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UPI Payment : फिंगरप्रिंट और फेस आईडी से कर सकेंगे पेमेंट, पिन की जरूरत नहीं

UPI Payment : फिंगरप्रिंट और फेस आईडी से कर सकेंगे पेमेंट, पिन की जरूरत नहीं

मनीषा शर्मा।  भारत में डिजिटल पेमेंट सिस्टम लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। अब देश में UPI (Unified Payments Interface) के जरिए पेमेंट करने का तरीका और भी आसान होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने NPCI (National Payments Corporation of India) के नए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन फीचर्स को मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब फेस आईडी (Face ID) और फिंगरप्रिंट स्कैन (Fingerprint Scan) के जरिए UPI ट्रांजैक्शन किए जा सकेंगे।

यह फीचर 7 अक्टूबर को मुंबई में चल रहे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2025 के दौरान RBI के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने लॉन्च किया। जल्द ही देश के प्रमुख UPI एप्स — गूगल पे, फोनपे, पेटीएम और अन्य — इस फीचर को अपडेट में शामिल करेंगे।

UPI पेमेंट में अब पिन की जरूरत नहीं होगी

अब तक जब भी यूजर UPI से पेमेंट करते थे, उन्हें UPI पिन (UPI PIN) डालना पड़ता था। लेकिन अब यह सिस्टम ऑप्शनल हो जाएगा। यानी आप चाहें तो फेस रिकग्निशन या फिंगरप्रिंट से ट्रांजैक्शन कर पाएंगे।

NPCI के अनुसार, यह नया फीचर UPI पेमेंट को अधिक सुरक्षित, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाएगा। यह कदम देश में डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

ATM से कैश निकालने में भी होगा बायोमेट्रिक यूज

इस नई तकनीक का फायदा सिर्फ मोबाइल पेमेंट तक सीमित नहीं रहेगा। अब ATM से कैश निकालने में भी यूजर को पिन डालने की जरूरत नहीं होगी। आप अपने फिंगरप्रिंट या फेस स्कैन से कैश निकाल सकेंगे। इसके अलावा, अगर कोई नया UPI यूजर है या उसने UPI पिन भूल गया है, तो उसे डेबिट कार्ड की जानकारी या OTP डालने की आवश्यकता नहीं होगी। वह सीधे फिंगरप्रिंट स्कैन के माध्यम से अपना नया UPI PIN सेट या रीसेट कर सकेगा।

बायोमेट्रिक पेमेंट क्या है और कैसे काम करेगा?

बायोमेट्रिक पेमेंट सिस्टम में यूजर की पहचान फिंगरप्रिंट या फेस रिकग्निशन के जरिए होती है। यह पारंपरिक PIN या पासवर्ड की तुलना में ज्यादा सुरक्षित है क्योंकि किसी व्यक्ति के फिंगरप्रिंट या चेहरे की पहचान को कॉपी करना लगभग असंभव होता है।

जब आप UPI के जरिए पेमेंट करेंगे, तो आपके फोन पर अब दो विकल्प आएंगे —

  1. UPI PIN डालकर पेमेंट करना

  2. फेस स्कैन या फिंगरप्रिंट स्कैन से पेमेंट करना

यूजर इनमें से किसी एक को चुनकर ट्रांजैक्शन पूरा कर सकता है। यह प्रक्रिया उसी तरह काम करेगी जैसे आप अपने स्मार्टफोन को फिंगरप्रिंट सेंसर या फेस आईडी से अनलॉक करते हैं।

NPCI ने सुरक्षा को लेकर क्या कहा?

NPCI के अनुसार, हर ट्रांजैक्शन को यूजर का बैंक अपने स्तर पर वेरिफाई करता है। इसके लिए बैंक मजबूत क्रिप्टोग्राफिक चेक (Cryptographic Check) का इस्तेमाल करते हैं। उदाहरण के लिए — यदि आप अपने दोस्त को ₹500 भेज रहे हैं, तो बैंक यह सुनिश्चित करता है कि पैसा वास्तव में आपके खाते से जा रहा है। इसके लिए बैंक एक यूनिक सीक्रेट कोड (एन्क्रिप्शन) बनाता है, जिसे कोई तीसरा व्यक्ति, यहां तक कि हैकर भी पढ़ नहीं सकता। यह कोड सिर्फ बैंक के सर्वर पर डिक्रिप्ट होता है। इससे ट्रांजैक्शन की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है।

क्यों लाया गया बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन?

PIN आधारित सिस्टम में फ्रॉड और हैकिंग का खतरा रहता है। कई बार लोग अपना पिन दूसरों के साथ शेयर कर देते हैं या पिन चोरी हो जाता है। वहीं, बायोमेट्रिक सिस्टम में यह संभव नहीं है, क्योंकि किसी का फिंगरप्रिंट या फेस डेटा दूसरे व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। डिजिटल फाइनेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह बदलाव ग्रामीण और सेमी-अर्बन क्षेत्रों में डिजिटल पेमेंट की पहुंच बढ़ाने में बड़ा योगदान देगा। जहां लोगों के पास स्मार्टफोन तो हैं, लेकिन वे पिन मैनेज करने में असुविधा महसूस करते हैं, उनके लिए यह फीचर बहुत उपयोगी होगा।

किन ऐप्स में मिलेगा यह नया फीचर?

NPCI के अनुसार, यह फीचर सभी प्रमुख UPI-सक्षम एप्स में जोड़ा जाएगा। शुरुआती चरण में Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM UPI और Amazon Pay जैसे बड़े प्लेटफॉर्म इसे अपनाएंगे। इसके बाद धीरे-धीरे अन्य छोटे डिजिटल पेमेंट एप्स में भी यह फीचर लागू किया जाएगा। बैंकों और ऐप डेवलपर्स को इसे अपने सिस्टम में इंटीग्रेट करने के लिए आवश्यक API अपडेट जारी कर दिए गए हैं।

UPI बायोमेट्रिक सिस्टम से क्या फायदे होंगे?

  1. तेज और आसान पेमेंट प्रक्रिया: PIN डालने की जरूरत खत्म होने से ट्रांजैक्शन तुरंत हो सकेगा।

  2. अधिक सुरक्षा: फिंगरप्रिंट और फेस आईडी डेटा को कॉपी या शेयर नहीं किया जा सकता, जिससे धोखाधड़ी की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।

  3. ग्रामीण उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधा: जो लोग PIN याद नहीं रख पाते या टाइप नहीं कर पाते, उनके लिए यह सबसे उपयोगी फीचर होगा।

  4. डिजिटल इंडिया मिशन को बल: यह फीचर सरकार के “कैशलेस इकॉनमी” और “डिजिटल इंडिया” विज़न को और गति देगा।

क्या डेटा प्राइवेसी पर असर पड़ेगा?

NPCI का कहना है कि यूजर्स के बायोमेट्रिक डेटा को सुरक्षित रूप से स्टोर किया जाएगा, और इसे किसी थर्ड पार्टी के साथ साझा नहीं किया जाएगा। डेटा एन्क्रिप्टेड फॉर्म में रहेगा और केवल ट्रांजैक्शन वेरिफिकेशन के दौरान अस्थायी रूप से उपयोग किया जाएगा। साथ ही, सभी बैंक और पेमेंट ऐप्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि बायोमेट्रिक डेटा की प्रोसेसिंग भारत के डेटा प्रोटेक्शन कानूनों के तहत हो।
UPI बायोमेट्रिक फीचर भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल लेनदेन की सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि पेमेंट प्रोसेस और भी आसान और तेज हो जाएगी। अब ग्राहकों को PIN याद रखने या कार्ड साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। वे सिर्फ अपने फिंगरप्रिंट या फेस आईडी से भुगतान कर सकेंगे। आने वाले महीनों में जैसे-जैसे यह फीचर सभी UPI एप्स पर लागू होगा, भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम और अधिक उन्नत और सुरक्षित बन जाएगा।

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