राजस्थान के भिवाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस हादसे में अब तक आठ लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
टीकाराम जूली ने कहा कि यह घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है, जिसने सरकार के सुशासन और मजबूत कानून व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है। उनका आरोप है कि समय पर सूचना और राहत कार्य नहीं पहुंचने के कारण हताहतों की संख्या बढ़ी। उन्होंने कहा कि अगर शुरुआती स्तर पर बेहतर समन्वय और मॉनिटरिंग होती, तो नुकसान को कम किया जा सकता था।
कानून व्यवस्था और मॉनिटरिंग पर सवाल
जूली ने सरकार की कानून व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि लगातार हो रहे औद्योगिक हादसे यह संकेत देते हैं कि कहीं न कहीं व्यवस्था में बड़ी चूक हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों की भूमिका स्पष्ट नहीं है।
उनका कहना था कि भिवाड़ी प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जहां से सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में वहां सुरक्षा मानकों, नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग की व्यवस्था सख्त होनी चाहिए थी। यदि किसी औद्योगिक इकाई में विस्फोटक या ज्वलनशील सामग्री का भंडारण किया जा रहा था, तो उसकी अनुमति किन विभागों ने दी और क्या समय-समय पर उसकी जांच की गई, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
अनुमति प्रक्रिया और जिम्मेदारी तय करने की मांग
टीकाराम जूली ने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि संबंधित फैक्ट्री या इकाई को संचालन की अनुमति किन शर्तों पर दी गई थी। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या फायर सेफ्टी मानकों की नियमित जांच की जाती थी और यदि हां, तो उसकी रिपोर्ट क्या कहती है। उनके अनुसार, यदि निगरानी और अनुमति प्रक्रिया पारदर्शी और सख्त होती, तो इस तरह की त्रासदी से बचा जा सकता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के समय में प्रदेश में लगातार हादसे हो रहे हैं और लोग अपनी जान गंवा रहे हैं, लेकिन सरकार अन्य कार्यक्रमों और आयोजनों में व्यस्त नजर आती है। जूली ने इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि केवल औपचारिक जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
घटना के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज करने का दावा किया है और घायलों का उपचार जारी है। वहीं सरकार की ओर से भी जांच के आदेश दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि विपक्ष का कहना है कि केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि ठोस सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


