मनीषा शर्मा। सवाईमाधोपुर के रणथंभौर टाइगर रिजर्व में एक बार फिर जंगल की सत्ता को लेकर तनावपूर्ण मुकाबला देखने को मिला। इस बार आमने-सामने थीं मां-बेटी — बाघिन टी-124 रिद्धि और उसकी जवान होती बेटी। दोनों के बीच क्षेत्र पर कब्जे की लड़ाई इतनी तीखी हो गई कि दोनों घायल हो गईं।
जानकारी के अनुसार यह टकराव 2504 लेक एरिया के आसपास हुआ, जो लंबे समय से बाघिन रिद्धि के नियंत्रण में माना जाता है। लेकिन जैसे-जैसे उसकी बेटी वयस्क हो रही है, वह इसी इलाके पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश कर रही है। जंगलों में टेरिटोरियल यानी क्षेत्रीय विवाद आम होते हैं, लेकिन मां-बेटी का इस तरह आमने-सामने आ जाना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए भी चिंताजनक संकेत है। प्रत्यक्षदर्शियों और मॉनिटरिंग टीम के अनुसार दोनों ने एक-दूसरे पर कई बार हमला किया। लड़ाई के बाद रिद्धि के पैर में गंभीर चोट देखी गई और वह चलते समय लंगड़ाती हुई दिखाई दी। वहीं उसकी बेटी के कान पर गहरा घाव पड़ा है। यह स्पष्ट है कि संघर्ष तीव्र था और इसे टकराव के एक साधारण प्रयास से कहीं ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।
वन विभाग तुरंत अलर्ट
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। आरओपीटी अश्विनी प्रताप सिंह और रणथंभौर टाइगर रिजर्व के वेटरनरी ऑफिसर डॉ. सी.पी. मीणा मौके पर जोन नंबर तीन में पहुंचे। वहां से दोनों बाघिनों की लगातार मॉनिटरिंग शुरू की गई।
अधिकारियों के अनुसार फिलहाल बाघिनों पर दूर से नजर रखी जा रही है। सीधे हस्तक्षेप से पहले वन्यजीवों की स्वाभाविक गतिविधि और चोट की वास्तविक स्थिति समझना जरूरी होता है, ताकि जंगली जीवन के नियमों के अनुरूप सही निर्णय लिया जा सके।
फोटोग्राफ और ऑब्जर्वेशन पर तय होगा इलाज
वन विभाग की टीम ड्रोन, कैमरा ट्रेप और फील्ड ऑब्जर्वेशन के जरिए चोटों का आकलन कर रही है। तस्वीरों और वीडियो की मदद से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि क्या किसी बाघिन को तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता है या वे स्वयं ठीक हो सकती हैं।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के बाद ही tranquilization, मेडिकल ट्रीटमेंट या रेस्क्यू जैसी किसी भी प्रक्रिया पर आगे कदम बढ़ाया जाएगा। विभाग का मानना है कि हर हस्तक्षेप संतुलित और सावधानीपूर्वक होना चाहिए, क्योंकि जरा-सी गलती जानवरों के स्वाभाविक व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
जंगल का नियम: टेरिटोरियल लड़ाई
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह पहली बार नहीं है जब रिद्धि और उसकी बेटी के बीच संघर्ष हुआ हो। पिछले कुछ महीनों से बेटी लगातार अपनी अलग territory बनाने की कोशिश कर रही है। जैसे-जैसे वह शिकार पकड़ने और क्षेत्र की सुरक्षा में सक्षम होती जा रही है, वैसे-वैसे टकराव बढ़ रहा है।
जंगल में क्षेत्र का मतलब केवल जमीन नहीं, बल्कि शिकार, पानी और सुरक्षित आश्रय से भी है। इसी कारण बड़े शिकारी अक्सर एक-दूसरे से भिड़ते हैं। हालांकि मां-बेटी के बीच ऐसी लड़ाइयां भावनात्मक रूप से भले असामान्य लगें, लेकिन प्राकृतिक रूप से यह स्वतंत्र जीवन की ओर संक्रमण का हिस्सा भी माना जाता है।
संरक्षण की दृष्टि से अहम मामला
रणथंभौर टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ आवासों में से एक है। यहां हर बाघ और बाघिन की गतिविधि संरक्षण योजनाओं से जुड़ी होती है। इसलिए किसी भी टेरिटोरियल फाइट को केवल संघर्ष नहीं, बल्कि प्रबंधन के दृष्टिकोण से भी देखा जाता है। वन विभाग का कहना है कि फिलहाल दोनों बाघिनों की स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है। यदि किसी प्रकार का खतरा बढ़ता दिखा या संक्रमण का जोखिम सामने आया, तो तत्काल इलाज सुनिश्चित किया जाएगा।


