भरतपुर जिला कलेक्ट्रेट में सोमवार को आयोजित दिशा बैठक उस समय विवाद और हंगामे का केंद्र बन गई, जब बैठक की अध्यक्षता कर रहीं सांसद संजना जाटव ने प्रशासनिक और चिकित्सा अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी जताई। बैठक का उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा करना था, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही और ओवरलोड वाहनों की समस्या ने चर्चा को तीखा बना दिया।
बैठक के दौरान सांसद संजना जाटव ने सबसे पहले ओवरलोड वाहनों के मुद्दे को उठाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लगातार ओवरलोडिंग के कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और अब तक चार लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दो दिनों के भीतर इस समस्या पर प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो वे जनता के साथ सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगी। उनके इस बयान ने बैठक का माहौल अचानक गंभीर और तनावपूर्ण बना दिया।
इसी दौरान चर्चा स्वास्थ्य सेवाओं की ओर मुड़ी, जहां सांसद ने हाल ही में हुई एक महिला की मौत का मामला उठाया। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले आंधी-तूफान के दौरान एक महिला छत से गिरकर घायल हो गई थी, जिसे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी से बात भी हो चुकी थी, लेकिन अस्पताल में तैनात कर्मचारियों ने फोन तक नहीं उठाया। समय पर इलाज न मिलने के कारण महिला की मौत हो गई। इस घटना को लेकर सांसद ने गहरी नाराजगी जताते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया।
जब यह मामला चर्चा में था, तब बैठक में मौजूद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के मुस्कुराने पर सांसद और अधिक नाराज हो गईं। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि जब किसी की जान चली गई हो, तो इस तरह का व्यवहार बेहद असंवेदनशील और शर्मनाक है। इस पर कलेक्टर Kamar Chaudhary ने सफाई देते हुए कहा कि अधिकारी हंस नहीं रहे थे, बल्कि उनके चेहरे का भाव ऐसा प्रतीत हो रहा था। हालांकि इस सफाई के बाद माहौल कुछ हल्का हुआ और स्वयं सांसद भी इस स्थिति पर मुस्कुरा दीं, लेकिन इससे पहले बैठक में तनाव स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद संजना जाटव ने एक बार फिर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि ओवरलोड वाहनों की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है और यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि लोगों की जान से खिलवाड़ है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी उन्होंने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि आमजन बड़ी उम्मीद के साथ अस्पताल पहुंचता है, लेकिन वहां उन्हें लापरवाही और उदासीनता का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की निष्क्रियता और लापरवाही के कारण लोगों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है, जिससे गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। सांसद ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार लाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या जिले में स्वास्थ्य सेवाएं और प्रशासनिक व्यवस्था अपेक्षित स्तर पर काम कर रही हैं। दिशा बैठक जैसे मंच पर इस तरह के मुद्दों का उठना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर कई समस्याएं अब भी बनी हुई हैं, जिनका समाधान तत्काल आवश्यक है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सांसद का यह आक्रामक रुख न केवल प्रशासन को चेतावनी देने का प्रयास है, बल्कि जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की एक रणनीति भी है। हालांकि, इस तरह की सार्वजनिक फटकार से प्रशासनिक तंत्र पर दबाव जरूर बढ़ता है, लेकिन इससे सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाना भी जरूरी हो जाता है।


