संबंध बाड़मेर से रहा है, जबकि गुड़ामालानी और धोरीमन्ना का जुड़ाव बालोतरा से अधिक था।
आदेश लागू, पुनर्विचार की संभावना कम
सरकार की ओर से आधिकारिक विस्तृत बयान भले ही सामने नहीं आया हो, लेकिन दोनों क्षेत्रों के सरकारी कार्यालयों और भवनों पर “जिला बालोतरा” लिखने का काम शुरू कर दिया गया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि फिलहाल सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार के मूड में नहीं है।


