केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद लाखों छात्र अपने अंकों के पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन प्रक्रिया का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। परिणाम आने के बाद हर वर्ष बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी होते हैं जो अपने प्राप्त अंकों की दोबारा जांच करवाना चाहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सीबीएसई ने री-इवैल्यूएशन, मार्क्स वेरिफिकेशन और उत्तर पुस्तिका की जांच से जुड़ी प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की घोषणा की थी। हालांकि जिस पोर्टल के शुरू होने का छात्रों को लंबे समय से इंतजार था, वह निर्धारित तिथि पर भी पूरी तरह से सुचारु रूप से कार्य नहीं कर सका। इसके चलते देशभर के हजारों छात्रों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
सीबीएसई ने पहले जानकारी दी थी कि पोस्ट-रिजल्ट सेवाओं से जुड़ा पोर्टल 29 मई 2026 से शुरू कर दिया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से छात्र अपने प्राप्त अंकों का सत्यापन, उत्तर पुस्तिका की प्रति प्राप्त करने और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते थे। बाद में बोर्ड ने घोषणा करते हुए पोर्टल की शुरुआत की तारीख को आगे बढ़ाकर 1 जून कर दिया। उस समय बोर्ड की ओर से कहा गया था कि तकनीकी व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से अतिरिक्त समय लिया जा रहा है। छात्रों को उम्मीद थी कि निर्धारित समय बढ़ाए जाने के बाद पोर्टल पूरी तरह तैयार होगा और उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
लेकिन 1 जून को स्थिति उम्मीदों के अनुरूप नहीं रही। सुबह से ही बड़ी संख्या में छात्र पोर्टल पर लॉगिन करने का प्रयास करते रहे, लेकिन अनेक विद्यार्थियों को वेबसाइट खुलने में कठिनाई हुई। कुछ छात्रों को वेबसाइट बार-बार लोड होने की समस्या का सामना करना पड़ा, जबकि कई अभ्यर्थियों को एरर मैसेज दिखाई दिए। कुछ मामलों में आवेदन से संबंधित लिंक सक्रिय नहीं मिले और कई उपयोगकर्ताओं ने पोर्टल के अनरिस्पॉन्सिव होने की शिकायत की। परिणामस्वरूप छात्र पूरे दिन आवेदन प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार करते रहे।
दोपहर के समय सीबीएसई ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए जानकारी दी कि री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन से संबंधित पोर्टल जल्द ही शुरू किया जाएगा। बोर्ड की इस सूचना के बाद भी कई घंटों तक छात्रों को आवेदन के लिए सक्रिय लिंक उपलब्ध नहीं हो पाया। इससे विद्यार्थियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। बड़ी संख्या में छात्र लगातार वेबसाइट को रिफ्रेश करते रहे और अपडेट का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी कि आवेदन प्रक्रिया वास्तव में कब शुरू होगी।
इस पूरी स्थिति ने छात्रों और अभिभावकों के बीच नाराजगी को बढ़ा दिया है। कई विद्यार्थियों का कहना है कि बोर्ड ने पोर्टल की शुरुआत पहले ही कुछ दिनों के लिए टाल दी थी, इसलिए उम्मीद की जा रही थी कि सभी तकनीकी कमियों को दूर कर लिया गया होगा। लेकिन निर्धारित नई तारीख पर भी यदि पोर्टल ठीक से कार्य नहीं करता है, तो इससे छात्रों का समय और मानसिक ऊर्जा दोनों प्रभावित होती हैं।
यह पहला अवसर नहीं है जब सीबीएसई के पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल को लेकर तकनीकी समस्याएं सामने आई हों। इससे पहले जब स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं को प्राप्त करने के लिए ऑनलाइन सुविधा शुरू की गई थी, तब भी कई छात्रों ने शिकायतें दर्ज कराई थीं। उस दौरान कुछ उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट पर खाली पृष्ठ दिखाई दे रहे थे, जबकि कुछ लिंक सही तरीके से कार्य नहीं कर रहे थे। कई छात्रों ने कैप्चा सत्यापन और लॉगिन प्रक्रिया में भी दिक्कतों की जानकारी दी थी। अब री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन पोर्टल के साथ भी लगभग वैसी ही समस्याएं सामने आने से छात्रों में असंतोष बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षा से जुड़े ऑनलाइन पोर्टलों पर एक साथ बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं के पहुंचने के कारण तकनीकी दबाव बढ़ जाता है। यदि सर्वर क्षमता और तकनीकी प्रबंधन पर्याप्त न हो तो वेबसाइट के कामकाज पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि छात्रों का तर्क है कि सीबीएसई जैसे बड़े राष्ट्रीय बोर्ड को ऐसी परिस्थितियों के लिए पहले से तैयार रहना चाहिए, क्योंकि परिणाम घोषित होने के बाद लाखों विद्यार्थी एक साथ इन सेवाओं का उपयोग करते हैं।
सबसे बड़ी चिंता आवेदन प्रक्रिया के लिए निर्धारित सीमित समय को लेकर है। री-इवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन के लिए बोर्ड केवल कुछ दिनों की समय-सीमा निर्धारित करता है। ऐसे में यदि शुरुआती दिनों में पोर्टल ठीक से काम नहीं करता है, तो छात्रों के पास आवेदन के लिए उपलब्ध समय कम हो जाता है। कई विद्यार्थी ऐसे हैं जिन्हें अपने अंकों को लेकर संदेह है और वे जल्द से जल्द आवेदन करना चाहते हैं, लेकिन तकनीकी बाधाओं के कारण वे प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
अभिभावकों का भी मानना है कि बोर्ड को किसी भी ऑनलाइन सेवा की शुरुआत से पहले उसकी पूरी तकनीकी जांच करनी चाहिए। उनका कहना है कि परीक्षा परिणाम के बाद का यह चरण छात्रों के भविष्य से जुड़ा होता है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही या तकनीकी अव्यवस्था विद्यार्थियों के लिए तनाव का कारण बन सकती है।
फिलहाल छात्र और अभिभावक सीबीएसई की ओर से आधिकारिक अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि बोर्ड जल्द ही तकनीकी समस्याओं का समाधान कर पोर्टल को पूरी तरह सक्रिय करेगा, ताकि विद्यार्थी बिना किसी परेशानी के अपने अंकों के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकें। शिक्षा जगत की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि बोर्ड इन शिकायतों का समाधान कितनी जल्दी करता है और छात्रों को राहत प्रदान करने के लिए क्या कदम उठाता है।


