मनीषा शर्मा। 2024 में राजस्थान ने 116 सालों में तीसरी बार औसत से 58% अधिक बारिश दर्ज की, जो 669.3 मिमी तक पहुंची। राज्य में सामान्य बारिश 422.3 मिमी होती है, लेकिन इस वर्ष की भारी बारिश ने राजस्थान को देश में सबसे अधिक बारिश वाले राज्य के रूप में स्थापित कर दिया। राज्य में अब तक 691 में से 392 बांध ओवरफ्लो हो चुके हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि बारिश का जल संग्रहण पर बड़ा असर पड़ा है।
राजस्थान में ज्यादा बारिश की प्रमुख वजहें
1. मानसून ट्रफ लाइन:
मानसून ट्रफ लाइन का सामान्य स्थिति में लंबे समय तक बने रहना राजस्थान में अच्छी बारिश का मुख्य कारण रहा। मानसून ट्रफ लाइन एक निम्न दबाव वाली रेखा होती है जो मानसून के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैली होती है। यह बारिश के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारण मानी जाती है क्योंकि इसके आसपास बादल बनते हैं और बारिश होती है। इस बार ट्रफ लाइन न तो उत्तर की ओर गई और न दक्षिण की ओर, जिससे बारिश का लगातार होना संभव हुआ।2. बारिश का बदलता ट्रेंड:
पिछले 10-15 सालों में मानसून का पैटर्न बदला है। जहां पूर्वोत्तर भारत में बारिश कम हुई है, वहीं मध्य और पश्चिमी भारत के राज्यों में, विशेषकर राजस्थान, मध्य प्रदेश में बारिश का ग्राफ ऊपर गया है। इस बदलाव ने राजस्थान में अधिक बारिश की संभावनाओं को बढ़ाया।3. बैक टू बैक सिस्टम:
इस साल बंगाल की खाड़ी में कई लो-प्रेशर सिस्टम बने जो राजस्थान तक पहुंचे। जुलाई-अगस्त के दौरान लगातार 7 से ज्यादा छोटे-बड़े सिस्टम बने, जिनसे राज्य को लगातार नमी मिलती रही। साथ ही अरब सागर की मानसून शाखा भी इस बार सक्रिय रही, जिससे बारिश की तीव्रता और बढ़ गई।बांधों की स्थिति पर असर
राजस्थान के 691 बांधों में से 57% ओवरफ्लो हो चुके हैं। राज्य में बांधों की कुल स्टोरेज क्षमता 12,900 मिलियन क्यूबिक मीटर है, जिसमें से 11,110 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है, जो कुल क्षमता का 72.8% है। कुल 22 बड़े बांधों में से 13 बांध पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि केवल 3 खाली हैं।
खेती पर असर
खरीफ में नुकसान:
तेज बारिश ने खरीफ की फसल को नुकसान पहुंचाया। खरीफ का रकबा भी इस साल घटकर 159.80 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले सीजन से कम है।रबी में फायदा:
औसत से ज्यादा बारिश रबी की फसल के लिए लाभकारी साबित होगी। नमी के कारण इस बार बुआई समय पर शुरू हो सकेगी। इसके अलावा बांधों और तालाबों में पर्याप्त पानी जमा है, जिससे सिंचाई की सुविधा भी बेहतर होगी।आगे की संभावनाएँ
हालांकि इस बार की रिकॉर्ड बारिश ने कयास लगाए हैं कि सर्दी भी तीव्र हो सकती है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्दी का अनुमान सिर्फ बारिश के आधार पर नहीं लगाया जा सकता। वेस्टर्न डिर्स्टबेंस, जेट विंड, अल-नीनो जैसी कई अन्य परिस्थितियाँ भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं।
राजस्थान में इस साल की रिकॉर्ड बारिश ने जल संसाधनों को बढ़ाया है, जिससे राज्य के बांध और जलाशय भर चुके हैं। हालांकि खरीफ की फसल को नुकसान पहुंचा है, लेकिन रबी की फसल के लिए यह मौसम लाभकारी साबित हो सकता है। बारिश का यह ट्रेंड बताता है कि जलवायु परिवर्तन ने मानसून के पैटर्न को बदल दिया है, जिसका प्रभाव आने वाले वर्षों में भी देखा जा सकता है।


