राजस्थान में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां लगातार तेज होती जा रही हैं। राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और नामांकन का दूसरा दिन भी बीत रहा है, लेकिन अभी तक भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ही दलों ने अपने उम्मीदवारों के नामों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाओं का दौर जोरों पर है और विभिन्न नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। आगामी कुछ दिनों में दोनों दलों द्वारा उम्मीदवारों की घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिसके बाद चुनावी तस्वीर और अधिक स्पष्ट हो जाएगी।
वर्तमान राजनीतिक गणित को देखें तो राजस्थान विधानसभा में संख्या बल के आधार पर भाजपा को दो और कांग्रेस को एक सीट मिलने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चुनावी राजनीति में अंतिम समय तक समीकरण बदलते रहते हैं और इसी कारण इस बार भी कई तरह की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा की संभावित रणनीति को लेकर हो रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा यदि चाहे तो तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारकर चुनाव को रोचक बना सकती है। ऐसी स्थिति में निर्दलीय विधायकों के समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग के जरिए मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश की जा सकती है।
राजस्थान से राज्यसभा के जिन तीन सांसदों का कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है, उनमें कांग्रेस के नीरज डांगी और भाजपा के रवनीत सिंह बिट्टू तथा राजेंद्र गहलोत शामिल हैं। जून महीने में इन तीनों सांसदों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। वर्तमान स्थिति में भी इन तीन सीटों में से दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पास है। यही वजह है कि दोनों दल अपनी राजनीतिक रणनीति को बेहद सावधानी से तैयार कर रहे हैं।
भाजपा की ओर से जिन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, उनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू का नाम प्रमुख माना जा रहा है। राजनीतिक सूत्रों का मानना है कि पार्टी उन्हें एक बार फिर राज्यसभा भेज सकती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण उनका केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होना बताया जा रहा है। यदि वे निर्धारित समय के भीतर संसद के किसी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं तो उनके मंत्री पद पर भी प्रभाव पड़ सकता है। यही वजह है कि उनके नाम को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा है।
दूसरी सीट के लिए भाजपा में कई दावेदार सामने आ रहे हैं। इनमें सबसे प्रमुख नाम पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें मुख्यमंत्री पद का संभावित चेहरा माना जा रहा था, लेकिन चुनाव हारने के कारण वे सरकार में कोई महत्वपूर्ण पद हासिल नहीं कर सके। ऐसे में राज्यसभा उनके लिए राजनीतिक पुनर्स्थापना का एक बड़ा अवसर बन सकती है। इसी प्रकार भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। वे भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल रहे थे, लेकिन विधानसभा चुनाव में हार के कारण उन्हें सरकार में जगह नहीं मिल सकी। वर्तमान में वे संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं और पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
इसके अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी का नाम भी संभावित उम्मीदवारों की सूची में शामिल बताया जा रहा है। पश्चिमी राजस्थान में मजबूत राजनीतिक पकड़ रखने वाले कैलाश चौधरी को भी पार्टी राज्यसभा के लिए अवसर दे सकती है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व द्वारा राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
सबसे ज्यादा दिलचस्प चर्चा भाजपा द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारने की संभावना को लेकर है। यदि पार्टी ऐसा करती है तो किसी महिला नेता को मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस संदर्भ में जयपुर की पूर्व महापौर सौम्या गुर्जर का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने संगठन और जनसंपर्क के स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई है, जिससे उनकी पहचान एक प्रभावशाली महिला नेता के रूप में बनी है। इसके अलावा भाजपा की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर का नाम भी चर्चा में है। महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष राखी राठौर और वरिष्ठ नेता ज्योति मिर्धा को भी संभावित दावेदारों में शामिल माना जा रहा है। भाजपा यदि महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारती है तो यह राजनीतिक और सामाजिक संदेश देने की रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
दूसरी ओर कांग्रेस भी अपनी एकमात्र संभावित सीट के लिए मंथन कर रही है। कांग्रेस की ओर से सबसे अधिक चर्चा राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के नाम की हो रही है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के करीबी माने जाने वाले पवन खेड़ा राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का प्रमुख चेहरा हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस स्थानीय नेताओं के बीच गुटबाजी से बचने के लिए किसी राष्ट्रीय नेता को राज्यसभा भेजने का फैसला कर सकती है।
हालांकि स्थानीय नेताओं में भी कई नाम चर्चा में हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव भंवर जितेंद्र सिंह का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है। इसके अलावा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी और कांग्रेस नेता धीरज गुर्जर के नाम भी राजनीतिक चर्चाओं में शामिल हैं। सीपी जोशी को पार्टी का एक प्रभावशाली और अनुभवी चेहरा माना जाता है, इसलिए उनकी दावेदारी को भी गंभीरता से देखा जा रहा है। वहीं वर्तमान सांसद नीरज डांगी को दोबारा मौका मिलने की संभावनाओं से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपने अंतिम पत्ते नहीं खोले हैं। उम्मीदवारों की घोषणा में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा केवल अपनी दो सुनिश्चित सीटों पर ही ध्यान केंद्रित करेगी या फिर तीसरा उम्मीदवार उतारकर चुनाव को रोचक मोड़ देने का प्रयास करेगी। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही राजस्थान की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहा यह सस्पेंस समाप्त हो जाएगा और चुनावी मुकाबले की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाएगी।


