मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने राज्य के ऐतिहासिक स्मारकों, संग्रहालयों और प्रमुख पर्यटन स्थलों के प्रवेश शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार, नई दरें 1 जनवरी 2026 से पूरे राज्य में लागू हो जाएंगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2015 के बाद यह पहली बार है जब टिकट दरों में इतनी व्यापक बढ़ोतरी की गई है। यह प्रस्ताव पिछले तीन महीनों से समीक्षा में था और अब इसे अंतिम स्वीकृति मिल चुकी है। आदेश राजस्थान गजट में प्रकाशित हो चुके हैं, जिससे नई टिकट व्यवस्था आधिकारिक रूप से लागू मानी जा रही है।
सरकार का तर्क है कि बढ़ी हुई राशि से न सिर्फ स्मारकों के संरक्षण और रखरखाव को मजबूती मिलेगी, बल्कि पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं तैयार करने में भी मदद होगी। हालांकि, स्थानीय पर्यटकों, गाइड्स और टूर ऑपरेटरों के बीच इस बढ़ोतरी को लेकर बहस शुरू हो गई है। कई लोग मानते हैं कि अचानक बढ़ी टिकट दरें सामान्य परिवारों और विद्यार्थियों के लिए बोझ साबित हो सकती हैं, जबकि कुछ विशेषज्ञ इसे विश्वस्तरीय पर्यटन सुविधाओं के लिए आवश्यक कदम मान रहे हैं।
नई दरों के अनुसार, अल्बर्ट हॉल संग्रहालय, हवा महल, जंतर-मंतर और नाहरगढ़ किले जैसे प्रमुख स्मारकों पर भारतीय पर्यटकों के लिए टिकट 100 रुपए और विदेशी पर्यटकों के लिए 600 रुपए तय की गई है। पहले की तुलना में यह वृद्धि लगभग दोगुनी मानी जा रही है। विभाग का कहना है कि इन स्थलों की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है, ऐसे में संरक्षण के साथ-साथ प्रस्तुतीकरण को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान देना होगा।
जयपुर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल आमेर किला की नई दरें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। पहले यहां भारतीय पर्यटक 100 रुपए में प्रवेश कर सकते थे, जबकि विदेशी पर्यटकों के लिए यह शुल्क 300 रुपए था। नई व्यवस्था के तहत अब भारतीय पर्यटक को 200 रुपए और विदेशी पर्यटक को 1000 रुपए का भुगतान करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव खासकर विदेशी पर्यटकों से मिलने वाले राजस्व को काफी बढ़ा देगा, जबकि स्थानीय पर्यटकों पर मध्यम स्तर का असर पड़ेगा।
पुरातत्व विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विभागाधीन 10 संरक्षित स्मारकों और 2 कला दीर्घाओं में भी संशोधित दरें लागू की जा रही हैं। इन स्थलों में तोपखाना (जालोर), बाला किला (अलवर), गुम्बद फतेहजंग (अलवर), मूसी महारानी की छतरी (अलवर), अमर सिंह की छतरी (नागौर), किशोरी महल (भरतपुर), किला डीग (भरतपुर), सुनहरी कोठी (टोंक), किला ग्राम फतेहगढ़ (अजमेर), किला सरवाड (अजमेर), कला दीर्घा चंद्रावती (सिरोही) और विराटनगर की कला दीर्घा शामिल हैं। इन स्थानों पर नवाचार करते हुए नई संयुक्त प्रवेश व्यवस्था लागू की जा रही है, ताकि एक ही जिले में स्थित स्मारकों के लिए आगंतुकों को अलग-अलग टिकट न लेना पड़े।
जयपुर जिले के अतिरिक्त राजकीय संग्रहालयों में भी टिकट दरों में संशोधन किया गया है। अब तक जहां भारतीय पर्यटक 20 रुपए में प्रवेश कर सकते थे, वहीं नई दर के अनुसार यह शुल्क 30 रुपए कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि संग्रहालयों में प्रदर्शित विरासत के संरक्षण और डिजिटाइजेशन के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है, जिसे टिकट वृद्धि के माध्यम से पूरा किया जा सकेगा।
सबसे बड़ा बदलाव विभाग द्वारा लागू की गई एकीकृत प्रवेश योजना में दिखाई देता है। इस योजना के तहत राजस्थान राज्य के विभागीय संरक्षित स्मारकों, संग्रहालयों और कला दीर्घाओं के लिए एक संयुक्त टिकट व्यवस्था बनाई गई है। नई व्यवस्था के मुताबिक भारतीय पर्यटक 1300 रुपए और विदेशी पर्यटक 5500 रुपए का टिकट लेकर 10 दिनों तक राज्य के विभिन्न विभागीय स्मारकों और संग्रहालयों का भ्रमण कर सकेंगे। इस कदम को पर्यटन विशेषज्ञ “लंबी अवधि के यात्रियों के लिए लाभकारी” बता रहे हैं, क्योंकि इससे हर स्मारक पर अलग टिकट लेने की परेशानी खत्म होगी।
हालांकि, अचानक लागू की गई इस नीति पर कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। स्थानीय गाइड्स का कहना है कि राज्य के भीतर घूमने आने वाले घरेलू पर्यटकों, विद्यार्थियों और छोटे समूहों के लिए यह बढ़ोतरी अपेक्षा से अधिक है। उनका मानना है कि सरकार को विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों और स्थानीय निवासियों के लिए रियायती दरें तय करनी चाहिए, ताकि विरासत का अनुभव सभी वर्गों के लिए सुलभ बना रहे। दूसरी ओर, विभाग का कहना है कि टिकट बढ़ोतरी के साथ-साथ सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था, साइनबोर्ड, गाइडेड टूर और ऑनलाइन टिकटिंग जैसी सुविधाओं को भी उन्नत करने की योजना है।
राजस्थान देश और दुनिया में अपने किलों, महलों और विरासत संग्रहालयों के लिए जाना जाता है। हर साल लाखों देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था और स्थानीय रोजगार दोनों को फायदा होता है। ऐसे में संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। नई प्रवेश दरें इस संतुलन का हिस्सा साबित होंगी या चर्चा और असहमति का कारण — इसका जवाब आने वाले समय में पर्यटकों की संख्या और उनके अनुभव पर निर्भर करेगा।


