शोभना शर्मा। राजस्थान की लोक संस्कृति और परंपरा के रंगों से सराबोर थार महोत्सव इस बार और भी भव्य रूप में आयोजित होने जा रहा है। बाड़मेर जिले में आयोजित होने वाले इस महोत्सव की तैयारियां अपने चरम पर हैं। शहर के प्रमुख मार्गों, ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक स्थलों को रंग-बिरंगी रोशनी और पारंपरिक साज-सज्जा से सजाया जा रहा है।
जिला कलेक्टर टीना डाबी ने स्वयं शहरवासियों को आमंत्रित करते हुए पारंपरिक अंदाज में पीले चावल बांटे और कहा कि यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बाड़मेर की पहचान और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह उत्सव थार की संस्कृति, लोककला, लोकनृत्य, संगीत और पर्यटन को नई दिशा देने वाला साबित होगा।
8 अक्टूबर को शोभायात्रा से होगा शुभारंभ
कलेक्टर डाबी ने बताया कि थार महोत्सव 2025 का आगाज 8 अक्टूबर को गांधी चौक स्कूल से शोभायात्रा के रूप में होगा। यह यात्रा शहर के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए आदेश स्टेडियम पहुंचेगी। इस शोभायात्रा में लोक कलाकार, ऊंटों की टोलियां, ढोल-नगाड़ों की धुन और पारंपरिक परिधानों में सजे पुरुष और महिलाएं थार की संस्कृति का अद्भुत नजारा पेश करेंगे।
आदेश स्टेडियम में पूरे दिन और शाम को पारंपरिक और आधुनिक कार्यक्रमों का संगम देखने को मिलेगा। इनमें मिस्टर एंड मिस डेजर्ट प्रतियोगिता, थार सुंदरी चयन, तेज़ साफा बांधने की प्रतियोगिता, ऊंट सजावट प्रदर्शन, लोकनृत्य, और लोकगीत प्रस्तुतियां शामिल रहेंगी। कलेक्टर ने बताया कि यह आयोजन न केवल स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करेगा, बल्कि यह राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक भी बनेगा।
किराडू मंदिर परिसर में होगा विशेष आयोजन
थार महोत्सव के दूसरे दिन का आकर्षण ऐतिहासिक किराडू मंदिर परिसर होगा। यह परिसर बाड़मेर जिले की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। कलेक्टर टीना डाबी ने बताया कि यहां विशेष सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के कलाकार हिस्सा लेंगे।
इन प्रस्तुतियों में राजस्थान के मांगणियार, लंगा, कालबेलिया, घुमर और गवरी जैसे लोकनृत्य और लोकगीत शामिल होंगे। किराडू की प्राचीन स्थापत्य कला और मंदिर की भव्यता के बीच इन प्रस्तुतियों का आयोजन दर्शकों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव होगा।
महाबार की धोरों पर थार की शाम
महोत्सव के समापन से पहले महाबार की मखमली धोरों पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा। यहां स्थानीय लोक कलाकार अपनी कला का जादू बिखेरेंगे। सूर्यास्त के बाद रेगिस्तान की रेत पर ढोलक, सारंगी और खड़ताल की धुन गूंजेगी, और दर्शक थार की जीवंत परंपरा से रूबरू होंगे।
इस मौके पर “थार के रंग, थार के संग” की थीम पर विशेष प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही पारंपरिक भोजन और हस्तशिल्प स्टॉल भी लगाए जाएंगे, ताकि आने वाले पर्यटक राजस्थान के स्वाद और कला दोनों का आनंद ले सकें।
टीना डाबी ने बताया आयोजन का उद्देश्य
जिला कलेक्टर टीना डाबी ने कहा कि थार महोत्सव का मुख्य उद्देश्य बाड़मेर की लोक संस्कृति, कला और पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाना है। उन्होंने बताया कि इस आयोजन से स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और पर्यटन उद्योग को सीधा लाभ मिलेगा।
कलेक्टर ने कहा, “थार महोत्सव हमारे लिए केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि हमारी परंपरा, आत्मगौरव और एकता का प्रतीक है। मैं सभी नागरिकों से आग्रह करती हूं कि वे परिवार सहित भाग लें, ताकि थार की आत्मा हर दिल में बस सके।”
उन्होंने बताया कि इस वर्ष महोत्सव को ‘थार का गौरव – संस्कृति और समृद्धि’ थीम पर आयोजित किया जा रहा है, जिसके तहत जिले के ग्रामीण इलाकों की कला और शिल्पकला को विशेष स्थान दिया गया है।
शहर में तैयारियों का अंतिम दौर
बाड़मेर शहर, किराडू और महाबार क्षेत्र में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। गांधी चौक, आदेश स्टेडियम और प्रमुख मार्गों पर साज-सज्जा, मंच निर्माण और सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासनिक टीमें लगातार काम कर रही हैं। सांस्कृतिक विभाग, पर्यटन विभाग, पुलिस प्रशासन और नगर परिषद की संयुक्त टीमों द्वारा आयोजन की व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है। होटल, गेस्ट हाउस और रेस्ट हाउसों को भी महोत्सव के अनुरूप तैयार किया गया है, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।
पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों के अनुसार, थार महोत्सव न केवल बाड़मेर की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करेगा, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को भी गति देगा। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार अधिक संख्या में देशी और विदेशी पर्यटकों के आने की संभावना जताई जा रही है। राजस्थान पर्यटन विभाग ने भी इस आयोजन को राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक उत्सवों की सूची में शामिल किया है। उम्मीद है कि इस बार का थार महोत्सव बाड़मेर को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान दिलाएगा।


