राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सामने आया, जब प्रदेश के स्कूलों में 70 हजार से अधिक शिक्षकों के रिक्त पदों पर जोरदार बहस हुई। सरकार और विपक्ष के बीच इस विषय पर तीखी तकरार देखने को मिली। शिक्षक कमी के कारण शिक्षा व्यवस्था वर्षों से प्रभावित रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है। ऐसे में सदन में उठे सवालों ने भर्ती प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति और सरकार की मंशा को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डाला।
विधायक थावरचंद ने सरकार से पूछा— कब भरेंगे रिक्त पद?
इस मुद्दे की शुरुआत थावरचंद ने की, जिन्होंने सदन में सरकार से सीधे सवाल करते हुए पूछा कि शिक्षा विभाग में विषयवार कितने पद रिक्त हैं और उन्हें भरने की समयसीमा क्या निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सैकड़ों स्कूल बिना विषय विशेषज्ञ शिक्षकों के चल रहे हैं। विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और हिंदी जैसे महत्वपूर्ण विषयों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
थावरचंद ने यह भी कहा कि जब सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने की बात करती है, तो सबसे पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शिक्षकों की उपलब्धता पूरी हो। छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी मिल सकती है जब विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक तैनात हों।
मदन दिलावर ने पिछली सरकार पर साधा निशाना
थावरचंद के सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पूर्व सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि समस्या की जड़ वहीं है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार ने 6,264 स्कूलों का क्रमोन्नयन तो कर दिया, लेकिन करीब 50 हजार पद सृजित नहीं किए। मंत्री ने कहा कि बिना पदों के स्कूलों को अपग्रेड करने का निर्णय तर्कहीन था। इससे शिक्षकों की कमी और व्यापक हो गई। परिणामस्वरूप अब वर्तमान सरकार को व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में अतिरिक्त समय और संसाधन लगाने पड़ रहे हैं।
मदन दिलावर ने सदन को यह भी बताया कि सरकार चरणबद्ध तरीके से रिक्त पदों को भर रही है। पिछले वर्षों में 72 हजार पदों पर भर्ती पूरी की जा चुकी है और वर्तमान में 2,202 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। साथ ही, 3,225 पदों के लिए वर्ष 2025 में भर्ती जारी की गई है।
कांग्रेस उपनेता रामकेश मीणा का हमला
बहस के दौरान विपक्ष ने भी सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। कांग्रेस के उपनेता रामकेश मीणा ने भाजपा के संकल्प पत्र का हवाला देते हुए पूछा कि एक वर्ष के भीतर सभी रिक्त पद भरने का जो वादा किया गया था, उसकी वर्तमान स्थिति क्या है। उन्होंने कहा कि युवा लंबे समय से शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। कई परीक्षाएँ आयोजित होने में देरी हुई है, जबकि हजारों पद अभी भी खाली पड़े हैं। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वह अपने वादों को कब पूरा करेगी।
रामकेश मीणा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की स्थिति चिंताजनक है। विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्र बुनियादी अवधारणाओं को भी समझने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि शिक्षक भर्ती को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा जाए।
एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों के बैकलॉग पदों पर सरकार का बयान
बहस के दौरान एससी, एसटी और ओबीसी के बैकलॉग पदों का मुद्दा भी उठाया गया। विपक्ष ने पूछा कि वर्षों से बैकलॉग पद क्यों नहीं भरे गए हैं और इन वर्गों के हकदार युवाओं को कब तक इंतजार करना पड़ेगा। इस पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सभी वर्गों का ध्यान रखते हुए आगामी भर्तियों में इन बैकलॉग पदों का समायोजन करेगी। उन्होंने कहा कि यह सरकार सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता के सिद्धांत पर काम करती है।
मदन दिलावर ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा five-year plan के तहत चार लाख सरकारी नौकरियाँ देने का लक्ष्य घोषित किया गया है, जिसमें शिक्षक भर्ती भी प्रमुख हिस्सेदारी रखती है।
रिक्त पदों का असर और भविष्य की दिशा
प्रदेश में शिक्षकों की कमी का सीधा असर शिक्षा व्यवस्था पर पड़ता रहा है। कई विद्यालय एकीकृत हैं, जहां एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं का भार उठाना पड़ता है। विज्ञान और गणित जैसे कठिन विषयों के शिक्षकों की कमी से छात्रों की सीखने की क्षमता पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
विधानसभा में हुई चर्चा से यह स्पष्ट हो गया कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार दबाव में है और विपक्ष इस मुद्दे को आने वाले समय में और तेज़ी से उठाने की तैयारी में है। सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि सभी रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने की दिशा में काम जारी है। उच्च स्तरीय बैठकों और भर्ती प्रक्रियाओं के माध्यम से अगले एक-दो वर्षों में इस स्थिति में सुधार दिखाई दे सकता है।


