बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। खेजड़ी वृक्षों की कटाई के विरोध में संत समाज का आमरण अनशन कई दिनों से जारी है। महापड़ाव स्थल पर बड़ी संख्या में साधु-संत, महिलाएँ और पुरुष जुटे हुए हैं। वे सरकार से खेजड़ी संरक्षण को कानूनन लागू करने और कटाई पर कड़ी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। अनशनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन किसी भी परिस्थिति में रुकने वाला नहीं है। इस बीच बुधवार को 10 से अधिक अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद आंदोलन की गंभीरता और भी बढ़ गई है।
महापड़ाव स्थल पर गंभीर स्थिति, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर
अनशन करने वालों में साधु-संतों के साथ आम लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हैं। बुधवार को कई अनशनकारियों की तबीयत खराब होने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया। स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को देखते हुए एक विशेष मेडिकल टीम को स्थल पर तैनात कर दिया है। CMHO डॉ. पुखराज साध और डॉ. सुरेंद्र बराम के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम लगातार स्वास्थ्य जांच कर रही है।
मौके पर मौजूद पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे यह आंदोलन प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
संत समाज का अल्टीमेटम: एक दिन में समाधान नहीं तो आंदोलन और उग्र होगा
धरना स्थल पर मौजूद संत समाज ने सरकार को साफ शब्दों में एक दिन का अल्टीमेटम दिया है। संतों ने कहा कि खेजड़ी उनकी आस्था और धर्म का प्रतीक है और इसके संरक्षण के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन और भी व्यापक होगा। संतों का कहना है कि वे खेजड़ी वृक्ष की रक्षा के लिए प्राण त्यागने तक को तैयार हैं।
राजनीतिक समर्थन भी बढ़ रहा है, वसुंधरा राजे ने किया आंदोलन का समर्थन
खेजड़ी बचाओ आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, दोनों ही इस आंदोलन का समर्थन कर चुके हैं। मंगलवार को वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया पर खेजड़ी के पेड़ की पूजा करते हुए अपनी तस्वीर साझा की और खेजड़ी को पवित्र बताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
वसुंधरा ने कहा कि खेजड़ी कोई साधारण पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की परंपरा, आस्था और भावनाओं से जुड़ा हुआ वृक्ष है। उन्होंने कहा कि जब किसी देवता की पूजा की जाती है, तो उसकी रक्षा करना भी हमारा कर्तव्य है और राजनीति से ऊपर उठकर खेजड़ी बचाने के लिए आगे आना चाहिए।
अखिल भारतीय जीव रक्षा बिश्नोई महासभा की अपील
महासभा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवराज बिश्नोई ने कहा कि खेजड़ी धर्म, संस्कृति और पर्यावरण का आधार है और इसके संरक्षण को लेकर सरकार से जल्द संवाद होना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे यदि संतों की मांग को सही मानते हैं, तो विधानसभा में समर्थन देकर कानून प्रक्रिया शुरू करें। इसे बिश्नोई समाज का पर्यावरण बचाने का अंतिम प्रयास बताया गया है।


