मनीषा शर्मा। दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित कांग्रेस रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ लगाए गए विवादित नारे ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। यह मामला अब सड़कों से निकलकर संसद के दोनों सदनों तक पहुंच गया है। बीजेपी ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे जनता के आक्रोश की अभिव्यक्ति करार दिया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कांग्रेस की कुछ महिला कार्यकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाती हुई दिखाई दे रही हैं। वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी ने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए संसद में उठाने का फैसला किया।
राज्यसभा में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस मामले को जोरशोर से उठाया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की। नड्डा ने कहा कि इस तरह की भाषा न केवल राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर इस तरह के नारे स्वीकार्य नहीं हो सकते।
लोकसभा में भी यह मुद्दा गूंजा। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने वीडियो का हवाला देते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए और कहा कि प्रधानमंत्री देश के संवैधानिक पद पर हैं, उनके खिलाफ इस तरह की भाषा पूरे देश का अपमान है। रिजिजू ने कांग्रेस से स्पष्ट जवाब और माफी की मांग की।
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में इस घटना को सामान्य राजनीतिक विरोध से अलग बताते हुए इसे “व्यक्तिगत दुर्भावना का खतरनाक प्रदर्शन” करार दिया। उन्होंने कहा कि चुनाव आते-जाते रहते हैं, लेकिन कांग्रेस का राजनीतिक एजेंडा आज भी केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इर्द-गिर्द ही घूमता नजर आता है। मालवीय ने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश के विकास, रोजगार और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर सकारात्मक एजेंडा देने के बजाय नफरत और आक्रोश से भरे नारे लगवा रही है।
अमित मालवीय ने यह भी दावा किया कि इस तरह के जहरीले बोल किसी सड़कछाप प्रदर्शन का नतीजा नहीं होते, बल्कि इसके पीछे पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जिम्मेदार होता है। उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस नेतृत्व वास्तव में इस भाषा से सहमत नहीं है, तो उसे सामने आकर इसकी निंदा करनी चाहिए और माफी मांगनी चाहिए।
इस बीच कांग्रेस की ओर से भी पलटवार देखने को मिला है। जयपुर सिटी महिला कांग्रेस की अध्यक्ष मंजू लता मीणा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी हालत में माफी नहीं मांगेंगी। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में आयोजित “वोट चोर, गद्दी छोड़” रैली के दौरान दिया गया नारा जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति है और वह अपने बयान पर कायम हैं।
मंजू लता मीणा ने कहा कि देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों से जनता परेशान है। वही आक्रोश रैली के दौरान नारों के रूप में सामने आया। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष का काम ही सरकार से सवाल पूछना और सच्चाई को जनता के सामने लाना होता है। उनके अनुसार, इस नारे को व्यक्तिगत हमला बताना सत्तापक्ष की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।
जब उनसे यह सवाल किया गया कि इस तरह की भाषा राजनीतिक संस्कृति और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है, तो उन्होंने दो टूक कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं और किसी तरह की माफी नहीं मांगेंगी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पार्टी झुकने वाली नहीं है।
इस विवाद के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। बीजेपी इसे कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति का उदाहरण बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे जनता की आवाज और विरोध की अभिव्यक्ति कहकर बचाव में जुटी है। संसद में उठे इस मुद्दे ने आने वाले दिनों में राजनीतिक टकराव और तेज होने के संकेत दे दिए हैं।


