शोभना शर्मा। मेवाड़ अंचल में स्थित सुप्रसिद्ध कृष्ण धाम सांवलिया सेठ को लेकर श्रद्धालुओं की आस्था किसी से छिपी नहीं है। देश-विदेश से आने वाले भक्त यहां भगवान को केवल आराध्य ही नहीं, बल्कि अपने जीवन और व्यापार का सहभागी मानते हैं। यही कारण है कि सांवलिया सेठ को कई व्यापारी अपना ‘बिजनेस पार्टनर’ मानते हैं और लाभ-हानि दोनों स्थितियों में उन्हें याद करते हैं। हाल ही में राजस्थान के कोटा शहर से आए कुछ प्रमुख व्यापारियों की भक्ति और अनोखी चढ़ावे की परंपरा ने पूरे प्रदेश में चर्चा बटोरी है।
कोटा की प्रसिद्ध भामाशाह अनाज मंडी के तीन बड़े व्यापारियों ने अपनी मन्नत पूरी होने पर सांवलिया सेठ के चरणों में विशेष चांदी की भेंट अर्पित की। इन चढ़ावों की खास बात यह रही कि ये उपहार उनके-अपने व्यापार से जुड़े प्रतीकों के रूप में तैयार करवाए गए थे, जो न सिर्फ आस्था बल्कि कारीगरी का भी अद्भुत उदाहरण हैं।
कोटा के लहसुन व्यापारी रवि मालपानी ने अपने कारोबार में आई अप्रत्याशित तरक्की का श्रेय सीधे सांवलिया सेठ को दिया। उनका कहना है कि जब व्यापार में उतार-चढ़ाव चल रहा था, तब उन्होंने सच्चे मन से ठाकुर जी से प्रार्थना की थी। समय के साथ व्यापार फला-फूला और उनकी मन्नत पूरी हुई। इसी के चलते उन्होंने डेढ़ किलो वजनी चांदी से बना लहसुन भगवान को अर्पित किया। चांदी की यह लहसुन प्रतिकृति इतनी बारीकी और कलात्मक ढंग से बनाई गई है कि देखने वाले भी हैरान रह जाते हैं। मालपानी का मानना है कि उनकी सफलता के असली कर्ता-धर्ता सांवलिया जी ही हैं।
आस्था का यह सिलसिला यहीं नहीं थमा। कोटा के ही अनाज व्यापारी लोकेश गौतम ने अपने कारोबार में निरंतर प्रगति होने पर भगवान को 800 ग्राम चांदी का तराजू-कांटा और बांसुरी अर्पित की। लोकेश पिछले तीन वर्षों से नियमित रूप से कोटा से श्रद्धालुओं का जत्था लेकर मंडफिया स्थित सांवलिया सेठ मंदिर दर्शन के लिए जाते हैं। उनका कहना है कि व्यापार में ईमानदारी और प्रभु पर विश्वास ही सफलता की कुंजी है, और सांवलिया सेठ उनके हर फैसले में मार्गदर्शक बने हैं।
इसी क्रम में एक अन्य सोयाबीन व्यापारी पिंटू सुमन ने भी अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर लगभग 300 ग्राम चांदी से बना एक छोटा सा मकान ठाकुर जी को समर्पित किया। यह चढ़ावा उनके सपनों और स्थायित्व का प्रतीक माना जा रहा है। पिंटू का विश्वास है कि भगवान की कृपा से उनके जीवन और व्यापार दोनों में स्थिरता आई है।
भक्ति के इस आयोजन को और भी भव्य रूप तब मिला, जब 3 जनवरी को कोटा के खड़े गणेश मंदिर से करीब 250 श्रद्धालुओं का जत्था दो बसों में सवार होकर मंडफिया के लिए रवाना हुआ। इस यात्रा से पहले सांवलिया सेठ के ध्वज की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। 3 और 4 जनवरी को मंदिर परिसर में भव्य भजन संध्या आयोजित की गई, छप्पन भोग लगाया गया और हजारों श्रद्धालुओं को महाप्रसादी करवाई गई।
सांवलिया सेठ मंदिर में वैसे तो हर महीने करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है, लेकिन कोटा के इन व्यापारियों द्वारा चढ़ाई गई चांदी की भेंट उनकी अटूट श्रद्धा, कृतज्ञता और कर्म के प्रति समर्पण को विशेष रूप से दर्शाती है। भक्तों का मानना है कि जो भी सच्चे मन और ईमानदारी से सांवलिया सेठ के दरबार में अर्जी लगाता है, भगवान उसे कभी खाली हाथ नहीं लौटाते। यही विश्वास इस कृष्ण धाम को आस्था और समृद्धि का अद्वितीय केंद्र बनाता है।


