राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र माने जाने वाले शासन सचिवालय में मंगलवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रशासनिक सुधार विभाग की टीम ने अचानक औचक निरीक्षण कर कार्यप्रणाली की वास्तविक तस्वीर सामने रख दी। यह कार्रवाई अतिरिक्त मुख्य सचिव दिनेश कुमार के सख्त निर्देशों के बाद की गई, जिसने सचिवालय में लंबे समय से चली आ रही लापरवाही और सुस्त रवैये पर सीधा प्रहार किया है।
सुबह निर्धारित समय पर जैसे ही टीम सचिवालय की लाइब्रेरी बिल्डिंग में पहुंची, वहां का नजारा चौंकाने वाला था। कार्यालय खुलने के काफी देर बाद भी कई कुर्सियां खाली थीं और फाइलें अपने-अपने कर्मचारियों का इंतजार कर रही थीं। यह दृश्य न केवल कार्यसंस्कृति पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि सरकारी कामकाज किस हद तक प्रभावित हो सकता है। टीम ने सबसे पहले पांच हाजिरी रजिस्टर अपने कब्जे में लिए, ताकि कोई कर्मचारी बाद में आकर ‘बैक डेट’ में हस्ताक्षर कर अपनी उपस्थिति दर्ज न कर सके।
निरीक्षण के दौरान सामने आए आंकड़े बेहद चिंताजनक रहे। लाइब्रेरी बिल्डिंग में तैनात कुल 61 नॉन-गजेटेड कर्मचारियों में से 36 कर्मचारी अपनी सीट पर मौजूद नहीं पाए गए। यह अनुपस्थिति लगभग 59 प्रतिशत रही, जो किसी भी सरकारी कार्यालय के लिए बेहद गंभीर स्थिति मानी जाती है। इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों का एक साथ अनुपस्थित रहना यह संकेत देता है कि समय की पाबंदी और जिम्मेदारी को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी।
दिलचस्प बात यह रही कि जहां अधिकांश कर्मचारी अनुपस्थित मिले, वहीं बिल्डिंग में तैनात एकमात्र राजपत्रित अधिकारी अपने कार्यालय में मौजूद पाए गए। इससे यह स्पष्ट संदेश गया कि उच्च स्तर पर अनुशासन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, लेकिन निचले स्तर पर कार्यरत अमले में शिथिलता बनी हुई है। यह स्थिति प्रशासनिक ढांचे में मौजूद असंतुलन को भी उजागर करती है।
यह पूरी कार्रवाई प्रशासनिक सुधार विभाग की टीम द्वारा सुनील शर्मा और रामस्वरूप बिश्नोई के नेतृत्व में अंजाम दी गई। टीम ने कार्यालय समय शुरू होते ही अचानक निरीक्षण किया, जिससे कर्मचारियों को किसी भी प्रकार की तैयारी या बहाना बनाने का अवसर नहीं मिला। जैसे ही रजिस्टर जब्त किए जाने की सूचना फैली, कई कर्मचारी जो कैंटीन या पार्किंग क्षेत्र में समय बिता रहे थे, जल्दबाजी में लौटते दिखाई दिए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
इस कार्रवाई के बाद सचिवालय परिसर में दिनभर हलचल बनी रही। लाइब्रेरी बिल्डिंग में पसरा सन्नाटा इस बात का संकेत था कि निरीक्षण का असर तत्काल रूप से दिखाई देने लगा है। कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई कि अब प्रशासन की नजरें हर बिल्डिंग पर हैं और अगली कार्रवाई कहीं भी हो सकती है।
प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को सौंप दी है। सूत्रों के अनुसार, अनुपस्थित पाए गए सभी 36 कर्मचारियों की सूची संबंधित विभागों को भेज दी गई है। इन कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिसमें 17-CCA के तहत नोटिस जारी करना, वेतन कटौती करना और सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करना शामिल हो सकता है। यदि ये कार्रवाई लागू होती है, तो यह अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक सख्त संदेश साबित होगी।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी कार्यालयों में कार्यसंस्कृति और जवाबदेही को लेकर बहस छेड़ दी है। आमजन लंबे समय से यह शिकायत करते रहे हैं कि सरकारी दफ्तरों में काम समय पर नहीं होता और कर्मचारियों की लापरवाही के कारण लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में इस तरह की औचक कार्रवाई को प्रशासन की जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
सचिवालय के मुख्य भवन और एसएसओ बिल्डिंग में भी इस निरीक्षण की चर्चा पूरे दिन रही। कर्मचारियों के बीच एक प्रकार का भय और सतर्कता का माहौल देखा गया। कई कर्मचारियों ने समय पर कार्यालय पहुंचने और अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने की आवश्यकता को महसूस किया। यह स्पष्ट संकेत है कि प्रशासन अब कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सख्त रुख अपनाने जा रहा है।
इस कार्रवाई के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि सचिवालय में कार्यसंस्कृति में सुधार आएगा और कर्मचारी समय की पाबंदी का पालन करेंगे। साथ ही, इससे आमजन को भी बेहतर और समयबद्ध सेवाएं मिलने की संभावना बढ़ेगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जनता के काम में देरी और लापरवाही अब किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


