मनीषा शर्मा। राजस्थान पुलिस अकादमी (आरपीए) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे ट्रेनी सब-इंस्पेक्टर (एसआई) आज बड़ी संख्या में मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के आवास पर पहुंचे। इस मुलाकात का उद्देश्य अपने ऊपर लगे गलत आरोपों से मंत्री किरोड़ी मीणा से न्याय की मांग करना था। ट्रेनी एसआई ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने ईमानदारी से एसआई भर्ती परीक्षा 2021 पास की है, लेकिन भर्ती परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के कारण उन्हें शक की निगाहों से देखा जा रहा है।
उन्होंने मंत्री किरोड़ीलाल मीणा से निवेदन किया कि वही उनके सम्मान और इज्जत की रक्षा कर सकते हैं। ट्रेनी एसआई का कहना है कि भर्ती परीक्षा की रद्द होने की संभावना ने उन्हें चिंता में डाल दिया है और उनके परिवारवालों पर इसका गहरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा, “हमें एडीजी वीके सिंह ने भरोसा दिलाया था कि अगर हमने कुछ गलत नहीं किया है, तो डरने की जरूरत नहीं। लेकिन अब परीक्षा रद्द होने की बात से हमारी नींद उड़ी हुई है।”
किरोड़ी मीणा के समर्थन की उम्मीद में पहुंचे ट्रेनी एसआई:
राजस्थान पुलिस में भर्ती हुए कई ट्रेनी एसआई ने किरोड़ी मीणा से न्याय की उम्मीद जताई और कहा कि उनकी ईमानदारी पर संदेह किया जा रहा है। मंत्री किरोड़ी मीणा ने ट्रेनी एसआई से बात करते हुए कहा, “आप लोग मुझे कमेटी में शामिल करा दो, मैं अकेला ही फैसला करा दूंगा।” इस पर ट्रेनी एसआई ने कहा कि उनके लिए किरोड़ी मीणा का समर्थन सरकार के बयान से भी ऊपर है।
मंत्री मीणा से न्याय की अपील
ट्रेनी एसआई ने कहा कि वे नहीं जानते कि स्थिति कैसे सुधरेगी, लेकिन मंत्री किरोड़ी मीणा से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमने कोई गलत काम नहीं किया। हम पूरी तरह से ईमानदार रहे हैं।” किरोड़ी मीणा ने जवाब दिया कि यह सब उन्हें पहले बताना चाहिए था, लेकिन अब भी वे इस मुद्दे को सरकार के सामने उठाएंगे। मंत्री मीणा ने कहा, “मैं हमेशा ईमानदार और मेहनती लोगों के साथ हूं। मेरी लड़ाई भ्रष्टाचार और पेपर माफिया के खिलाफ है।”
ट्रेनी एसआई की व्यक्तिगत समस्याएं और भावनात्मक संघर्ष
मुलाकात के दौरान कई ट्रेनी एसआई ने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं और इस घोटाले के कारण हो रही मानसिक परेशानी के बारे में बताया। रेनवाल के एक ट्रेनी एसआई ने बताया कि उसकी पांच साल की बेटी है। उन्होंने उससे वादा किया था कि अगर वह थानेदार बनेंगे तो उसे एक अच्छी साइकिल दिलाएंगे। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों के चलते वह पिछले तीन महीने से घर नहीं जा पाए हैं।
एक अन्य ट्रेनी एसआई ने अपनी बात रखते हुए बताया कि उन्होंने इस नौकरी के लिए अपनी पूर्व स्टेशन मास्टर की नौकरी छोड़ दी थी। इसी तरह, एक महिला ट्रेनी एसआई ने मंत्री मीणा को बताया कि उसके पिता पिछले आठ वर्षों से बीमार हैं और उसकी मां ने मजदूरी करके उसे पढ़ाया है। महिला ट्रेनी एसआई के मुताबिक, उसकी नौकरी लगने से परिवार को उम्मीद थी कि वह अब अपनी तीन छोटी बहनों को पढ़ा पाएगी, लेकिन मौजूदा स्थिति ने उसके इस सपने को कठिनाइयों में डाल दिया है।
एसआई भर्ती परीक्षा में घोटाले और पेपर लीक का विवाद
राजस्थान में एसआई भर्ती परीक्षा-2021 में पेपर लीक और धांधली के कारण कई उम्मीदवारों की गिरफ्तारी हुई है। अब तक स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) 50 से अधिक ट्रेनी एसआई और 30 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आरोपियों में कई उम्मीदवारों को अपने परीक्षा के पेपर लीक से पास कराना पड़ा था। वहीं, मंत्री किरोड़ी मीणा लगातार इस भर्ती को रद्द कराने की मांग कर रहे हैं, जिससे इस परीक्षा में ईमानदारी से पास हुए उम्मीदवारों में भय व्याप्त हो गया है।
एसआईटी ने पेपर लीक और डमी कैंडिडेट के माध्यम से एसआई भर्ती परीक्षा में धांधली की पुष्टि की है। इस मामले में राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व सदस्य, रामूराम राईका, उनके बेटे और बेटी की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। रामूराम राईका ने अपने बच्चों के लिए परीक्षा से छह दिन पहले पेपर प्राप्त कर उन्हें पास कराने का प्रयास किया था। इस घोटाले में जुड़े कई आरोपियों को पकड़ने के बाद भी कई लोग अभी जांच के दायरे में हैं।
ट्रेनी एसआई की चिंता और मंत्री किरोड़ी मीणा का समर्थन
मंत्री किरोड़ी मीणा ने ट्रेनी एसआई को आश्वासन दिया कि वे उनकी बात सरकार के सामने रखेंगे और न्याय की उम्मीद दिलाई। मीणा ने कहा कि उनकी लड़ाई हमेशा भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ रही है और वे ऐसे ईमानदार और मेहनती युवाओं का समर्थन करते रहेंगे। उन्होंने ट्रेनी एसआई को भरोसा दिलाया कि वह भ्रष्टाचार और पेपर माफिया के खिलाफ लड़ाई में उनके साथ हैं।
परिवार और समाज में सम्मान का सवाल
ताज्जुब की बात है कि ईमानदार ट्रेनी एसआई जो पूरी मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा में पास हुए हैं, उन्हें अब समाज और अपने परिवार में सम्मान बनाए रखने की चिंता सता रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार इस मामले को गलत तरीके से तूल दिया जा रहा है, वह उनके आत्म-सम्मान और परिवार के सम्मान को ठेस पहुंचा रहा है। समाज में उनके ईमानदार कार्यों पर संदेह किया जा रहा है।


