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बाड़मेर में टीना डाबी ट्रोल, जनता से दूरी, नेताओं से नजदीकी पर उठे सवाल

बाड़मेर में टीना डाबी ट्रोल, जनता से दूरी, नेताओं से नजदीकी पर उठे सवाल

शोभना शर्मा।  मीडिया की सुर्खियों में अक्सर रहने वाली आईएएस अधिकारी टीना डाबी एक बार फिर चर्चाओं के केंद्र में हैं। हालांकि इस बार वजह कोई प्रशासनिक उपलब्धि या नवाचार नहीं, बल्कि उनका कथित अड़ियल और असंवेदनशील रवैया बताया जा रहा है। बाड़मेर की कलेक्टर के रूप में कार्यरत टीना डाबी इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी आलोचना का सामना कर रही हैं। स्थानीय लोगों, भाजपा कार्यकर्ताओं और कॉलेज छात्राओं से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने इस विवाद को और गहरा कर दिया है।

प्रभारी सचिव के सामने फूटा जन आक्रोश

तीन दिन पहले बाड़मेर के प्रभारी सचिव और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सुबीर कुमार जिले के दौरे पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने शहरी समस्या समाधान शिविर का निरीक्षण किया। शिविर में कई प्रशासनिक अधिकारी समय पर नहीं पहुंचे, जिस पर प्रभारी सचिव ने नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियों को फटकार लगाई। इसी शिविर में भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने खुले तौर पर प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए और शिकायतें दर्ज कराईं।

इन शिकायतों के दौरान टीना डाबी भी मौके पर मौजूद थीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब जनता और कार्यकर्ता प्रशासन की खामियों को गिना रहे थे, तब कलेक्टर टीना डाबी का हावभाव असहज और नाराजगी भरा नजर आया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद से ही सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई कि कलेक्टर जनता की आलोचना को स्वीकार करने के बजाय उससे असहज हो जाती हैं।

भाजपा कार्यकर्ता को धमकाने का आरोप, वीडियो वायरल

विवाद उस समय और बढ़ गया जब प्रभारी सचिव के लौटने के बाद कलेक्टर टीना डाबी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। आरोप है कि प्रभारी सचिव के सामने अधिकारियों की शिकायत करने वाले एक भाजपा कार्यकर्ता पर कलेक्टर नाराज हो गईं और उसे सार्वजनिक रूप से धमकाया। वायरल वीडियो में कथित तौर पर टीना डाबी यह कहते हुए सुनी जा रही हैं कि “अब बोल, बहुत शेर बन रहा था ना।”

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने इसे एक प्रशासनिक अधिकारी की मर्यादा के खिलाफ बताया, वहीं कुछ लोगों ने इसे जनता की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया। इसके बाद से टीना डाबी को लेकर “बाड़मेर में उल्टी गंगा बह रही है” जैसे तंज कसे जाने लगे।

नेताओं के सामने विनम्रता, जनता से सख्ती का आरोप

टीना डाबी पर यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि वे जनता के साथ सख्त और रूखा व्यवहार करती हैं, जबकि नेताओं और मंत्रियों के सामने उनका रवैया बेहद विनम्र और झुका हुआ रहता है। सोशल मीडिया पर उनके पुराने वीडियो साझा किए जा रहे हैं, जिनमें वे नेताओं के स्वागत में अत्यधिक विनम्रता दिखाती नजर आती हैं।

दो महीने पहले बाड़मेर में आयोजित मरु महोत्सव के दौरान मंत्री केके विश्नोई के साथ टीना डाबी का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में वे मंत्री का स्वागत करते हुए सौम्य और सम्मानजनक व्यवहार करती दिखती हैं। इसी वीडियो को शेयर करते हुए यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जनता से बात करते समय ऐसा व्यवहार क्यों नहीं दिखता।

इसी तरह भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनियां के बाड़मेर दौरे का एक पुराना वीडियो भी फिर से वायरल हो गया है। आरोप है कि इस दौरान टीना डाबी ने महज सात सेकंड में पांच बार सिर झुकाया और आठ बार हाथ जोड़कर नमस्ते की, जबकि नेता मोबाइल में व्यस्त थे और कलेक्टर की ओर देख भी नहीं रहे थे। इस वीडियो को लेकर भी सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणियां की जा रही हैं।

छात्राओं का विरोध, “रोल मॉडल नहीं, रील मैडम”

विवाद का एक और बड़ा कारण बाड़मेर के सरकारी कॉलेज की छात्राओं का विरोध प्रदर्शन बना। दो दिन पहले कॉलेज के बाहर छात्राओं ने फीस बढ़ोतरी वापस लेने की मांग को लेकर धरना दिया। आरोप है कि प्रशासन ने उनकी बात सुनने में गंभीरता नहीं दिखाई। मौके पर एडीएम और एसडीएम पहुंचे और समझाइश करने की कोशिश की।

इसी दौरान एसडीएम ने छात्राओं से कहा कि कलेक्टर टीना डाबी युवाओं की रोल मॉडल हैं। इस बयान पर छात्राएं भड़क गईं और उन्होंने कलेक्टर को रोल मॉडल मानने से इनकार करते हुए “रील मैडम” कह दिया। छात्राओं ने सवाल उठाया कि जब वे अपनी समस्या लेकर धरने पर बैठी हैं, तो कलेक्टर खुद मौके पर आकर उनसे बात क्यों नहीं कर रहीं।

सोशल मीडिया ट्रोलिंग और प्रशासन की छवि पर असर

इन तमाम घटनाओं के बाद टीना डाबी सोशल मीडिया पर लगातार ट्रोल हो रही हैं। उन पर जनता से दूरी बनाने, आलोचना बर्दाश्त न करने और सत्ता व नेताओं के प्रति जरूरत से ज्यादा झुकाव रखने के आरोप लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग यहां तक कह रहे हैं कि एक आईएएस अधिकारी को जनता के प्रति जवाबदेह और संवेदनशील होना चाहिए, न कि केवल प्रशासनिक शक्ति का प्रदर्शन करना चाहिए।

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