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रणथम्भौर में फर्जी बुकिंग से किया जा रहा पर्यटकों को गुमराह

रणथम्भौर में फर्जी बुकिंग से किया जा रहा पर्यटकों को गुमराह

शोभना शर्मा। राजस्थान का रणथम्भौर टाइगर रिजर्व देश और दुनिया में वन्यजीव प्रेमियों के बीच अपनी खास पहचान रखता है। यहां बाघों और अन्य दुर्लभ वन्यजीवों को नजदीक से देखने के लिए हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। लेकिन इसी लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए कुछ ट्रेवल एजेंट्स बुकिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। हाल ही में एक मामला सामने आया है जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

नकली टिकट से गुमराह हुए पर्यटक

दरअसल, रणथम्भौर में एक ट्रेवल एजेंट ने शनिवार को चार पर्यटकों की बुकिंग एडवांस राशि लेकर की थी। टिकट भी एजेंट ने जारी किया, जिस पर रणथम्भौर टाइगर रिजर्व का लेटर हैड, सफारी का समय, पर्यटकों के नाम और ड्राइवर का नंबर अंकित था। लेकिन सफारी से महज चार घंटे पहले पर्यटकों को सूचना दी गई कि उनकी बुकिंग कैंसिल हो गई है। इससे न सिर्फ उनका ट्रिप खराब हुआ, बल्कि उन्हें मानसिक परेशानी भी झेलनी पड़ी।

महिला पर्यटक, जो अपने परिवार के साथ दूसरे शहर से रणथम्भौर आई थीं, ने बताया कि यह उनका बर्थडे ट्रिप था। वह पहले से होटल में ठहरी हुई थीं, लेकिन सफारी से कुछ घंटे पहले टिकट निरस्त होने की खबर से वे निराश हो गईं।

एजेंट ने काटा फोन

जब इस मामले को लेकर एजेंट से संपर्क किया गया, तो फोन उठाने वाले व्यक्ति ने खुद को प्रीतपाल बताया। उसने कहा कि टिकट कैंसिल हो गया था और एडवांस राशि रिफंड कर दी गई है। लेकिन जैसे ही और सवाल पूछे गए, उसने फोन काट दिया। इस रवैये से साफ जाहिर होता है कि पर्यटकों को जानबूझकर गुमराह किया गया।

नियमों के खिलाफ टिकट

फर्जी टिकट पर सफारी जोन नौ और दस दोनों अंकित थे। जबकि रणथम्भौर में सफारी के दौरान केवल एक ही जोन आवंटित करने का नियम है। इस गड़बड़ी ने एजेंट की धोखाधड़ी को और स्पष्ट कर दिया।

वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल

वन विभाग लंबे समय से दावा करता आया है कि सफारी बुकिंग की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन है। लेकिन इस मामले ने उन दावों की पोल खोल दी है। पर्यटक ऑफ सीजन में भी बुकिंग फर्जीवाड़े का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में विभाग की लापरवाही और ढिलाई साफ नजर आ रही है।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि वन विभाग की मिलीभगत के बिना इस तरह का फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। विभाग को चाहिए कि वह ऐसे मामलों की गहन जांच करे और दोषी एजेंटों पर सख्त कार्रवाई करे।

पर्यटन पर नकारात्मक असर

रणथम्भौर टाइगर रिजर्व राजस्थान पर्यटन की पहचान माना जाता है। यहां आने वाले विदेशी और देशी पर्यटक लाखों रुपये खर्च करके सफारी का आनंद लेते हैं। लेकिन इस तरह की घटनाओं से रणथम्भौर की छवि धूमिल हो रही है। एक ओर सरकार राजस्थान को पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह की धोखाधड़ी से पर्यटकों का भरोसा टूट रहा है।

महिला पर्यटक ने कहा कि इस घटना से उनकी यात्रा खराब हो गई। “हमने बुकिंग पर भरोसा किया, लेकिन आखिरी समय पर सफारी रद्द होने से बहुत निराशा हुई। भविष्य में हम किसी को रणथम्भौर आने की सलाह देने से पहले जरूर सोचेंगे।”

पारदर्शी व्यवस्था की मांग

इस घटना के बाद पर्यटक और स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि वन विभाग सफारी बुकिंग की प्रक्रिया में पूरी तरह पारदर्शिता लाए। केवल आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत एजेंटों के जरिए ही बुकिंग की अनुमति दी जाए। साथ ही नकली टिकट बनाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में पर्यटक ठगी का शिकार न हों।

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