मनीषा शर्मा। राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। इसी कड़ी में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गुरुवार को कोटा शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण किया। मंत्री का यह दौरा पूरी तरह से चौंकाने वाला साबित हुआ, क्योंकि निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आईं, जिसने शिक्षा विभाग की पोल खोल दी।
सरकारी स्कूलों में अव्यवस्था
मदन दिलावर के निरीक्षण के दौरान ब्रजराजपुरा के एक सरकारी स्कूल में कई शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक शिक्षक क्लासरूम में पढ़ाने के बजाय मोबाइल चलाते हुए पकड़ा गया। मंत्री के स्कूल में पहुंचते ही वहां हड़कंप मच गया और कर्मचारी तुरंत व्यवस्थाएं दुरुस्त करने में जुट गए।
गुस्साए मंत्री ने मौके पर ही शिक्षक का मोबाइल जब्त कर लिया और स्पष्ट कर दिया कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे शिक्षकों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।
साफ-सफाई पर कड़ी नाराजगी
निरीक्षण के दौरान शिक्षा मंत्री ने स्कूलों में साफ-सफाई की स्थिति को बेहद खराब पाया। महावीर नगर के एक सरकारी स्कूल में गंदगी और अव्यवस्था देखकर उन्होंने नाराजगी जाहिर की। यहां पर रखे गए रजिस्टरों की भी जांच की गई, जिसमें उपस्थिति रजिस्टर, पीटीएम रिकॉर्ड और अन्य जरूरी कागजात अधूरे पाए गए।
मंत्री ने स्कूल प्राचार्य से पौधारोपण गतिविधियों के बारे में भी सवाल पूछे, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इससे मंत्री की नाराजगी और बढ़ गई।
स्वच्छता और पौधारोपण पर जोर
निरीक्षण के बाद शिक्षा मंत्री ने सभी स्कूलों में स्वच्छता अभियान चलाने और पौधारोपण को बढ़ावा देने के सख्त निर्देश दिए। उन्होंने प्राचार्यों और शिक्षकों से कहा कि बच्चों की डायरियां और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना जरूरी है। लापरवाही करने वाले किसी भी कर्मचारी या शिक्षक को बख्शा नहीं जाएगा।
अधिकारियों को फटकार
मंत्री ने मौके पर ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बुलाया और उनसे जवाब-तलब किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आगे भी ऐसी लापरवाहियां सामने आईं तो न केवल शिक्षकों बल्कि विभागीय अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों के भविष्य से समझौता नहीं
मदन दिलावर ने कहा कि सरकारी स्कूलों को बच्चों के भविष्य का आधार माना जाता है। यदि शिक्षक ही अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ेंगे तो बच्चों की शिक्षा पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने सभी शिक्षकों से अपील की कि वे पूरे मन से बच्चों को पढ़ाएं और सरकारी नीतियों को ईमानदारी से लागू करें।


