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जयपुर में दरगाह की छत निर्माण पर बवाल, दो विधायकों के बीच सियासी टकराव

जयपुर में दरगाह की छत निर्माण पर बवाल, दो विधायकों के बीच सियासी टकराव

राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब चांदपोल सर्किल के पास स्थित एक पुरानी दरगाह की छत के निर्माण कार्य को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। हवामहल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का विरोध किया। उन्होंने इसे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए गंभीर आरोप लगाए। इस पर स्थानीय कांग्रेस विधायक अमीन कागजी भी मौके पर पहुंचे और दोनों विधायकों के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

मौके पर पहुंची पुलिस, हालात संभाले

विवाद बढ़ता देख स्थानीय पुलिस और कमिश्नरेट के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया और निर्माण कार्य को लेकर दस्तावेजों की जांच की बात कही। पुलिस की मौजूदगी के बाद हालात सामान्य हुए, लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। बाद में कांग्रेस विधायक अमीन कागजी पूरे प्रकरण की शिकायत लेकर जयपुर पुलिस कमिश्नरेट पहुंचे, जहां उनके साथ आदर्श नगर विधायक रफीक खान भी मौजूद रहे।

बालमुकुंद आचार्य का आरोप: सरकारी जमीन पर अतिक्रमण

हवामहल विधायक बालमुकुंद आचार्य ने दरगाह की छत के निर्माण पर सवाल उठाते हुए कहा कि चांदपोल सब्जी मंडी की सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले यह संरचना केवल 4×4 के छोटे क्षेत्र में थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर करीब 400 गज तक फैलाने का प्रयास किया जा रहा है।
बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि परकोटे की दीवार को नुकसान पहुंचाकर, पत्थर निकालकर और उसमें सरिया डालकर छत डालने का काम किया जा रहा है, जो पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जनप्रतिनिधि होने का यह मतलब नहीं है कि कोई भी सरकारी भूमि पर इस तरह का निर्माण करा दे।

अमीन कागजी का जवाब: सभी अनुमति के साथ काम

कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने बालमुकुंद आचार्य के आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया के सामने नगर निगम की ओर से जारी निर्माण अनुमति की प्रति दिखाई। कागजी ने कहा कि दरगाह की छत का निर्माण जयपुर नगर निगम की परमिशन के साथ किया जा रहा है और इसके लिए विधायक निधि से 20 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
उन्होंने बताया कि वर्क ऑर्डर और वित्तीय स्वीकृति से जुड़े सभी दस्तावेज मौजूद हैं और किसी भी तरह का अवैध निर्माण नहीं हो रहा है।

स्थानीय लोगों का दावा: 70 से 100 साल पुरानी दरगाह

स्थानीय लोगों ने भी दरगाह को वर्षों पुराना बताते हुए निर्माण कार्य का समर्थन किया। उनका कहना है कि यह मजार करीब 70 से 100 साल पुरानी है और आसपास सब्जी मंडी में दुकान लगाने वाले हिंदू समुदाय के लोग भी वर्षों से इसे देखते आ रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि दरगाह के प्रति लोगों की गहरी आस्था है। बारिश के मौसम में छत से पानी टपकता था, जिससे अंदर नुकसान हो रहा था। इसी कारण छत के निर्माण की जरूरत पड़ी।

माहौल खराब करने के आरोप

निर्माण कार्य में लगे एक व्यक्ति ने दावा किया कि सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही काम शुरू किया गया है। उसने कहा कि इसके बावजूद भाजपा विधायक द्वारा मौके पर आकर हंगामा किया गया, जिससे शहर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश हुई।
वहीं अमीन कागजी ने कहा कि चांदपोल क्षेत्र हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक रहा है और इस तरह के विवाद खड़े कर सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्माण कार्य में अनावश्यक अड़चन डाली गई तो वे न्यायालय का भी रुख करेंगे।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज

इस पूरे घटनाक्रम के बाद जयपुर की राजनीति गरमा गई है। भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक ओर भाजपा विधायक इसे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण का मामला बता रहे हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस विधायक इसे पूरी तरह वैध और अनुमति प्राप्त निर्माण कार्य बता रहे हैं।

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