शोभना शर्मा, अजमेर। दरगाह क्षेत्र में हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक भिखारी ‘आईफोन 16 प्रो मैक्स’ हाथ में लिए नजर आया। वीडियो में भिखारी ने बताया कि उसने यह फोन भीख मांगकर खरीदा है, जिसकी कीमत उसने ₹1,70,000 बताई। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी, लेकिन जब इस वायरल वीडियो की सच्चाई सामने आई, तो लोग हैरान रह गए।
वायरल वीडियो ने खींचा ध्यान
वीडियो में दिखाया गया कि दरगाह क्षेत्र में बैठा एक भिखारी हाथ में महंगा आईफोन 16 प्रो मैक्स लेकर बात कर रहा है। जब उससे पूछा गया कि इतना महंगा फोन उसके पास कहां से आया, तो उसने कहा कि उसने यह फोन भीख मांगकर खरीदा है। भिखारी ने बताया कि फोन की कीमत ₹1,70,000 है और उसने नकद भुगतान करके इसे खरीदा। यह बात सुनकर वीडियो बनाने वाले युवक ने इसे रिकॉर्ड किया और सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।
सच्चाई आई सामने
जब इस वायरल वीडियो की सच्चाई जानने के लिए जांच की गई, तो खुलासा हुआ कि यह वीडियो केवल मनोरंजन के लिए बनाया गया था। अजमेर के दरगाह क्षेत्र में जब पड़ताल की गई, तो यह पता चला कि भिखारी को असल में वह फोन वीडियो बनाने वाले युवक ने ही दिया था। युवक ने भिखारी के साथ मजाक करते हुए यह वीडियो शूट किया और इसे मजेदार रील के तौर पर सोशल मीडिया पर डाल दिया।
फेक वीडियो बना चर्चा का विषय
वीडियो वायरल होने के बाद लोग बिना सच्चाई जाने इसे धड़ाधड़ शेयर करने लगे। कई लोगों ने इसे अजमेर की गरीबी और भिखारियों की नई पहचान से जोड़ा, तो कुछ ने इसे सामाजिक विडंबना बताया। हालांकि, यह वीडियो फेक था और केवल मनोरंजन के लिए बनाया गया था।
सोशल मीडिया का प्रभाव
सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने की रफ्तार ने दिखा दिया कि कैसे फेक वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन सकता है। वीडियो देखने वाले कई यूजर्स ने इसे बिना सच्चाई जांचे अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर शेयर कर दिया। इसके चलते वीडियो तेजी से वायरल हो गया और अजमेर के ‘आईफोन वाले भिखारी’ की कहानी हर किसी की जुबान पर चढ़ गई। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि सोशल मीडिया पर हर जानकारी को तुरंत सच मान लेना सही नहीं है। बिना तथ्य और सच्चाई जांचे किसी भी सामग्री को शेयर करना गलतफहमियां पैदा कर सकता है।


