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जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े की वजह सामने आई: अमित शाह का बयान

जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े की वजह सामने आई: अमित शाह का बयान

शोभना शर्मा। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं पर आखिरकार गृहमंत्री अमित शाह ने चुप्पी तोड़ दी है। धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से अचानक इस्तीफ़ा देकर सभी को चौंका दिया था। उस समय उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्वास्थ्य संबंधी कारणों का हवाला दिया था, लेकिन इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज़ रही कि उनका इस्तीफ़ा स्वेच्छा से नहीं बल्कि दबाव में लिया गया है। विपक्ष ने तो यहां तक आरोप लगा दिया था कि धनखड़ को नज़रबंद कर दिया गया है और उन्हें विद्रोह से रोकने के लिए इस्तीफ़ा देने पर मजबूर किया गया।

अमित शाह ने साफ किया इस्तीफ़े का कारण

गृहमंत्री अमित शाह ने 25 अगस्त को समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक साक्षात्कार में इन अटकलों और आरोपों पर खुलकर जवाब दिया। उनसे जब यह सीधा सवाल किया गया कि क्या धनखड़ पर सरकार या बीजेपी ने इस्तीफ़ा देने का दबाव बनाया था, तो शाह ने इसे पूरी तरह निराधार बताया।

उन्होंने कहा, “जगदीप धनखड़ जी ने अपने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफ़ा दिया है। उनके त्यागपत्र में यह बात साफ़ लिखी हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सांसदों का आभार जताया है। ऐसी स्थिति में किसी तरह का दबाव डालने का सवाल ही नहीं उठता।”

विपक्ष के आरोपों को बताया झूठा

अमित शाह ने विपक्ष द्वारा लगाए गए नज़रबंद किए जाने के आरोप को भी सिरे से खारिज कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि धनखड़ को बाहर की दुनिया से मिलने-जुलने नहीं दिया जा रहा और उन्हें बगावत करने से रोकने के लिए निगरानी में रखा गया है। शाह ने इस पर कहा, “यह सब बेबुनियाद बातें हैं। जगदीप धनखड़ ने अपने कार्यकाल में संवैधानिक दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया। उन्होंने हमेशा मर्यादा और गरिमा बनाए रखी। अब जब उन्होंने निजी स्वास्थ्य कारणों से पद छोड़ा है, तो इस पर अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोई ज़रूरत नहीं है।”

इस्तीफ़े पर राजनीति क्यों?

जगदीप धनखड़ के इस्तीफ़े के बाद से विपक्ष लगातार बीजेपी पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का तर्क है कि धनखड़ केंद्र सरकार की नीतियों से असहज थे और इसलिए उन्हें हटाया गया। वहीं, कुछ हलकों से यह भी कहा गया कि धनखड़ पार्टी लाइन से अलग होकर कोई बयान न दें, इसलिए उन्हें मजबूरन पद से हटना पड़ा।

लेकिन शाह ने साफ कहा कि यह सब केवल राजनीति है और तथ्यहीन आरोप हैं। उनके अनुसार, “धनखड़ जी ने अपने कार्यकाल में बेहद संतुलित और गरिमापूर्ण ढंग से काम किया। उनके इस्तीफ़े की वजह वही है जो उन्होंने सार्वजनिक रूप से बताई—व्यक्तिगत स्वास्थ्य। बात का बतंगड़ बनाने की ज़रूरत नहीं है।”

नए उपराष्ट्रपति पर भी बोले शाह

धनखड़ के इस्तीफ़े के बाद नए उपराष्ट्रपति के लिए बीजेपी ने सीपी राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया है। इस फैसले को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हो रही हैं। विपक्ष का कहना है कि बीजेपी तमिलनाडु और दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए यह कदम उठा रही है।

इस पर शाह ने कहा कि भारत में पहले से परंपरा रही है कि अगर राष्ट्रपति पूर्व से होता है तो उपराष्ट्रपति दक्षिण से चुना जाता है। यह परंपरा अब भी निभाई जा रही है और इसमें किसी राजनीतिक रणनीति की खोज करना अनुचित है। शाह के अनुसार, “यह स्वाभाविक संतुलन है। इससे किसी राज्य विशेष या राजनीति से जोड़कर देखना सही नहीं है।”

धनखड़ का कार्यकाल और योगदान

जगदीप धनखड़ का कार्यकाल 2022 से 2025 तक रहा। वे राजस्थान से ताल्लुक रखते हैं और वकील से लेकर राजनीति तक उन्होंने लंबा सफर तय किया। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में उनका कार्यकाल विशेष चर्चा में रहा, जहां उनकी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कई मुद्दों पर तनातनी रही। उपराष्ट्रपति बनने के बाद भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण मौकों पर संसद की कार्यवाही का संचालन किया और अपनी सख्त लेकिन संतुलित छवि बनाए रखी।

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