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अमीन कागजी और बालमुकुंद आचार्य के बीच उपजा विवाद बढ़ा, बयानबाज़ी तेज

अमीन कागजी और बालमुकुंद आचार्य के बीच उपजा विवाद बढ़ा, बयानबाज़ी तेज

जयपुर में राजनीतिक माहौल इन दिनों गर्म है। एक निर्माण कार्य को लेकर पैदा हुआ विवाद अब दो विधायकों के बीच तीखी बयानबाज़ी का रूप ले चुका है। कांग्रेस विधायक अमीन कागजी और हवामहल सीट से बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य  के बीच शुरू हुआ यह मामला अब व्यक्तिगत आरोपों और एक-दूसरे की कार्यशैली पर सवालों तक पहुंच गया है। दोनों नेताओं के तीखे शब्दों ने इस मुद्दे को राजनीतिक और धार्मिक विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

विवाद की शुरुआत शहर के एक निर्माण कार्य को लेकर हुई, जहां दोनों विधायकों के समर्थकों के बीच कहासुनी हो गई थी। यह मामला थमने के बजाय और अधिक गहराता चला गया। कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने इस विवाद के संदर्भ में बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य से सवाल किया कि वे ‘आचार्य’ की उपाधि किस आधार पर रखते हैं, जबकि उनके पास इस संबंध में कोई डिग्री नहीं है। कागजी ने दावा किया कि विधायक बालमुकुंद के पास किसी भी तरह की आधिकारिक डिग्री मौजूद नहीं है।

अमीन कागजी के इस बयान ने राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया, जिसके बाद विधायक बालमुकुंद आचार्य ने पलटवार करते हुए कांग्रेस विधायक पर आरोप लगाए और उन्हें ‘मदरसा छाप’ कहकर संबोधित किया। उन्होंने यह दावा भी किया कि कागजी पिछले कई वर्षों से उनके पास भविष्य जानने आते थे।

बालमुकुंद आचार्य ने बताया—उन्हें ‘आचार्य’ की उपाधि कैसे मिली

कांग्रेस विधायक के सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य ने अपने धार्मिक पद की व्याख्या करते हुए कहा कि ‘आचार्य’ कोई औपचारिक शिक्षा आधारित डिग्री नहीं है, बल्कि यह सनातन परंपरा में निभाई जाने वाली धार्मिक उपाधि है। उन्होंने कहा कि वे रामानुज संप्रदाय के बालाजी धाम में पुजारी के रूप में सेवा करते हैं और 35 वर्षों से मंदिर में सेवादार की भूमिका निभा रहे हैं।

आचार्य ने कहा कि उनके संप्रदाय में स्वामी और आचार्य दो प्रमुख पद होते हैं। प्रमुख स्वामी को महंत कहा जाता है और वे स्वयं एक स्वामी हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि ‘आचार्य’ शब्द उनके नाम का हिस्सा है और यह कोई अलग से प्राप्त की गई उपाधि नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पीढ़ियों से उनकी परंपरा में शास्त्रों का अध्ययन, कथाओं का आयोजन और व्यासपीठ पर बैठकर प्रवचन करना शामिल रहा है। विधायक ने कहा कि यदि कोई उनकी धार्मिक परंपरा को समझे बिना ‘आचार्य’ उपाधि पर सवाल उठाता है, तो यह न केवल उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का अपमान है बल्कि उनकी संस्कृति और परंपरा पर भी प्रश्नचिह्न है।

अमीन कागजी पर तीखा हमला

अपनी प्रतिक्रिया में बालमुकुंद आचार्य ने कांग्रेस विधायक अमीन कागजी पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जो लोग उनकी आचार्य परंपरा पर सवाल उठा रहे हैं, वे स्वयं उनके पास वर्षों तक भविष्यवाणी जानने के लिए आते रहे हैं। उन्होंने कागजी को ‘मदरसा छाप’ कहकर संबोधित किया और कहा कि जो व्यक्ति सनातन संस्कृति की परंपरा को समझता ही नहीं, उसे किसी प्रकार का प्रश्न उठाने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई उनके तिलक, परंपरा या धार्मिक पहचान का अपमान करेगा तो वे चुप नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमीन कागजी अवैध निर्माण और अवैध धार्मिक ढांचे को बढ़ावा देना चाहते हैं, जिसके खिलाफ वे निरंतर आवाज उठाते रहेंगे।

“सनातन का अपमान करना कांग्रेस का स्वभाव” — बीजेपी विधायक का आरोप

विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कांग्रेस पर तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि सनातन परंपरा का अपमान करना कांग्रेस की आदत बन चुकी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायक बार-बार धार्मिक परंपरा और पदवी को ‘डिग्री’ से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि सनातन धर्म में यह व्यवस्था बिल्कुल अलग है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सोच केवल “मदरसा वाली शिक्षा तक सीमित” है, इसलिए वे सनातन की व्यापकता को समझ नहीं पा रहे हैं।

बीजेपी विधायक ने यह भी कहा कि वह अवैध गतिविधियों के खिलाफ बोलते रहेंगे और यदि कोई इस पर आपत्ति जताता है, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि वे अपने सिद्धांतों और परंपराओं से समझौता नहीं करेंगे।

विवाद का बढ़ता दायरा और राजनीतिक असर

जयपुर का यह विवाद अब धीरे-धीरे स्थानीय निर्माण कार्य से आगे बढ़कर व्यापक राजनीतिक और धार्मिक विमर्श में बदलता जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच की बयानबाज़ी सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। यह साफ है कि मामले ने राजनीतिक तीखापन पकड़ लिया है, जो आने वाले दिनों में और भी तनावपूर्ण रूप ले सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जयपुर में होने वाले विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय स्तर की राजनीति में ऐसे टकराव अक्सर चुनावी माहौल को प्रभावित करते हैं। दोनों दलों के समर्थकों के बीच भी इस विवाद का असर देखा जा रहा है। फिलहाल यह विवाद शांत होने के बजाय और तीखा होता दिख रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों दल इस मामले को कैसे संभालते हैं और क्या कोई मध्यस्थता की कोशिश की जाएगी या विवाद और अधिक बढ़ेगा।

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