केंद्रीय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर देशभर में जारी बहस और विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की पहली और स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है। मंगलवार को राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के छोटी खाटू कस्बे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। धर्मेंद्र प्रधान ने साफ शब्दों में कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किसी भी प्रकार का उत्पीड़न या भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और न ही डिस्क्रिमिनेशन के नाम पर किसी तरह के दुरुपयोग को स्वीकार किया जाएगा।
संविधान की सीमा में रहकर ही होंगे सभी निर्णय
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि चाहे UGC हो, भारत सरकार हो या फिर राज्य सरकारें—सभी को संविधान की परिधि में रहकर ही कार्य करना होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को यह अधिकार नहीं है कि वह भेदभाव के नाम पर अपनी मनमानी करे। शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य समानता, समावेशन और अवसरों की समान उपलब्धता सुनिश्चित करना है। धर्मेंद्र प्रधान ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षा संस्थानों में किसी भी विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी के साथ अन्याय या अत्याचार की घटनाएं सामने आती हैं, तो सरकार उन्हें गंभीरता से लेगी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे व्यक्ति के सर्वांगीण विकास से जोड़ना चाहती है।
नई शिक्षा नीति को लेकर केंद्र सरकार का दृष्टिकोण
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति (NEP) की विशेषताओं पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य देशभर में शिक्षा के स्तर को बेहतर बनाना, छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान से जोड़ना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने कहा कि NEP के तहत शिक्षा को अधिक लचीला, समावेशी और कौशल आधारित बनाया गया है, ताकि छात्र अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार आगे बढ़ सकें। केंद्र सरकार लगातार राज्यों के साथ समन्वय बनाकर इस नीति को जमीनी स्तर पर लागू करने का प्रयास कर रही है।
मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं पर जोर
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने मातृभाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में मिलने से बच्चों की समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होती है। उन्होंने विशेष रूप से राजस्थान का उल्लेख करते हुए कहा कि आने वाले समय में राज्य के राजकीय विद्यालयों में राजस्थानी भाषा का अध्ययन शुरू किया जाना चाहिए। इस संबंध में उन्होंने राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को शिक्षा से जोड़ने से न केवल सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी, बल्कि छात्रों में आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
तकनीक आधारित शिक्षा पर फोकस
धर्मेंद्र प्रधान ने तकनीक आधारित शिक्षा को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि डिजिटल संसाधनों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज का युग तकनीक का युग है और यदि युवा डिजिटल रूप से सक्षम होंगे, तो वे अधिक हुनरमंद बनेंगे और भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर हासिल कर सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म और स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत कर रही है।
छोटी खाटू में नए स्कूल भवन का शिलान्यास
इस अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने डीडवाना-कुचामन जिले के छोटी खाटू कस्बे में लगभग 4.50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन का शिलान्यास किया। यह विद्यालय क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
कार्यक्रम में मौजूद राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घोषणा की कि इस विद्यालय का नाम जैन धर्मगुरु आचार्य महाश्रमण के नाम पर रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि यह विद्यालय अपने आप में एक मॉडल स्कूल होगा, जो कई मामलों में निजी विद्यालयों से भी बेहतर सुविधाएं प्रदान करेगा।
राज्य सरकार और समाज का संयुक्त सहयोग
मदन दिलावर ने जानकारी दी कि विद्यालय निर्माण के लिए सरकार की ओर से लगभग 4.50 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इसके साथ ही छोटी खाटू के जैन समाज की ओर से भी 50 लाख रुपये का सहयोग दिया जाएगा। उन्होंने इसे सरकार और समाज के बीच सकारात्मक सहयोग का उदाहरण बताया।
दो वर्षों में पाठ्यक्रम में शामिल होगी राजस्थानी भाषा
राजस्थान के शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि आने वाले दो वर्षों के भीतर प्रदेश के विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए सिलेबस तैयार कर लिया गया है और जल्द ही इसे लागू करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
UGC विवाद के बीच बयान के मायने
UGC के नए नियमों को लेकर जारी विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान का यह बयान राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों दृष्टि से अहम माना जा रहा है। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार शिक्षा व्यवस्था में संतुलन, संवैधानिक मूल्यों और समावेशिता को प्राथमिकता देने के पक्ष में है।


