मनीषा शर्मा। राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कल्पथी राजेंद्रन श्रीराम ने दौसा में नवनिर्मित न्यायालय भवन के लोकार्पण समारोह के दौरान न सिर्फ एक आधुनिक न्यायिक भवन का उद्घाटन किया, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर एक भावुक और गंभीर संदेश भी दिया। उन्होंने हाल ही में प्रदेश में घटित विद्यालय भवनों के गिरने की घटनाओं और उसमें हुई बच्चों की मौतों पर गहरा दुख जताते हुए समाज और प्रशासन को झकझोरने वाला बयान दिया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि कोई भी निर्माण कार्य केवल औपचारिकता न होकर, पूर्ण समर्पण और गुणवत्ता के साथ किया जाना चाहिए ताकि उसका उपयोग लंबे समय तक सुरक्षित रूप से किया जा सके। उन्होंने दौसा में निर्मित नए न्यायालय भवन को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए आशा व्यक्त की कि यह भवन कम से कम पचास वर्षों तक मजबूती के साथ खड़ा रहेगा और समाज की न्यायिक आवश्यकताओं को पूरा करेगा।
झालावाड़ की घटना से आहत हुए मुख्य न्यायाधीश
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, “मुझे अत्यंत पीड़ा होती है जब अखबारों में पढ़ता हूं और टेलीविज़न पर देखता हूं कि स्कूल की इमारतें गिर जाती हैं और मासूम बच्चों की जान चली जाती है। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि कोई भी निर्माण कार्य लापरवाही से न किया जाए।” उन्होंने कहा कि दौसा में बना यह भवन न केवल वास्तुशिल्प की दृष्टि से उत्कृष्ट है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सशक्त न्यायिक केंद्र बनेगा।
834 लाख रुपये की लागत से बना अत्याधुनिक न्यायालय भवन
मुख्य न्यायाधीश कल्पथी राजेंद्रन श्रीराम दौसा के पहले दौरे पर पहुंचे थे, जहां पुलिस जवानों द्वारा उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके पश्चात उन्होंने फीता काटकर 834 लाख रुपये की लागत से निर्मित न्यायालय भवन के विस्तार का विधिवत लोकार्पण किया। यह भवन न्यायिक प्रशासन को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
नवीनतम सुविधाओं से युक्त है नया परिसर
जिला एवं सत्र न्यायाधीश हुकुम सिंह राजपुरोहित ने भवन की विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें दिव्यांगजन और वृद्ध वादियों की सुविधा के लिए रैंप, लिफ्ट, स्वच्छ शीतल जल व्यवस्था और वेटिंग एरिया बनाए गए हैं। न्यायालय कक्षों में अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है, और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा से लैस अलग कक्ष भी निर्मित किए गए हैं। इससे दूरदराज़ के वादियों को भी न्यायिक कार्यवाही में सहभागिता सुलभ होगी।
दौसा बनेगा आधुनिक न्यायिक केंद्र
राजपुरोहित ने कहा कि यह नया भवन दौसा को राजस्थान के प्रमुख न्यायिक जिलों की श्रेणी में ला खड़ा करेगा। उन्होंने बताया कि ‘सबके लिए न्याय, समय पर न्याय’ की संकल्पना को मूर्त रूप देने में यह विस्तार अहम भूमिका निभाएगा। दौसा अब अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ एक आधुनिक न्यायिक केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा।
समारोह में उपस्थित रहे प्रमुख अधिकारी
लोकार्पण समारोह में राजस्थान उच्च न्यायालय के प्रशासनिक न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा, न्यायाधीश समीर जैन, जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार, पुलिस अधीक्षक सागर राणा और न्यायिक सेवा से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश ने समारोह के दौरान पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। अतिथियों का स्वागत स्थानीय परंपरा के अनुरूप साफा और पौधा भेंट कर किया गया।
स्थायी संरचनाएं समय की आवश्यकता
मुख्य न्यायाधीश का यह वक्तव्य न केवल भवन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर चेतावनी है, बल्कि एक व्यापक सामाजिक चिंता को भी रेखांकित करता है। राजस्थान में हाल के वर्षों में स्कूल भवनों के गिरने से हुए हादसों ने न केवल शिक्षा व्यवस्था, बल्कि सरकारी निर्माण एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। बच्चों की मौतें किसी भी समाज के लिए अस्वीकार्य हैं और इस संदर्भ में न्यायपालिका की यह सार्वजनिक टिप्पणी नीति निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट संकेत है।
समाज के लिए संदेश
मुख्य न्यायाधीश का यह बयान न्यायिक भवन के लोकार्पण से कहीं अधिक व्यापक अर्थ रखता है। यह उन सभी संस्थाओं के लिए एक चेतावनी है जो निर्माण कार्यों में लापरवाही बरतती हैं। उन्होंने जिस “शिद्दत और लगन” की बात की, वह निर्माण से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक व्यवस्थाओं तक हर क्षेत्र में लागू होती है। यह स्पष्ट है कि भवन निर्माण केवल ईंट-पत्थर का कार्य नहीं बल्कि भविष्य की संरचना गढ़ने की प्रक्रिया है। दौसा में बना यह नया न्यायालय भवन एक मिसाल है कि अगर ईमानदारी, पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक के साथ निर्माण कार्य किया जाए तो यह समाज को दीर्घकालिक लाभ पहुंचा सकता है।


