शोभना शर्मा। जयपुर की सांस्कृतिक भूमि शनिवार की शाम एक बार फिर अपनी पारंपरिक गरिमा और आधुनिक ऊर्जा से भर उठी, जब जवाहर कला केंद्र में “मेघ उत्सव 2025” का भव्य शुभारंभ हुआ। डेल्फिक काउंसिल ऑफ राजस्थान द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव की शुरुआत शास्त्रीय संगीत और नृत्य की मोहक प्रस्तुतियों से हुई, जिसने न सिर्फ दर्शकों को रिझाया, बल्कि मानसून के रचनात्मक भाव को कलात्मक अभिव्यक्ति दी।
फ्यूजन वादन से बंधा संगीत और मानसून का रिश्ता
कार्यक्रम की शुरुआत अदनान ग्रुप की वादन प्रस्तुति से हुई, जिसमें सितार, वायलिन और तबले की त्रयी ने राग मेघ और राग मल्हार की धुनों को फ्यूजन शैली में प्रस्तुत किया। अदनान खान के नेतृत्व में प्रस्तुत इस वादन में शास्त्रीय संगीत की गहराई के साथ लोक धुनों की सादगी और समकालीन संगीत की ऊर्जा का अनूठा समागम देखने को मिला। राग आधारित प्रयोगों और लोक ध्वनियों के माध्यम से कलाकारों ने मानसून की विविध छवियों को सुरों के माध्यम से मंच पर उतार दिया। दर्शकों की तालियों ने सभागार को उत्साह और सुरम्यता से भर दिया। खास बात यह रही कि इस प्रस्तुति ने युवा दर्शकों को भी शास्त्रीय संगीत की ओर आकर्षित किया।
‘त्रिदेवी’ नृत्य नाटिका में स्त्री शक्ति का भावपूर्ण चित्रण
इसके पश्चात प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना कनक सुधाकर और उनकी टीम ने “त्रिदेवी” नामक नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। इसमें पार्वती, लक्ष्मी और भूमि देवी के रूप में नारी की शक्तिशाली छवियों को नृत्य के माध्यम से जीवंत किया गया। पारंपरिक मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और लयबद्ध गति ने दर्शकों को एक आध्यात्मिक एवं भावनात्मक यात्रा पर ले चलने का कार्य किया। इस प्रस्तुति की विशेषता यह रही कि नारी के विभिन्न स्वरूपों को गहराई और गरिमा के साथ दर्शाया गया, जिसमें स्त्रीत्व की सौंदर्यता और शक्ति दोनों का प्रभावशाली समन्वय देखने को मिला।
पर्यटन सचिव और डेल्फिक काउंसिल की अध्यक्ष ने किया उद्घाटन
इस अवसर पर पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव राजेश यादव मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। आयोजन का उद्घाटन डेल्फिक काउंसिल ऑफ राजस्थान की अध्यक्ष श्रेया गुहा (आईएएस) की उपस्थिति में संपन्न हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा: “मेघ उत्सव केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि यह मानसून की रचनात्मकता, सौंदर्य और लोक चेतना को कलात्मक मंच प्रदान करने का प्रयास है। यह कार्यक्रम परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।”
सरकारी-सांस्कृतिक सहयोग और व्यापक भागीदारी
इस आयोजन को संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के उत्तरी क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (पटियाला), पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (उदयपुर), जवाहर कला केंद्र तथा राजीविका के सहयोग से आयोजित किया गया है। इसमें समाज, राजनीति, प्रशासन, मीडिया और शिक्षा जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियों के साथ बड़ी संख्या में कला प्रेमियों की भागीदारी रही।
अगले दिन होगा मूरलाला मारवाड़ा का सूफी गायन
मेघ उत्सव के समापन अवसर, रविवार 3 अगस्त को, प्रसिद्ध लोक गायक मूरलाला मारवाड़ा की प्रस्तुति आयोजित की जाएगी। वे कबीर और सूफी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को आत्मिक, दार्शनिक और संगीतमय अनुभूति प्रदान करेंगे। संगीत, भक्ति और दर्शन के इस संगम से उत्सव का समापन यादगार बनने की उम्मीद है।


