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‘उदयपुर फाइल्स’ रिलीज: कन्हैयालाल हत्याकांड की सच्ची कहानी

‘उदयपुर फाइल्स’ रिलीज: कन्हैयालाल हत्याकांड की सच्ची कहानी

शोभना शर्मा । राजस्थान के उदयपुर में 2022 में हुए कन्हैयालाल टेलर हत्याकांड पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘उदयपुर फाइल्स’ आज (शुक्रवार) 8 अगस्त को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फिल्म का निर्देशन निर्माता अमित जानी ने किया है। यह फिल्म लंबे समय से चर्चा में थी, लेकिन इसके रिलीज होने में कई अड़चनें आईं। हाल ही में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने फिल्म को रिलीज करने की अनुमति दी, जिसके बाद राजस्थान में इसे लेकर सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई है।

कन्हैयालाल के बेटों ने देखी फिल्म

उदयपुर में फिल्म की स्क्रीनिंग के मौके पर सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए गए। पुलिस और प्रशासन ने शहर के सिनेमाघरों के आसपास अतिरिक्त बल तैनात किया। इस बीच, कन्हैयालाल के दोनों बेटे अपने पिता की तस्वीर लेकर थिएटर पहुंचे और फिल्म देखी। थिएटर के भीतर एक खाली सीट पर कन्हैयालाल की तस्वीर रखी गई, जिस पर बेटों ने माल्यार्पण किया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भावुक कर गया।

कन्हैयालाल के बड़े बेटे यश साहू ने फिल्म रिलीज से एक दिन पहले कहा था, “इस फिल्म में हमारे परिवार का दर्द दिखाया गया है कि कैसे मेरे पिता की हत्या हुई। पूरे देश को यह कहानी देखनी चाहिए। हम जो लड़ाई लड़ रहे थे, वह हमने जीत ली है। यह फिल्म आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई दिखाती है, यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है।”

न्याय की प्रतीक्षा

यश साहू ने न्याय मिलने में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि उनके पिता का मामला आज भी वहीं खड़ा है, जहां तीन साल पहले था। हत्या के दोषियों को अब तक सजा नहीं मिली है। यश के अनुसार, “हमें नहीं पता कि न्याय मिलने में और कितना समय लगेगा।” इस बयान ने एक बार फिर से इस केस में न्यायिक प्रक्रिया की धीमी रफ्तार को उजागर किया।

फिल्म की कहानी और निर्माण

‘उदयपुर फाइल्स’ साल 2022 में हुए उस दर्दनाक हत्याकांड पर आधारित है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। उस समय कन्हैयालाल, जो पेशे से दर्जी थे, ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की थी। इसके बाद उन्हें उनकी ही दुकान में बेरहमी से मार दिया गया। यह घटना देशभर में न केवल आक्रोश का कारण बनी, बल्कि धार्मिक कट्टरता और हिंसा पर भी गहन बहस छेड़ गई।

फिल्म में मुख्य भूमिका अभिनेता विजय राज निभा रहे हैं। कहानी को वास्तविक घटनाओं के करीब रखने के लिए इसे 55 कट्स के साथ रिलीज की अनुमति दी गई। निर्देशक अमित जानी ने फिल्म को इस तरह से बनाया है कि दर्शक न केवल घटना के पीछे के हालात को समझ सकें, बल्कि पीड़ित परिवार के दर्द और संघर्ष को भी महसूस कर सकें।

रिलीज में आई मुश्किलें

फिल्म की रिलीज को लेकर पिछले कुछ महीनों से कई विवाद और रुकावटें सामने आईं। कुछ संगठनों ने आशंका जताई थी कि यह फिल्म धार्मिक भावनाओं को भड़का सकती है, जबकि निर्माता का कहना था कि फिल्म का उद्देश्य केवल सच्चाई को सामने लाना है। लंबी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद आखिरकार फिल्म को मंजूरी मिल गई।

राज्य में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम

फिल्म की संवेदनशीलता को देखते हुए राजस्थान पुलिस ने उदयपुर सहित कई जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी है। सिनेमाघरों के आसपास पुलिस बल की तैनाती के साथ CCTV मॉनिटरिंग भी की जा रही है। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए कड़ी निगरानी का आदेश दिया है।

संदेश और प्रभाव

‘उदयपुर फाइल्स’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक सामाजिक दस्तावेज़ के रूप में सामने आई है, जो आतंकवाद और कट्टरता के खतरों पर ध्यान केंद्रित करती है। फिल्म का संदेश स्पष्ट है—आतंकवाद के खिलाफ समाज को एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। निर्माता और निर्देशक का मानना है कि सिनेमा लोगों तक सच्चाई पहुंचाने का एक सशक्त माध्यम है और यह फिल्म भी उसी दिशा में एक कदम है।

इस फिल्म की रिलीज ने न केवल उदयपुर के लोगों को, बल्कि पूरे देश को एक बार फिर उस दर्दनाक घटना की याद दिला दी है। कन्हैयालाल का परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है और उनकी यह उम्मीद है कि देश के लोग इस कहानी से सबक लेंगे और नफरत फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होंगे।

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