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UPI की तेजी बन रही सबसे बड़ा खतरा, ‘Pay’ दबाने से पहले एक सेकेंड की चूक से खाली हो सकता है अकाउंट

UPI की तेजी बन रही सबसे बड़ा खतरा, ‘Pay’ दबाने से पहले एक सेकेंड की चूक से खाली हो सकता है अकाउंट

शोभना शर्मा। भारत में डिजिटल भुगतान की दुनिया में UPI ने क्रांति ला दी है। अब दुकान पर कैश रखने की जरूरत नहीं, जेब से फोन निकाला और कुछ सेकेंड में भुगतान हो गया। यही तेजी UPI को सबसे लोकप्रिय बनाती है, लेकिन यही सुविधा कई बार यूजर्स के लिए खतरे का कारण भी बन रही है। बिना सोचे-समझे हर रिक्वेस्ट, लिंक या QR कोड पर भरोसा करना साइबर फ्रॉड का सबसे बड़ा रास्ता बन चुका है। आज के समय में ज्यादातर धोखाधड़ी किसी सिस्टम हैक से नहीं, बल्कि यूजर की छोटी-छोटी गलतियों से होती है। फ्रॉडस्टर तकनीक से ज्यादा इंसानी जल्दबाजी को निशाना बना रहे हैं।

सिस्टम सुरक्षित है, गलती हमारी आदतों में

UPI सिस्टम तकनीकी रूप से काफी सुरक्षित माना जाता है। इसमें मल्टी-लेयर सिक्योरिटी, पिन और बैंक वेरिफिकेशन जैसे फीचर मौजूद हैं। इसके बावजूद फ्रॉड बढ़ रहे हैं, क्योंकि असली कमजोरी सिस्टम नहीं बल्कि यूजर की आदतें हैं। जब कोई अनजान व्यक्ति कहता है कि वह पैसे भेज रहा है और हम बिना पढ़े कलेक्ट रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर लेते हैं, तो हम खुद अपने अकाउंट से पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। इसी तरह रिफंड या ऑफर के नाम पर भेजे गए लिंक पर क्लिक करना भी फ्रॉड की शुरुआत बन जाता है।

रोजमर्रा की लापरवाही कैसे बनती है बड़ा नुकसान

डिजिटल फ्रॉड अक्सर किसी बड़ी साजिश से नहीं, बल्कि जल्दी में लिए गए फैसलों से शुरू होता है। फोन पर कोई खुद को बैंक या कस्टमर केयर बताता है और समस्या हल करने के नाम पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करवा देता है। कुछ ही मिनटों में पूरा अकाउंट खाली हो जाता है। QR कोड स्कैन करते समय नाम या रकम चेक न करना भी एक आम गलती है। कई बार लोग जल्दबाजी में पेमेंट कन्फर्म कर देते हैं और बाद में पता चलता है कि पैसा गलत अकाउंट में चला गया।

हर घर में डिजिटल नियम क्यों जरूरी हो गए हैं

आज UPI का इस्तेमाल सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि बच्चे और बुजुर्ग भी कर रहे हैं। सभी की डिजिटल समझ एक जैसी नहीं होती। ऐसे में एक छोटी सी गलती पूरे परिवार की सेविंग्स पर भारी पड़ सकती है। इसलिए अब जरूरत है कि हर परिवार अपने स्तर पर कुछ डिजिटल नियम तय करे। जैसे बिना पहचान के किसी भी कलेक्ट रिक्वेस्ट को स्वीकार न करना, OTP या पिन किसी के साथ साझा न करना और किसी भी अनजान लिंक या ऐप से दूरी बनाए रखना। यह नियम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को समझाए जाने चाहिए।

UPI फ्रॉड बढ़ने के पीछे की असली वजह

UPI फ्रॉड तेजी से इसलिए बढ़ रहे हैं क्योंकि पेमेंट जितनी तेजी से होता है, फैसले भी उतनी ही तेजी से लिए जा रहे हैं। फ्रॉडस्टर लोगों पर मानसिक दबाव बनाते हैं। कभी कहते हैं कि अभी पेमेंट नहीं किया तो अकाउंट ब्लॉक हो जाएगा, तो कभी रिफंड फेल होने का डर दिखाते हैं। जैसे ही यूजर डर या जल्दबाजी में आता है, वह बिना जांचे पेमेंट या रिक्वेस्ट को मंजूरी दे देता है। यही एक पल की गलती बड़ी रकम के नुकसान में बदल जाती है।

UPI को सुरक्षित बनाने के लिए क्या जरूरी है

डिजिटल सुरक्षा के लिए सबसे जरूरी है कि UPI का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए। बेहतर यह है कि रोजमर्रा के खर्च और सेविंग्स के लिए अलग-अलग बैंक अकाउंट रखें। जिस अकाउंट से UPI चलता है, उसमें सीमित बैलेंस रखें। इसके अलावा बैंक ऐप में ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करना, फोन में मजबूत लॉक और हर UPI ऐप के लिए अलग पिन रखना भी सुरक्षा को मजबूत करता है। ये छोटे कदम बड़े नुकसान से बचा सकते हैं।

‘Pay’ दबाने से पहले एक सेकेंड क्यों अहम है

डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ‘Pay’ बटन दबाने से पहले एक सेकेंड रुकना सबसे असरदार सुरक्षा उपाय है। उस एक सेकेंड में अगर आप सामने वाले का नाम, रकम और कारण जांच लें, तो ज्यादातर फ्रॉड वहीं रुक जाते हैं। अगर मैसेज या कॉल में जल्दी करने का दबाव दिखे, तो उसे खतरे की घंटी समझना चाहिए। जल्दबाजी फ्रॉडस्टर का सबसे मजबूत हथियार है।

जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

कुल मिलाकर UPI ने हमारी जिंदगी को तेज और आसान जरूर बनाया है, लेकिन सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही बढ़ा दी है। सिस्टम सुरक्षित है, लेकिन सही इस्तेमाल हमारी समझ पर निर्भर करता है। अगर हर यूजर ‘Pay’ दबाने से पहले एक सेकेंड रुकने की आदत बना ले और घरों में डिजिटल नियम तय कर लिए जाएं, तो UPI फ्रॉड का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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