मनीषा शर्मा। किशनगढ़ के मार्बल उद्योग में टैक्स चोरी का एक बड़ा मामला सामने आया है। मजदूरों के नाम पर फर्जी फर्में बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी (GST) चोरी करने की जानकारी मिलने के बाद DGGI (डायरेक्टरेट जनरल ऑफ GST इंटेलिजेंस) जयपुर की टीम ने बुधवार को विठ्ठल मार्बल पर अचानक दबिश दी। इस कार्रवाई ने मार्बल कारोबारियों में हड़कंप मचा दिया है।
करोड़ों की टैक्स चोरी का नेटवर्क बेनकाब
सूत्रों के अनुसार, विभाग ने हाल ही में की गई एक बड़ी कार्रवाई में करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी थी, जिसमें कई व्यापारी और बोगस फर्म संचालक शामिल पाए गए। इस नेटवर्क में मजदूरों के नाम पर फर्में खोलकर फर्जी बिलिंग की जा रही थी, जिससे बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी हो रही थी।
जांच में सामने आया कि कई आरोपी अब तक फरार हैं। इनकी तलाश और नेटवर्क की गहराई तक जाने के लिए विभाग लगातार इनपुट इकट्ठा कर रहा था। इन्हीं सुरागों के आधार पर DGGI टीम ने किशनगढ़ के विठ्ठल मार्बल पर सर्च ऑपरेशन चलाया।
डिजिटल दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच जारी
दबिश के दौरान टीम ने संदिग्ध लेन-देन और बिलिंग पैटर्न से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड जब्त किए।
जांच दल ने—
मजदूरों के नाम पर जारी संदिग्ध इनवॉइस
फर्जी ई-वे बिल
बोगस खरीद-फरोख्त के दस्तावेज
कंप्यूटर और डिजिटल फाइलें
इन सभी की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है। अधिकारियों ने बताया कि कई डिजिटल फाइलों की फॉरेंसिक जांच जारी है, जिससे और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
जांच में मिले अहम सुराग, बड़ा नेटवर्क होने की आशंका
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अब तक के सबसे बड़े टैक्स फ्रॉड नेटवर्क में से एक हो सकता है। प्राथमिक जांच में ऐसे कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जो यह दर्शाते हैं कि फर्जी फर्मों के माध्यम से सालों से बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की जा रही थी।
अधिकारियों ने कहा है कि दस्तावेजों की पूरी छानबीन के बाद ही विभाग आधिकारिक खुलासा करेगा। हालांकि शुरुआती निष्कर्षों से ही स्पष्ट हो गया है कि यह संगठित और योजनाबद्ध टैक्स चोरी का मामला है।
मार्बल उद्योग में बढ़ी चिंता, आगे और कार्रवाई की संभावना
किशनगढ़ का मार्बल उद्योग प्रदेश के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में से एक माना जाता है। ऐसे में इस बड़े खुलासे से उद्योग जगत में हलचल बढ़ गई है।
DGGI की इस कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि जल्द ही अन्य संदिग्ध फर्मों पर भी सख्त कार्रवाई हो सकती है। उद्योग से जुड़े कई व्यापारी अब जांच के दायरे में आ सकते हैं।


