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UDH मंत्री ने अजमेर दरगाह विवाद पर वैज्ञानिक जांच की मांग की

UDH मंत्री ने अजमेर दरगाह विवाद पर वैज्ञानिक जांच की मांग की

मनीषा शर्मा,अजमेर।  अजमेर दरगाह, जिसे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पवित्र दरगाह के रूप में जाना जाता है, इन दिनों विवादों के केंद्र में है। महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार द्वारा किए गए इस दावे के बाद UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा के बयान  ने देशभर में सियासी और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया  है।

UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा का बयान

राजस्थान के शहरी विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने इस मामले पर कहा कि देश में ऐतिहासिक रूप से तलवार की नोक पर धर्मांतरण हुआ है और कई हिंदू धार्मिक स्थलों को तोड़कर दूसरे धर्मों के स्थल बनाए गए हैं। उन्होंने मांग की कि अजमेर दरगाह मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि ऐतिहासिक अन्याय और अत्याचार हुए हैं, और अब समय आ गया है कि इन मामलों को सुलझाया जाए।

सालेह मोहम्मद की प्रतिक्रिया

पूर्व कैबिनेट मंत्री सालेह मोहम्मद, जो खुद ख्वाजा गरीब नवाज दरगाह से गहरे जुड़े हुए हैं, ने इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने इसे “झूठे दावे” और “सियासी चाल” करार दिया। उन्होंने कहा कि दरगाह करीब 800 साल पुरानी है और यह गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि निचली अदालतों को इस तरह के मामलों पर विचार करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

राजवर्धन सिंह परमार का दावा और याचिका

महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने दावा किया है कि अजमेर दरगाह एक पवित्र हिंदू मंदिर है। उन्होंने इस मामले में कोर्ट में याचिका दायर करने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अजमेर पहुंचने से रोक दिया। परमार ने कहा कि उनकी याचिका राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास पहले से विचाराधीन है, और इस पर एक कमेटी का गठन भी हो चुका है। उनके दावे के अनुसार, दरगाह के अंदर और आसपास हिंदू प्रतीकों, जैसे स्वास्तिक और अन्य धार्मिक चिह्न, के सबूत मौजूद हैं।

पूर्व में दिए गए दावे
यह पहली बार नहीं है जब परमार ने इस तरह का दावा किया है। तीन साल पहले भी उन्होंने कहा था कि अजमेर दरगाह की दीवारों और खिड़कियों पर हिंदू धार्मिक प्रतीक पाए गए हैं। उन्होंने तब भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से इस मामले की जांच की मांग की थी।

सामाजिक और धार्मिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं

  1. गरीब नवाज वेलफेयर एसोसिएशन
    इस संगठन ने अजमेर एसपी और कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें मांग की गई कि दरगाह के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जाए। उनका कहना है कि कुछ असामाजिक तत्व दरगाह को निशाना बनाकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
  2. रजा अकादमी
    रजा अकादमी के सेक्रेटरी मोहम्मद सैयद नूरी ने इस दावे को खारिज करते हुए प्रशासन से मांग की कि 1991 के धार्मिक स्थल अधिनियम को सख्ती से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम सांप्रदायिक तनाव को रोकने में सहायक होगा।
  3. जमाते इस्लामी हिंद
    जमाते इस्लामी हिंद के अध्यक्ष नाजीमुद्दीन ने आरोप लगाया कि देश में धार्मिक स्थलों को लेकर चल रहे विवाद समाज को बांटने की साजिश है। उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों के सर्वे के नाम पर माहौल खराब किया जा रहा है।

1991 का धार्मिक स्थल अधिनियम और कानूनी पहलू

1991 में लागू किए गए धार्मिक स्थल अधिनियम के अनुसार, किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप में परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धार्मिक स्थलों के मुद्दे को लेकर सांप्रदायिक तनाव न बढ़े। रजा अकादमी और अन्य संगठनों ने मांग की है कि अजमेर दरगाह पर किए गए दावे को खारिज किया जाए क्योंकि यह कानून के खिलाफ है।

अजमेर दरगाह के महत्व पर एजाज खान का बयान

बिग बॉस फेम एजाज खान ने अजमेर दरगाह पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि दरगाह गरीब नवाज की है, जो सब धर्मों के लोगों के लिए पवित्र स्थान है। उन्होंने याचिका दायर करने वाले संगठनों को चेतावनी देते हुए कहा कि “गरीब नवाज से उलझने” का परिणाम अच्छा नहीं होगा।

 

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