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टीकाराम जूली बोले राज्य में स्कूल हादसों की जिम्मेदार सरकार

टीकाराम जूली बोले राज्य में स्कूल हादसों की जिम्मेदार सरकार

मनीषा शर्मा। राजस्थान में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हुए दो दर्दनाक हादसों ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति और बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उदयपुर और बूंदी जिलों में घटित इन घटनाओं में एक मासूम बच्ची की मौत हो गई और कई बच्चे घायल हो गए। इन हादसों को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि बच्चों की सुरक्षा पर लापरवाही किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

टीकाराम जूली ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की और सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचना की हालत बेहद खराब है और प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “बच्चों की सुरक्षा जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी पर भी सरकार का ध्यान न होना अत्यंत शर्मनाक है।”

नेता प्रतिपक्ष ने उदयपुर के हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि निर्माणाधीन सरकारी स्कूल भवन का छज्जा गिरना सिर्फ तकनीकी या निर्माण संबंधी गलती नहीं, बल्कि लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है। इस हादसे में एक मासूम बच्ची की मौत हो गई, जबकि दूसरी गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में इलाज जारी है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।

इसके अलावा, उन्होंने बूंदी के स्कूल हादसे का उल्लेख किया, जहां कक्षा के अंदर फॉल्स सीलिंग गिरने से पांच बच्चे घायल हो गए। यह घटना भी शिक्षा विभाग की अनदेखी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है। घायल बच्चों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया और उनका इलाज जारी है।

टीकाराम जूली ने कहा कि इन घटनाओं से साफ है कि सरकार के स्तर पर स्कूल भवनों की नियमित जांच और मरम्मत का कोई ठोस तंत्र नहीं है। उन्होंने मांग की कि प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों की संरचना का आपात निरीक्षण कराया जाए और जहां भी खतरे की संभावना है, वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

उदयपुर की घटना में मृत बच्ची के परिवार को नेता प्रतिपक्ष ने गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और कहा कि सरकार को पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठाती, तो विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक जोर-शोर से उठाएगा।

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