मनीषा शर्मा,अजमेर। आनासागर और फॉयसागर झीलें हर साल सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का स्वागत करती हैं। सुदूर यूरोप और एशिया से आए पक्षी यहां की ठंडी जलवायु और भोजन-पानी की प्रचुरता के कारण बड़ी संख्या में आते हैं। इनमें पेलिकन, कॉमन कूट, और गल जैसे प्रमुख प्रवासी पक्षी शामिल हैं। लेकिन इस साल प्रवासी पक्षियों की आमद ने सभी को चौंका दिया है। फॉयसागर में इस बार एक भी पक्षी नजर नहीं आया, और आनासागर में भी इनकी संख्या बहुत कम रही।
पेलिकन की कम आमद
हर साल सैकड़ों की संख्या में आनासागर और फॉयसागर झीलों पर पेलिकन आते हैं। लेकिन इस बार स्थिति अलग है। वन विभाग द्वारा की गई पक्षी गणना के अनुसार, आनासागर झील पर पेलिकन की संख्या महज 48 दर्ज की गई है। पिछले साल इसी झील पर 350 से अधिक पेलिकन मौजूद थे। डॉ. आबिद अली के अनुसार, प्रवासी पक्षी ठंडे क्षेत्रों में बर्फ जमने के कारण अपने जीवन को सुरक्षित रखने और भोजन की तलाश में भारत का रुख करते हैं। लेकिन इस बार पेलिकन की कम संख्या ने वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है।
फॉयसागर में प्रवासी पक्षियों की अनुपस्थिति
फॉयसागर झील, जो कि प्रवासी पक्षियों के लिए हमेशा से एक आकर्षण का केंद्र रही है, इस बार एक भी पक्षी की मेजबानी नहीं कर पाई है। यहां न केवल प्रवासी पक्षी अनुपस्थित हैं, बल्कि स्थानीय पक्षियों की संख्या में भी गिरावट देखी गई है। पिछले साल फॉयसागर पर कॉमन कूट की संख्या 1000 से अधिक थी, जबकि इस बार यहां सन्नाटा पसरा है।
कॉमन कूट और गल की संख्या में कमी
कॉमन कूट और गल भी इस बार कम संख्या में नजर आए। आनासागर झील पर 118 कॉमन कूट गिने गए, जो पिछले साल की तुलना में बहुत कम है। गल की संख्या भी काफी कम रही। यह कमी इस बात की ओर इशारा करती है कि जलवायु परिवर्तन, भोजन की कमी, और झीलों की बिगड़ती स्थिति प्रवासी पक्षियों पर गहरा प्रभाव डाल रही है।
पर्यटकों की आदतें पक्षियों के लिए हानिकारक
आनासागर पर आने वाले पर्यटकों की आदतें प्रवासी पक्षियों के लिए समस्याएं पैदा कर रही हैं। पक्षियों को आकर्षित करने के लिए लोग ब्रेड, आटे की गोलियां, और चने पानी में फेंक रहे हैं। झील के किनारे अस्थायी दुकानें लगी हैं, जहां ये वस्तुएं बेची जा रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेड और टोस्ट जैसे खाद्य पदार्थ इन पक्षियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इन पक्षियों की प्राकृतिक खुराक में मछलियां और अन्य जलीय जीव शामिल होते हैं, जो उनके शारीरिक विकास और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं।
प्रवासी पक्षियों की संख्या में कमी के कारण
जलवायु परिवर्तन: प्रवासी पक्षी अक्सर ठंडे क्षेत्रों में बर्फ जमने पर भारत आते हैं। लेकिन इस बार मौसम में बदलाव ने उनकी प्रवास की आदतों को प्रभावित किया है।
भोजन की कमी: झीलों में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की संख्या में कमी पक्षियों को यहां आने से रोक रही है।
झीलों का बिगड़ता स्वास्थ्य: झीलों का प्रदूषण और मानव गतिविधियां उनके प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचा रही हैं।
पर्यटकों का हस्तक्षेप: ब्रेड और अन्य कृत्रिम खाद्य पदार्थों की उपलब्धता पक्षियों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है।
आवश्यक कदम
विशेषज्ञों ने झीलों के संरक्षण और प्रवासी पक्षियों की सुरक्षा के लिए कुछ सुझाव दिए हैं:
पर्यटकों को पक्षियों को कृत्रिम भोजन देने से रोका जाए।
झीलों में मछलियों और अन्य जलीय जीवों की संख्या को बनाए रखने के लिए प्रयास किए जाएं।
झीलों के प्रदूषण को रोकने और उनकी स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
प्रवासी पक्षियों की संख्या पर नियमित निगरानी और अध्ययन किया जाए।


