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शाहपुरा जिला रद्द करने के विरोध में जन आंदोलन: हजारों की रैली

शाहपुरा जिला रद्द करने के विरोध में जन आंदोलन: हजारों की रैली

मनीषा शर्मा। राजस्थान की भजनलाल सरकार द्वारा पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन में गठित 9 नए जिलों और 3 संभागों को रद्द करने के फैसले के खिलाफ विभिन्न जिलों में विरोध जारी है। इसी कड़ी में शाहपुरा (भीलवाड़ा) जिले के रद्द किए जाने पर जन आक्रोश अपने चरम पर पहुंच चुका है। मंगलवार को इस विरोध प्रदर्शन का 28वां दिन था, जिसमें हजारों लोग शाहपुरा जिला संघर्ष समिति के नेतृत्व में सड़कों पर उतरे।

महापड़ाव और विशाल रैली में उमड़ा जनसैलाब

मंगलवार को शाहपुरा के महलों के चौक पर आयोजित महापड़ाव में हजारों लोग शामिल हुए। शाहपुरा के अलावा आसपास की तहसीलों और गांवों से भी भारी संख्या में लोग इस प्रदर्शन में शामिल हुए। महलों के चौक पर जनसभा के बाद दोपहर 2 बजे विशाल रैली निकाली गई, जो उपखंड कार्यालय तक गई।

जनसभा को संबोधित करते हुए संघर्ष समिति के संयोजक रामप्रसाद जाट, अध्यक्ष दुर्गालाल राजोरा और अन्य सदस्यों ने स्पष्ट किया कि शाहपुरा को जिला बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शाहपुरा को जिला घोषित नहीं किया, तो आगामी पंचायत और नगर परिषद चुनावों में मतदान का बहिष्कार किया जाएगा।

विधायक का कटआउट फाड़ा और पोस्टरों पर जताया गुस्सा

रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों का गुस्सा विधायक डॉ. लालाराम बेरवा पर भी दिखा। त्रिमूर्ति चौराहे पर उनके पोस्टर और कटआउट फाड़ दिए गए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए विधायक पर जनता की मांगों को अनदेखा करने का आरोप लगाया। मांडल-सांगानेर मेगा हाईवे पर लगे उनके पोस्टरों को फाड़ने के बाद स्थिति कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हो गई, लेकिन पुलिस ने माहौल को संभाल लिया।

सरकार को 15 दिनों का अल्टीमेटम

रैली उपखंड कार्यालय पहुंचकर समाप्त हुई, जहां प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सरकार से 15 दिनों के भीतर शाहपुरा को जिला घोषित करने की मांग की गई। संघर्ष समिति ने स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार ने उनकी मांगें पूरी नहीं कीं, तो नागौर-सतूर नेशनल हाईवे और मांडल-सांगानेर मेगा हाईवे 148डी को जाम कर दिया जाएगा।

हाईवे जाम की चेतावनी और आंदोलन जारी रखने की घोषणा

संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनिल शर्मा ने कहा कि जब तक शाहपुरा को जिला घोषित नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। SDM कार्यालय के बाहर प्रदर्शन नियमित रूप से होता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शाहपुरा की जनता इस फैसले को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगी।

विधायक का कटआउट और जनता का गुस्सा

विधायक डॉ. लालाराम बेरवा के खिलाफ जनता का गुस्सा मंगलवार को चरम पर पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों ने उनके कटआउट को गिराकर तोड़ दिया। इससे पहले सोमवार रात को त्रिमूर्ति चौराहे पर उनके 20 फीट ऊंचे कटआउट को हटाया गया था, जिसके बाद जनता ने पटाखे फोड़कर अपनी खुशी जाहिर की।

कटआउट हटाने को लेकर जनता की नाराजगी तब बढ़ी, जब विधायक ने आंदोलन में शामिल लोगों से कोई संवाद नहीं किया। 18 दिसंबर को विधायक का जन्मदिन मनाने के दौरान यह कटआउट लगाया गया था, जिसके बाद से ही शाहपुरा की जनता में इसे लेकर गहरी नाराजगी थी।

28 दिनों से जारी आंदोलन

शाहपुरा जिला संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह आंदोलन 28 दिनों से लगातार जारी है। सोमवार को शाहपुरा के सभी बाजार बंद रहे और इसे ‘ब्लैक डे’ के रूप में मनाया गया। मेडिकल स्टोर यूनियन और जय मेवाड़ टैक्सी यूनियन समेत 60 से अधिक संस्थाओं ने इस बंद का समर्थन किया।

स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति भी कम रही, क्योंकि ऑटो चालकों ने स्कूल जाने से मना कर दिया। आंदोलन के इस लंबे दौर में जनता की एकजुटता सरकार पर दबाव बढ़ा रही है।

शाहपुरा को जिला बनाए रखने की मांग क्यों?

शाहपुरा के लोग इसे जिला बनाए रखने के पीछे कई तर्क दे रहे हैं। उनका कहना है कि जिला बनने से प्रशासनिक सुविधाएं बेहतर हुई थीं। जिले के रद्द होने से आम जनता को दूरदराज के इलाकों में सरकारी कामों के लिए जाना पड़ेगा। संघर्ष समिति का मानना है कि शाहपुरा का जिला होना विकास के लिए आवश्यक है और इसे खत्म करना क्षेत्र के लोगों के साथ अन्याय है।

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