शोभना शर्मा। राजस्थान में इस बार मानसून पूरे शबाब पर रहा। जहां एक ओर पूर्वी राजस्थान में बारिश ने किसानों के चेहरे खिला दिए, वहीं जाते-जाते यही बारिश अब ग्रामीणों और शहरी इलाकों के लिए परेशानी का सबब बन रही है। लगातार एक हफ्ते से हो रही तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई जगहों पर सड़कें और कॉलोनियों के नाले जाम हो चुके हैं, जबकि नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इन हालातों ने भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
भरतपुर में 20 गांवों का रास्ता टूटा
भरतपुर जिले में ब्रह्मबाद–रुदावल मार्ग पर स्थित कुकुंद नदी पर बनी पक्की पुलिया तेज बहाव में बह गई। यह पुलिया इन इलाकों को जोड़ने वाली प्रमुख संपर्क कड़ी थी, जिसके टूटने से करीब 20 गांवों का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया है। इससे गांवों में आवागमन ठप हो गया है और लोग दैनिक जरूरतों के सामान के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करने को मजबूर हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अचानक बने हालातों ने उनकी जिंदगी को कठिन बना दिया है। पहले जहां बाजार, अस्पताल और अन्य सेवाएं आसानी से उपलब्ध थीं, वहीं अब नजदीकी कस्बों तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
किन गांवों का संपर्क टूटा
यह पक्की पुलिया नाहरोली गांव के पास ब्रह्मबाद–रुदावल मार्ग पर स्थित थी। इसके टूटने से लगभग 20 गांवों का संपर्क टूट गया है। इनमें कोठी खेड़ा, चौखंडा, नगला कुर बारिया, सेवला, बिरहठा, अगावली, बाजौली, बांसरोली, रीछोली, पीपरी, सादपुरा, कुंदेर और बरौदा जैसे गांव प्रमुख हैं। इन गांवों के लोग अब आवागमन के लिए वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर हैं, लेकिन उन रास्तों की स्थिति भी बारिश से खराब हो चुकी है।
पुलिया पहले भी हुई थी कमजोर
ग्रामीणों ने बताया कि दो माह पूर्व जब मानसून की तेज बारिश हुई थी और बरेठा बांध से कुकुंद नदी में पानी छोड़ा गया था, तब यह पुलिया पानी के दबाव को सहन नहीं कर पाई थी। उस समय भी इसकी संरचना कमजोर हो गई थी। स्थानीय प्रशासन और विधायक को इस समस्या से अवगत कराया गया था। हालांकि उस वक्त मिट्टी डालकर अस्थायी रास्ता बनाया गया, लेकिन अब भारी बारिश और तेज बहाव के कारण वह भी बह गया है।
ग्रामीणों की मुश्किलें
इन हालातों ने ग्रामीणों को कठिन जीवन जीने पर मजबूर कर दिया है। दिहाड़ी मजदूरों, किसानों और विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। बाजार तक पहुंचने के लिए कई गांवों के लोगों को लंबा सफर तय करना पड़ रहा है। बीमार व्यक्तियों को अस्पताल ले जाना भी चुनौतीपूर्ण हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या लगातार बढ़ रही है और जल्द से जल्द पक्की पुलिया का पुनर्निर्माण किया जाना जरूरी है।
प्रशासन से मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से अपील की है कि कुकुंद नदी पर जल्द से जल्द मजबूत पुलिया का निर्माण कराया जाए। लोगों का कहना है कि यदि तत्काल कदम नहीं उठाए गए तो बारिश और बाढ़ जैसी आपदाओं के समय बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। ग्रामीणों ने कहा कि वे रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने और बच्चों की पढ़ाई को जारी रखने के लिए सुरक्षित रास्ते चाहते हैं।
सुरक्षा और राहत कार्य
जिला प्रशासन ने हालातों पर नजर रखी हुई है। सुरक्षा व्यवस्था और राहत कार्यों को लेकर समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाएंगे।